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Thursday, 21 May 2026
अपराध

टीसीएस मामला: निदा खान की तलाश तेज, एटीएस-एनआईए को सौंपी गई

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Komal
संवाददाता
📅 17 April 2026, 6:15 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.0K views
टीसीएस मामला: निदा खान की तलाश तेज, एटीएस-एनआईए को सौंपी गई
📷 aarpaarkhabar.com

मुंबई। टीसीएस के यौन उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के मामले में नई पड़ताल का आयाम अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। मुंबई पुलिस की विशेष जांच टीम एसआईटी ने फरार एचआर मैनेजर निदा खान को पकड़ने के लिए अब एसआईडी, एटीएस और एनआईए जैसी बड़ी एजेंसियों से तकनीकी मदद मांगी है। यह कदम इस बात को दर्शाता है कि जांच का दायरा कितना गंभीर और व्यापक हो गया है।

इस मामले में अब तक कुल नौ एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस की खुफिया नेटवर्क देशभर में निदा खान की तलाश कर रहा है। प्रारंभिक जांच में यह पता चला है कि निदा खान न केवल टीसीएस कर्मचारियों को शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रही थीं, बल्कि उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए भी दबाव दिया जा रहा था। यह पूरा मामला अब केवल एक कंपनी के आंतरिक मुद्दे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक गंभीर राष्ट्रीय मुद्दे का रूप ले चुका है।

एसआईडी, एटीएस और एनआईए को सौंपी गई जिम्मेदारी

एसआईटी ने निदा खान को ट्रैक करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। एसआईडी यानी राज्य आसूचना निदेशालय, जो महाराष्ट्र में सूचना और जासूसी का काम करता है, को इस मामले में शामिल किया गया है। एसआईडी टीम निदा खान की पूरी आर्थिक हलचल, बैंक लेनदेन, फोन रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच कर रही है।

एटीएस यानी एंटी-टेररिज्म स्क्वाड को भी इस मामले में लगाया गया है क्योंकि शक है कि निदा खान किसी संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकती हैं। एटीएस के पास देशव्यापी नेटवर्क है और उसे संगठित अपराधों को ट्रैक करने में विशेषज्ञता है। इसके अलावा, एनआईए यानी नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी को भी केस में शामिल किया गया है क्योंकि इस मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित पहलू भी हो सकते हैं।

जांच का विस्तार और नए खुलासे

जांच के दौरान पुलिस को पता चला है कि निदा खान टीसीएस में केवल एचआर मैनेजर नहीं थीं, बल्कि एक व्यापक षड्यंत्र का केंद्रीय कड़ी थीं। उन्होंने कंपनी में कई कर्मचारियों को अपने साथ काम करने के लिए नियुक्त किया था, जो उनके निर्देशों का पालन करते थे। ये कर्मचारी मिलकर विभिन्न कर्मचारियों को प्रताड़ित करते थे, विशेषकर उन महिलाओं को जो निदा खान के आदेशों का पालन नहीं करती थीं।

गिरफ्तार किए गए छह लोगों की पूछताछ से यह भी सामने आया है कि निदा खान के पास एक छुपी हुई डायरी थी जिसमें उन्होंने सभी पीड़ितों की जानकारी दर्ज की थी। पुलिस अब इस डायरी को ढूंढने के लिए संपूर्ण देश में तलाशी अभियान चला रही है। यह डायरी इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकती है।

पीड़ितों की संख्या और उनकी पीड़ा

अभी तक की जानकारी के अनुसार, कम से कम पचास से अधिक कर्मचारियां इस उत्पीड़न का शिकार हुए हैं। इनमें से अधिकांश महिलाएं हैं जो शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित की गईं। कुछ पीड़ितों ने बताया है कि उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया और यदि वे इस प्रस्ताव को ठुकरातीं, तो उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती थी।

पीड़ितों की मानसिक स्थिति बेहद खराब है। कुछ महिलाओं को गंभीर डिप्रेशन और ट्रॉमा का सामना करना पड़ा है। टीसीएस ने सभी पीड़ितों के लिए काउंसलिंग सेवाएं उपलब्ध कराई हैं और उनके लिए मुआवजे के पैकेज की घोषणा की है।

निदा खान की पृष्ठभूमि और संदेह

निदा खान का जन्म मुंबई में हुआ था और उन्होंने अपनी पढ़ाई लंदन से की थी। उन्होंने कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों में काम किया और टीसीएस में एचआर मैनेजर के पद पर नियुक्त हुईं। पुलिस को संदेह है कि निदा खान किसी विदेशी एजेंसी के निर्देशों में काम कर रही थीं और भारतीय कर्मचारियों को धर्मांतरित करना उनका मुख्य लक्ष्य था।

जांच में यह भी सामने आया है कि निदा खान के पास विदेशों में कई बैंक अकाउंट थे और वह नियमित रूप से विदेशों से धन प्राप्त कर रही थीं। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि वह यह धन किन स्रोतों से प्राप्त कर रही थीं, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण जांच का बिंदु है।

पुलिस की कार्रवाई और भविष्य की योजना

एसआईटी ने निदा खान को गिरफ्तार करने के लिए एक विस्तृत कार्य योजना तैयार की है। इसमें देश के सभी सीमावर्ती क्षेत्रों, हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर सतर्कता बढ़ाई जाएगी। पुलिस ने निदा खान के पासपोर्ट को रद्द कर दिया है और उसके नाम एक लाल घोषणा जारी की है।

सोशल मीडिया पर भी निदा खान की तलाश के बारे में जानकारी साझा की जा रही है और जनता से अपील की जा रही है कि यदि किसी को निदा खान की कोई जानकारी हो तो वह तुरंत पुलिस को सूचित करें। पुलिस ने गिरफ्तारी के लिए सूचना देने वाले को पचास लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।

यह मामला भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए एक गंभीर चेतावनी है। इससे पता चलता है कि कैसे कुछ लोग बड़ी कंपनियों में घुसकर व्यापक नुकसान पहुंचा सकते हैं। भविष्य में कंपनियों को अपनी नियुक्ति प्रक्रिया और कर्मचारियों की निगरानी में अधिक सतर्क रहना होगा।