ट्रंप की इमिग्रेशन पॉलिसी: H-1B में 25% कटौती
ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन पॉलिसी के बारे में एक बहुत बड़ी गलतफहमी जनता में है। सभी को लगता है कि यह नीति मुख्य रूप से अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए बनाई गई है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। सबसे ताजी रिपोर्ट्स और आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि ट्रंप प्रशासन का असली ध्यान कानूनी आप्रवासन को घटाने पर है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण H-1B वीजा में 25 प्रतिशत की कटौती है।
इमिग्रेशन पॉलिसी का असली चेहरा सामने आ गया है अब तक के आंकड़ों से। जो रिपोर्ट सामने आई है वह बताती है कि कानूनी प्रवेश में कटौती अवैध क्रॉसिंग में हुई कमी से ढाई गुना ज्यादा है। इसका मतलब यह है कि अगर अवैध घुसपैठ में 100 लोग कम आए, तो कानूनी रास्तों से 250 लोग कम आए हैं। यह आंकड़ा बहुत चिंताजनक है और सवाल खड़े करता है कि आखिर यह नीति किसके लिए बनाई गई है।
अगर हम कुल कमी को देखें तो पता चलता है कि उसका 72 प्रतिशत हिस्सा सीधे कानूनी रास्तों से आया है। मतलब साफ है कि ट्रंप प्रशासन ने अपना सारा ध्यान और शक्ति कानूनी आप्रवासन को कम करने में लगाई है। अवैध घुसपैठ तो एक बहाना लगता है, असली लक्ष्य तो कानूनी तरीकों से आने वाले लोगों को रोकना है।
H-1B वीजा में कटौती का असर
H-1B वीजा अमेरिका में काम करने वाले विदेशी पेशेवरों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। खासकर भारतीय आईटी इंजीनियर्स और तकनीकी विशेषज्ञ इसी वीजा के जरिए अमेरिका में काम करते हैं। अब जब 25 प्रतिशत की कटौती की जा रही है, तो लाखों भारतीयों की अमेरिका में काम करने की संभावना खतरे में है।
यह कटौती सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है। यह करोड़ों रुपये की आय, परिवारों की आकांक्षा और सपनों को तोड़ता है। भारतीय तकनीकी स्नातक जो अमेरिकी कंपनियों के लिए काम करना चाहते हैं, उनके लिए यह बिल्कुल नई चुनौती है। H-1B वीजा की संख्या हर साल 85,000 होती है, अब वह घटकर लगभग 63,750 रह जाएगी। यह कटौती बिना किसी सूचना के की गई है।
जो कंपनियां भारतीय प्रतिभा को नियुक्त करती हैं, वे भी परेशान हैं। सिलिकॉन वैली की बड़ी तकनीकी कंपनियां भारतीय इंजीनियर्स पर निर्भर हैं। अब उन्हें भारत में ही अपनी टीमें बनानी पड़ेंगी या अमेरिकी नागरिकों को प्रशिक्षित करना होगा। यह सब कुछ तुरंत संभव नहीं है।
कानूनी आप्रवासन में भारी गिरावट
कानूनी इमिग्रेशन में गिरावट सिर्फ H-1B तक सीमित नहीं है। परिवार के साथ आने वाले लोगों के लिए भी नियम कड़े किए गए हैं। विवाह के आधार पर ग्रीन कार्ड लेना अब और भी मुश्किल हो गया है। माता-पिता को अपने बच्चों को अमेरिका लाना भी अब आसान नहीं रह गया है।
अमेरिका एक संख्या-आधारित समाज है। यहां हर फैसले के पीछे आंकड़े होते हैं। जब ये आंकड़े सामने आते हैं तो पता चल जाता है कि असली नीति क्या है। यहां 2024 के आंकड़े बताते हैं कि कानूनी आप्रवासन में कितनी गिरावट आई है। पिछले साल की तुलना में इस साल कानूनी रूप से अमेरिका आने वाले लोगों की संख्या में भारी कमी देखी गई है।
भारत से आने वाले लोग विशेष रूप से प्रभावित हुए हैं। भारतीय डॉक्टर्स, इंजीनियर्स, शिक्षकों और अन्य पेशेवरों के लिए H-1B वीजा पाना अब बिल्कुल लॉटरी जैसा हो गया है। लाखों आवेदन में से हजार को ही चयनित किया जाता था, अब तो वह और भी कम हो जाएंगे।
भविष्य में क्या होगा?
ट्रंप की इमिग्रेशन पॉलिसी के दूरगामी परिणाम होंगे। सबसे पहले तो भारतीय इकोनॉमी को झटका लगेगा। भारत के युवा जो अमेरिका में काम करके पैसा भेजते हैं, वह संभव नहीं हो पाएगा। यह विदेशी मुद्रा की आय में कमी का कारण बनेगा।
दूसरा, अमेरिकी कंपनियों की प्रतिस्पर्धी क्षमता प्रभावित होगी। भारतीय इंजीनियर्स के बिना अमेरिकी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछड़ सकती हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सॉफ्टवेयर विकास में भारतीय प्रतिभा अत्यंत महत्वपूर्ण है।
तीसरा, यह नीति भारत-अमेरिका संबंधों पर असर डालेगी। भारत के युवा जो अमेरिका में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं, वे निराश होंगे और शायद अन्य देशों की ओर देखने लगेंगे।
कुल मिलाकर, ट्रंप की इमिग्रेशन पॉलिसी अवैध घुसपैठ को रोकने की बजाय कानूनी, योग्य और विदेशी प्रतिभा को अमेरिका से दूर कर रही है। यह एक विरोधाभास है जो आने वाले समय में और स्पष्ट होता जाएगा।




