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Wednesday, 15 July 2026
विश्व

ट्रंप ने ईरान को दिए दो रास्ते सैन्य या समझौता

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Komal
संवाददाता
📅 02 May 2026, 6:00 AM ⏱ 1 मिनट 👁 452 views
ट्रंप ने ईरान को दिए दो रास्ते सैन्य या समझौता
📷 aarpaarkhabar.com

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के मुद्दे पर एक स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि तेहरान के सामने केवल दो ही रास्ते हैं। पहला सैन्य कार्रवाई और दूसरा समझौता। ट्रंप ने ईरान द्वारा दिए गए नए प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इस मसले को लेकर अमेरिकी प्रशासन की ओर से बेहद सख्त रुख देखने को मिल रहा है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने कांग्रेस द्वारा पारित 60 दिन की समयसीमा वाले वॉर पावर्स रिजोल्यूशन को असांविधानिक बताया है। उन्होंने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि अमेरिकी सरकार इस मामले में कांग्रेस से अलग से मंजूरी नहीं लेगी। वाशिंगटन में राष्ट्रपति के इस बयान ने एक बार फिर से अमेरिकी राजनीति में तनाव पैदा कर दिया है।

ईरान और अमेरिका के बीच संबंध पिछले कई दशकों से तनावपूर्ण रहे हैं। हाल के महीनों में इस तनाव में काफी इजाफा हुआ है। अमेरिका ईरान को अपना प्रमुख दुश्मन मानता है। ईरान की परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी अमेरिका की ओर से लगातार चिंता व्यक्त की जा रही है।

ट्रंप का सख्त रुख और कांग्रेस का विरोध

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा है कि अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ किसी भी समय सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को अपनी गलत नीतियों से हटना होगा और अमेरिकी शर्तों पर स्वीकार करना होगा। कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर ट्रंप के रुख का विरोध किया जा रहा है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं का कहना है कि सैन्य कार्रवाई के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी है।

वॉर पावर्स एक्ट के तहत राष्ट्रपति को 60 दिन तक सैन्य कार्रवाई करने का अधिकार है, लेकिन इसके बाद कांग्रेस की मंजूरी लेनी होती है। ट्रंप का कहना है कि यह प्रावधान राष्ट्रपति की शक्तियों में बाधा डालता है। उन्होंने इस कानून को संविधान के विरुद्ध बताया है।

ईरान के प्रस्ताव को खारिज करना

तेहरान ने हाल ही में एक नया प्रस्ताव रखा था जिसमें अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की बात कही गई थी। ईरान के नेतृत्व ने कहा था कि वह अंतर्राष्ट्रीय कानून के ढांचे में समझौता करने के लिए तैयार है। लेकिन ट्रंप ने इस प्रस्ताव को बिना किसी विचार-विमर्श के सीधे खारिज कर दिया।

अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि ईरान के प्रस्ताव वास्तविक नहीं हैं और वह सिर्फ समय लाभ के लिए ये प्रस्ताव दे रहा है। ट्रंप के अनुसार, ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह रोकना होगा और अमेरिका द्वारा लगाए गए सभी प्रतिबंधों को स्वीकार करना होगा। वाशिंगटन ईरान के साथ किसी भी तरह का समझौता तभी करेगा जब ईरान अपनी सभी शर्तें मानेगा।

ईरान ने इसके जवाब में कहा है कि अमेरिका के सख्त रुख से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ेगा। तेहरान का मानना है कि संवाद ही एकमात्र रास्ता है जो इस संकट को हल कर सकता है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में ऐसा लगता है कि दोनों देश बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं।

अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियां और प्रभाव

ईरान-अमेरिका के बीच तनाव पूरे विश्व के लिए चिंताजनक है। पश्चिम एशिया के अन्य देश इस संकट से सीधे प्रभावित होंगे। इजरायल, सऊदी अरब और अन्य देश अमेरिका के साथ हैं। वहीं ईरान के पास रूस और चीन का समर्थन है। इसलिए यह संकट किसी भी समय एक बड़े संघर्ष में बदल सकता है।

तेल की कीमतों में वृद्धि का खतरा भी है। यदि ईरान क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई होती है तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान हो सकता है। यूरोपीय देशों ने भी अमेरिका से सैन्य कार्रवाई के पहले संवाद करने की अपील की है।

अंतर्राष्ट्रीय संगठनों जैसे संयुक्त राष्ट्र ने भी चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा है कि इस मामले में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई से पहले सभी राजनयिक रास्तों को आजमाया जाना चाहिए। लेकिन ट्रंप का रुख इतना सख्त है कि ऐसा लगता है कि वह किसी भी सलाह को सुनने के लिए तैयार नहीं हैं।

वर्तमान समय में अमेरिका और ईरान के बीच संकट में किसी तरह का सुधार नहीं दिखाई दे रहा है। ट्रंप का रुख स्पष्ट है कि या तो ईरान अमेरिकी शर्तें मानेगा या फिर सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार रहे। यह परिस्थिति आने वाले दिनों में और भी तनावपूर्ण हो सकती है। विश्व इस स्थिति को बहुत गंभीरता से देख रहा है क्योंकि इसके परिणाम सभी के लिए विनाशकारी हो सकते हैं।