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Thursday, 21 May 2026
समाचार

ट्रंप ने खुद को जीसस की तरह दिखाया – विवादित पोस्ट

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Komal
संवाददाता
📅 13 April 2026, 12:49 PM ⏱ 1 मिनट 👁 385 views

ट्रंप का सोशल मीडिया पोस्ट बना विवाद का कारण: राष्ट्रपति ने खुद को जीसस के रूप में दिखाया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। इस बार उनका ट्रूथ सोशल प्लेटफॉर्म पर शेयर किया गया एक पोस्ट तूफान मचा रहा है, जिसमें वे खुद को जीसस क्राइस्ट के रूप में प्रस्तुत करते दिख रहे हैं। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है और इसने धार्मिक समुदायों से लेकर राजनीतिक हलकों तक में तीखी बहस छेड़ दी है।

यह पहला मौका नहीं है जब ट्रंप ने ऐसी विवादास्पद सामग्री साझा की हो। पिछले कई वर्षों में वे कई बार धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करके खुद को एक मसीहा के रूप में पेश करने की कोशिश कर चुके हैं।

ट्रंप ने खुद को जीसस की तरह दिखाया - विवादित पोस्ट

वायरल पोस्ट की विस्तृत जानकारी

ट्रंप का यह पोस्ट सोमवार की सुबह ट्रूथ सोशल पर शेयर किया गया था। इस पोस्ट में एक डिजिटल इमेज है जिसमें ट्रंप को जीसस क्राइस्ट की तरह दिखाया गया है। यह इमेज क्लासिक धार्मिक पेंटिंग्स की शैली में बनाई गई है, जिसमें ट्रंप के चेहरे को पारंपरिक ईसाई कलाकृतियों के साथ जोड़ा गया है।

पोस्ट के साथ कोई विशेष कैप्शन नहीं था, लेकिन इसकी प्रतीकात्मक प्रकृति ने तुरंत ही लोगों का ध्यान खींचा। कुछ ही घंटों में यह पोस्ट हजारों बार शेयर हो गया और इस पर हजारों टिप्पणियां आईं।

धार्मिक समुदायों की प्रतिक्रिया

इस पोस्ट को लेकर धार्मिक समुदायों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कई ईसाई नेताओं ने इसे आपत्तिजनक और ईशनिंदा बताया है। न्यूयॉर्क के एक प्रमुख चर्च के पादरी फादर मार्टिन जेम्स ने कहा, "यह गहरी चिंता की बात है कि एक राष्ट्रपति अपने राजनीतिक फायदे के लिए धार्मिक प्रतीकों का इस तरह गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।"

वहीं दूसरी ओर, ट्रंप के कुछ कट्टर समर्थकों ने इस पोस्ट का बचाव किया है। उनका कहना है कि यह केवल एक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है और इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

कैथोलिक चर्च के कई पादरियों ने भी इस पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक छवियों का दुरुपयोग करना अनुचित है।

राजनीतिक हलकों में हलचल

डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने इस पोस्ट की कड़ी आलोचना की है। हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी ने एक बयान में कहा, "यह राष्ट्रपति के कार्यालय की गरिमा के लिए शर्मनाक है। अमेरिकी राष्ट्रपति को धार्मिक संवेदनाओं का सम्मान करना चाहिए।"

रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेता भी इस पोस्ट को लेकर असहज दिख रहे हैं। हालांकि उन्होंने खुलकर आलोचना नहीं की है, लेकिन कई नेताओं ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से बचा है।

सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया

ट्विटर, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस पोस्ट को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई है। हैशटैग #TrumpJesusPost ट्रेंड कर रहा है और लोग अपनी राय साझा कर रहे हैं।

कुछ यूजर्स ने इसे "धार्मिक कट्टरता" बताया है, जबकि अन्य ने कहा है कि यह "कला की स्वतंत्रता" का मामला है। सोशल मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि यह पोस्ट ट्रंप की चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

पूर्व की विवादास्पद घटनाएं

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करके विवाद पैदा किया हो। पिछले साल भी उन्होंने एक पोस्ट में खुद को बाइबिल के एक चरित्र के साथ तुलना की थी। 2020 में भी उन्होंने कई बार अपने भाषणों में खुद को "चुना हुआ" व्यक्ति बताया था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह तरीका उनके कोर समर्थक आधार को मजबूत करने की रणनीति है। वे जानबूझकर विवादास्पद पोस्ट करते हैं ताकि मीडिया में चर्चा बनी रहे।

आगे की चुनौतियां

यह पोस्ट ट्रंप के लिए कई नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है। धार्मिक मतदाताओं का एक बड़ा तबका इससे नाराज हो सकता है, जो उनकी चुनावी संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं अमेरिकी समाज में धार्मिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण को और बढ़ा सकती हैं। यह देश की एकता के लिए चुनौती बन सकता है।