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Wednesday, 19 August 2026
राजनीति

ट्रंप-मेलोनी रिश्ते खराब हुए एक गलती से

author
Komal
संवाददाता
📅 20 June 2026, 7:01 AM ⏱ 1 मिनट 👁 847 views
ट्रंप-मेलोनी रिश्ते खराब हुए एक गलती से
📷 aarpaarkhabar.com

डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का रिश्ता पिछले कुछ समय में काफी तनावपूर्ण हो गया है। ये बहुत ही आश्चर्यजनक है कि ट्रंप के सबसे कट्टर समर्थकों में से एक मेलोनी अब उनकी कड़ी आलोचक बन गई हैं। लेकिन वर्तमान परिस्थितियां हमेशा से ऐसी नहीं रहीं। मेलोनी ही वह इकलौती यूरोपीय नेता थीं जो साल 2025 में ट्रंप के राष्ट्रपति शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने गईं थीं। यह घटना उनकी ट्रंप के प्रति वफादारी और सहयोग का प्रमाण थी। लेकिन अब राजनीतिक जानकारों और विश्लेषकों का मानना है कि लगभग डेढ़ साल के बाद मेलोनी और ट्रंप के बीच के संबंध बिल्कुल ही खराब हो चुके हैं।

इस पूरे प्रकरण में एक विशेष घटना थी जिसने दोनों नेताओं के बीच की खाई को काफी गहरा कर दिया। यूरोपीय राजनीति में मेलोनी एक शक्तिशाली व्यक्तित्व हैं। वह अपने दक्षिणपंथी विचारधारा के लिए जानी जाती हैं और ट्रंप जैसे विचारों को साझा करती हैं। दोनों में काफी समानताएं थीं जो उन्हें एक दूसरे के करीब लाई थीं। लेकिन एक विशेष मुद्दे पर असहमति ने उनके रिश्ते को बर्बाद कर दिया।

ट्रंप के शपथ ग्रहण में मेलोनी की मौजूदगी

जनवरी 2025 में जब डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में दूसरी बार शपथ ली, तो वह अवसर बेहद महत्वपूर्ण था। दुनिया भर के नेताओं को इस समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था। लेकिन यूरोपीय नेताओं में से केवल जॉर्जिया मेलोनी ही इस अनुष्ठान में उपस्थित रहीं। यह एक प्रतीकात्मक कदम था जिसने साफ संदेश दिया कि मेलोनी ट्रंप की सबसे बड़ी समर्थक हैं। उन्होंने इस यात्रा के माध्यम से यह दिखाया कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ करीबी संबंध रखती हैं।

इस घटना के बाद मेलोनी को एक वैश्विक नेता के रूप में अधिक मान्यता मिली। उन्हें ट्रंप का सबसे विश्वस्त यूरोपीय सहयोगी माना जाने लगा। इटली और अमेरिका के संबंधों को लेकर काफी सकारात्मक बातें कहीं जाने लगीं। सभी को लगता था कि यह अवसर दोनों देशों के बीच नए सहयोग का द्वार खोलेगा।

विवादास्पद निर्णय जिसने सब कुछ बदल दिया

हालांकि, शपथ ग्रहण समारोह के बाद कुछ महीनों में ही परिस्थितियां बदलने लगीं। ट्रंप ने एक ऐसा निर्णय लिया जो मेलोनी को बिल्कुल पसंद नहीं आया। यूरोपीय संघ के हितों से सीधे टकराव वाले इस कदम ने मेलोनी को सार्वजनिक रूप से ट्रंप की आलोचना करने के लिए मजबूर कर दिया। यह वह क्षण था जब राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए।

मेलोनी ने ट्रंप की कुछ नीतियों को लेकर गंभीर आपत्तियां जताईं। उन्होंने कहा कि कुछ निर्णय यूरोप की सुरक्षा और स्वार्थों के खिलाफ थे। यह आलोचना काफी कड़ी थी और इसने दोनों नेताओं के बीच की दूरी को काफी बढ़ा दिया। मेलोनी का यह रुख काफी आश्चर्यजनक था क्योंकि वह अभी कुछ महीने पहले ट्रंप की सबसे बड़ी समर्थक नजर आ रही थीं।

राजनीतिक परिणाम और भविष्य की चिंताएं

इस विच्छेद ने यूरोपीय राजनीति में काफी प्रभाव डाला। अन्य यूरोपीय नेताओं ने मेलोनी के इस रुख को सकारात्मक माना और उनका समर्थन किया। साथ ही, ट्रंप भी इस आलोचना से खुश नहीं रहे। उन्होंने सोशल मीडिया पर मेलोनी के बारे में कुछ कटु टिप्पणियां कीं। यह पूरा प्रकरण दिखाता है कि राजनीतिक गठबंधन कितने आसानी से टूट सकते हैं।

वर्तमान में, मेलोनी और ट्रंप के संबंधों में सुधार की संभावनाएं काफी कम दिखाई दे रही हैं। दोनों अपनी-अपनी स्थिति पर दृढ़ रहे हैं। मेलोनी यूरोपीय हितों की रक्षा करते हुए अपनी आलोचनात्मक मुद्रा बनाए रखी हैं। वहीं, ट्रंप भी अपनी नीतियों में किसी प्रकार की छूट देने के लिए तैयार नहीं हैं। यह तनावपूर्ण स्थिति आने वाले समय में और भी जटिल हो सकती है।

राजनीति में ऐसे उदाहरण कम नहीं हैं जहां सहयोगी आलोचक बन जाते हैं और विरोधी समर्थक। लेकिन ट्रंप-मेलोनी का यह मामला काफी चर्चित रहा है क्योंकि यह दोनों नेताओं की ओर से अचानक परिवर्तन था। जॉर्जिया मेलोनी की यह यात्रा एक कट्टर समर्थक से कड़ी आलोचक तक पहुंचने की गई। इस प्रकरण से साफ संदेश मिलता है कि भले ही विचारधारा समान हो, राष्ट्रीय हितों के आगे व्यक्तिगत संबंध नहीं टिकते। यूरोप और अमेरिका के बीच की इस नई खाई को भरने में काफी समय लग सकता है।