ट्रंप का यूरोप को 100% टैरिफ का धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से विश्व व्यापार में तूफान मचाने की तैयारी कर दी है। उन्होंने यूरोपीय देशों के लिए एक गंभीर चेतावनी जारी की है कि यदि कोई भी देश अमेरिकी डिजिटल सेवा कंपनियों पर कर लगाएगा, तो अमेरिका उन देशों के सामानों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगा देगा। यह घोषणा विश्व व्यापार में एक बड़ा संकेत है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों में तनाव की ओर इशारा करती है।
ट्रंप ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि यह नया टैरिफ प्रावधान पहले के किसी भी द्विपक्षीय या बहुपक्षीय व्यापार समझौते से अधिक कठोर और प्रभावशाली होगा। उन्होंने खासतौर पर यूरोपीय संघ के देशों का नाम लिया है, जो गूगल, मेटा और अन्य अमेरिकी टेक कंपनियों पर डिजिटल सेवा कर लगाने की योजना बना रहे हैं।
डिजिटल सेवा कर पर ट्रंप की नापसंदगी
डिजिटल सेवा कर की अवधारणा यूरोपीय देशों ने तैयार की है। इसका मुख्य मकसद है कि बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियां जो यूरोप में विशाल राजस्व उत्पन्न करती हैं, उन्हें उचित कर देना चाहिए। किंतु अमेरिकी राष्ट्रपति इस कर को अपनी कंपनियों के विरुद्ध भेदभाव पूर्ण नीति मानते हैं। उन्होंने कहा है कि यह कर केवल अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाता है और दूसरे देशों की कंपनियों को नहीं।
ट्रंप ने अपने पूर्व कार्यकाल के दौरान भी अमेरिकी व्यापार हितों की रक्षा के लिए आक्रामक नीति अपनाई थी। वे चीन और यूरोपीय देशों पर विभिन्न प्रकार के टैरिफ लगा चुके हैं। इस बार भी वे समान रणनीति अपना रहे हैं। उनका मानना है कि अमेरिकी कंपनियों को विश्व बाजार में अपना व्यापार करने का पूरा अधिकार है।
यूरोपीय देशों ने डिजिटल सेवा कर के माध्यम से अपने राजस्व को बढ़ाने की कोशिश की है। फ्रांस, जर्मनी, इटली और अन्य यूरोपीय देशों ने इस तरह के कर लगाए हैं। ये देश मानते हैं कि बहुराष्ट्रीय अमेरिकी कंपनियां यूरोपीय संघ में विशाल मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन उचित कर नहीं दे रहीं।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सुरक्षा की रणनीति
ट्रंप की यह नीति अमेरिकी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने की एक रणनीति है। वे मानते हैं कि अमेरिकी व्यापार घाटा कम करने के लिए ऐसी आक्रामक नीति आवश्यक है। उनके प्रशासन में अर्थशास्त्रियों की एक टीम है जो व्यापार नीति को अधिक सख्त और संरक्षणवादी बनाने की सलाह देती है।
100 प्रतिशत टैरिफ का अर्थ है कि किसी भी यूरोपीय देश का सामान अमेरिका में आने से पहले उसकी कीमत दो गुनी हो जाएगी। इससे अमेरिकी बाजार में उन देशों की कंपनियों की प्रतिस्पर्धा क्षमता पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी। यह एक चरम कदम है जो वास्तव में एक व्यापार युद्ध की शुरुआत कर सकता है।
ट्रंप की यह चेतावनी यूरोपीय नेताओं के लिए चिंता का विषय बन गई है। यूरोपीय संघ के अधिकारियों ने तुरंत जवाब दिया है। उन्होंने कहा है कि वे डिजिटल सेवा कर पर पीछे नहीं हटेंगे, क्योंकि यह उनकी राजस्व नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विश्व व्यापार व्यवस्था पर असर
ट्रंप की इस नीति से विश्व व्यापार व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। यदि अमेरिका वास्तव में 100 प्रतिशत टैरिफ लगाता है, तो अन्य देश भी अमेरिकी सामानों पर समान कदम उठा सकते हैं। इससे वैश्विक व्यापार में भारी गिरावट आ सकती है।
आर्थिक विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की संरक्षणवादी नीति दीर्घकालीन आर्थिक विकास में बाधा डालती है। हालांकि ट्रंप इसे अमेरिकी नागरिकों के हितों की रक्षा के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
विश्व व्यापार संगठन ने पहले भी अमेरिका की ऐसी नीतियों पर चिंता व्यक्त की है। लेकिन ट्रंप प्रशासन विश्व व्यापार संगठन के नियमों को मानने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाता है।
वर्तमान परिस्थिति में यूरोपीय देशों के लिए एक कठिन निर्णय लेना होगा। वे या तो अपनी डिजिटल सेवा कर नीति को वापस लेंगे, या फिर अमेरिकी टैरिफ का सामना करेंगे। दोनों ही स्थितियों में उनको काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह व्यापार विवाद आने वाले समय में और भी जटिल हो सकता है।




