🔴 ब्रेकिंग
TMC ऑफिस पर ताला: ममता के खिलाफ ऋतब्रत का विद्रोह|पुरानी झाड़ू हटाएं और बढ़ाएं बैंक बैलेंस|दिग्विजय सिंह राम मंदिर चंदा वापस लेंगे कोर्ट में|वैभव सूर्यवंशी का न्यू चैप्टर पोस्ट डेब्यू या सरप्राइज|शोहरत की कीमत: आलिया की ट्रोलिंग पर महेश भट्ट|उत्तर-पश्चिम भारत में तेज बारिश, मॉनसून अपडेट|मानसून में राजस्थान की 5 सबसे खूबसूरत जगहें|फ्रांस ने अमेरिका को दिया स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी गिफ्ट|राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई बैठक, इस्तीफों पर विचार|खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति का दर्द भरा रोना|TMC ऑफिस पर ताला: ममता के खिलाफ ऋतब्रत का विद्रोह|पुरानी झाड़ू हटाएं और बढ़ाएं बैंक बैलेंस|दिग्विजय सिंह राम मंदिर चंदा वापस लेंगे कोर्ट में|वैभव सूर्यवंशी का न्यू चैप्टर पोस्ट डेब्यू या सरप्राइज|शोहरत की कीमत: आलिया की ट्रोलिंग पर महेश भट्ट|उत्तर-पश्चिम भारत में तेज बारिश, मॉनसून अपडेट|मानसून में राजस्थान की 5 सबसे खूबसूरत जगहें|फ्रांस ने अमेरिका को दिया स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी गिफ्ट|राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई बैठक, इस्तीफों पर विचार|खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति का दर्द भरा रोना|
Saturday, 04 July 2026
विश्व

होर्मुज पर अमेरिका शुल्क लगाएगा: ट्रंप का बयान

author
Komal
संवाददाता
📅 21 June 2026, 5:32 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.1K views
होर्मुज पर अमेरिका शुल्क लगाएगा: ट्रंप का बयान
📷 aarpaarkhabar.com

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बहुत ही विवादास्पद बयान दिया है जिससे न केवल पश्चिम एशिया बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच अगले साठ दिनों में अंतिम समझौता नहीं हो पाया, तो होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी जहाजों पर शुल्क लगाया जाएगा। यह बयान अत्यंत गंभीर हो सकता है क्योंकि होर्मुज दुनिया की तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है।

ट्रंप का यह कदम आर्थिक राजनीति का एक नया उदाहरण है जहां वह वैश्विक व्यापार को अपने राजनीतिक एजेंडे के अनुसार नियंत्रित करना चाहते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से हर दिन विश्व की तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस पर शुल्क लगाने का मतलब है कि विश्व के तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। यह न केवल विकसित देशों को प्रभावित करेगा बल्कि भारत जैसे विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था को भी गहरा झटका दे सकता है।

ट्रंप की नीति और उसके पीछे का मकसद

ट्रंप अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी ईरान के प्रति कठोर रुख अपनाते रहे हैं। उन्होंने परमाणु समझौते से अमेरिका को अलग कर दिया था। अब दूसरे कार्यकाल में वह फिर से वही रणनीति अपनाने जा रहे हैं। होर्मुज पर शुल्क लगाने की बात कहकर वह ईरान पर दबाव डालना चाहते हैं ताकि वह अमेरिका की शर्तों पर कोई नया परमाणु समझौता करे।

लेकिन यह नीति अत्यंत जोखिम भरी है। जब आप किसी एक देश को निशाना बनाते हुए वैश्विक व्यापार मार्गों पर नियंत्रण करने का प्रयास करते हैं, तो उसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। यह किसी भी तरह से उचित नहीं है और न ही यह अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार सही है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य एक अंतरराष्ट्रीय जल है और इस पर किसी एक देश का अधिकार नहीं है।

ईरान की प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय तनाव

ईरान ने भी अपनी तरफ से जवाब दिया है। ईरान ने कहा है कि उसने अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन किया है लेकिन अमेरिका और पश्चिमी देशों ने समझौते का उल्लंघन किया है। ईरान ने होर्मुज में आवाजाही पर कुछ प्रतिबंध भी लगाए हैं जिससे क्षेत्र में और भी अधिक तनाव बढ़ रहा है।

पश्चिम एशिया में पहले से ही इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष चल रहा है। इसके अलावा सीरिया और यमन में भी गृह युद्ध जैसी स्थितियां हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता हुआ यह तनाव पूरे क्षेत्र में और भी अस्थिरता ला सकता है। कोई भी सैन्य घटना होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध कर सकती है जिससे विश्व की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो सकता है।

भारत और अन्य देशों पर असर

भारत के लिए यह खबर विशेष चिंता का विषय है। भारत अपनी तेल की आवश्यकता का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। अगर होर्मुज पर शुल्क लगेगा या व्यापार मार्ग में कोई बाधा आएगी, तो भारत के लिए तेल की कीमते बढ़ जाएंगी। इससे भारत के मुद्रास्फीति दर में वृद्धि होगी और आम जनता को महंगाई का दंश झेलना पड़ेगा।

जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों के लिए भी यह समस्या गंभीर हो सकती है क्योंकि ये सभी देश होर्मुज से गुजरने वाले तेल पर निर्भर हैं। यूरोपीय देशों को भी इसका असर पड़ेगा। अगर ट्रंप सच में होर्मुज पर शुल्क लगाते हैं, तो यह एक वैश्विक आर्थिक संकट का कारण बन सकता है।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों और तनावों का खर्च अब दुनिया के साधारण नागरिकों को भुगतना पड़ेगा। ट्रंप की यह नीति एक तरफा राजनीति की ओर एक कदम है जो विश्व के अंतरराष्ट्रीय कानूनों और सिद्धांतों के विरुद्ध है। अब देखना है कि अगले साठ दिनों में क्या होता है और क्या कोई समझौता संभव हो पाता है या फिर दुनिया एक और बड़े संकट की तरफ बढ़ रही है। वैश्विक समुदाय को इस मामले में सचेत और एकजुट होना चाहिए ताकि किसी एक देश की नीति पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को नष्ट न कर दे।