यूपी होमगार्ड एग्जाम में UPSC लेवल के सवाल
यूपी होमगार्ड भर्ती परीक्षा में UPSC स्तर के सवाल
उत्तर प्रदेश के होमगार्ड विभाग द्वारा जारी की गई भर्ती परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों के बीच काफी हलचल मच गई है। सोशल मीडिया पर लाखों युवाओं ने अपना गुस्सा प्रकट किया है कि चपरासी और होमगार्ड की पोस्ट के लिए जो प्रश्नपत्र तैयार किए गए हैं, वे संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC के स्तर के हैं। इस बात को लेकर बहुत सारे प्रश्न उठ रहे हैं कि क्या सरकार अब चपरासी की भर्ती के लिए वैज्ञानिक और इंजीनियर ढूंढ रही है?
यूपी होमगार्ड भर्ती परीक्षा 2026 को लेकर जो विवाद खड़े हो गए हैं, उससे यह साफ हो गया है कि परीक्षा का स्तर और पद की योग्यता में बहुत बड़ा अंतर है। अभ्यर्थियों का कहना है कि इस तरह के कठिन प्रश्न पूछने से केवल बड़ी डिग्री वाले लोगों को ही फायदा मिलेगा। साधारण शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए यह परीक्षा एक अग्निपरीक्षा बन गई है। इसी वजह से अब सभी का ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि आखिरकार इस परीक्षा की कट-ऑफ कितनी हो सकती है।
परीक्षा की कठिनाई और अभ्यर्थियों की चिंता
जब से यूपी होमगार्ड विभाग ने भर्ती परीक्षा का घोषणा की है, तब से लेकर आज तक अभ्यर्थियों के मन में एक ही सवाल घूम रहा है कि आखिरकार इस परीक्षा में पास होने के लिए कितने अंक चाहिए होंगे। परीक्षा केंद्रों से निकले हुए छात्रों के बयानों को सुनकर लगता है कि प्रश्नपत्र वाकई बहुत ही कठिन था। कई विद्यार्थियों ने यह भी कहा है कि कुछ प्रश्न तो वे अपनी बारहवीं की पढ़ाई में भी नहीं देख पाए थे।
होमगार्ड की परीक्षा में सामान्य ज्ञान, गणित, विज्ञान और सामाजिक अध्ययन जैसे विषयों से प्रश्न पूछे गए थे। लेकिन जिस स्तर के ये प्रश्न थे, वह न केवल चपरासी के पद के लिए बल्कि किसी भी प्रशासनिक पद के लिए भी काफी कठिन माने जाते हैं। अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि उन्हें परीक्षा की तैयारी करते समय किसी को यह पता नहीं था कि इतने कठिन सवाल आने वाले हैं। इसलिए बहुत सारे युवा इस परीक्षा को लेकर निराश हैं।
विभिन्न शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों का भी यह मानना है कि होमगार्ड की परीक्षा के सवाल काफी चिंताजनक हैं। उन्होंने यह सवाल उठाया है कि क्या सरकार साधारण नौकरियों के लिए असाधारण योग्यता को लागू करना चाहती है। इस तरह की नीति केवल और केवल शहरी शिक्षित वर्ग को ही पद देगी जबकि गांव के पढ़े-लिखे लोगों को बाहर कर देगी।
कट-ऑफ मार्क्स और चयन की संभावना
नई दिल्ली से लेकर लखनऊ तक विभिन्न शिक्षा समूहों और परीक्षा तैयारी केंद्रों में अब बस एक ही बहस चल रही है कि होमगार्ड परीक्षा की कट-ऑफ क्या होगी। अभ्यर्थियों और विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस परीक्षा की कट-ऑफ आमतौर पर जितनी होती है, उससे कई गुना कम हो सकती है। क्योंकि यदि सामान्य कट-ऑफ यानी साठ से पसत्तर प्रतिशत को ही रखा जाता है, तो शायद ही कोई अभ्यर्थी पास हो पाएगा।
पिछली कई सरकारी परीक्षाओं में यह देखा गया है कि जब प्रश्नपत्र असाधारण कठिन होता है, तो कट-ऑफ भी बहुत कम रखी जाती है। कुछ मामलों में तो सरकार ने परीक्षा ही रद्द कर दी है और दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी है। लेकिन यूपी होमगार्ड के मामले में क्या होगा, यह तो समय ही बताएगा। फिलहाल तो सभी का ध्यान केवल इसी बात पर है कि कट-ऑफ कितनी होगी।
सरकारी नीति के अनुसार होमगार्ड के पद के लिए साधारण कक्षा में कट-ऑफ आमतौर पर तीस से चालीस प्रतिशत के बीच रहती है। लेकिन इस बार चूंकि प्रश्नपत्र इतना कठिन आया है, तो कई शिक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि कट-ऑफ पच्चीस प्रतिशत तक भी जा सकती है। कुछ लोगों का तो यह भी कहना है कि बीस प्रतिशत अंक ही पर्याप्त हो सकते हैं। लेकिन यह सब बातें अभी अनुमान हैं। असली कट-ऑफ तब पता चलेगी जब उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
अभ्यर्थियों की निराशा को देखते हुए यूपी पीएससी और सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वे इस परीक्षा को लेकर अपना रुख बदलें और भविष्य में ऐसे कठिन प्रश्न पूछने से बचें। साथ ही, यह भी जरूरी है कि परीक्षा का पाठ्यक्रम और प्रश्नपत्र का स्तर दोनों को पद की योग्यता के अनुरूप तय किया जाए। इससे सभी योग्य अभ्यर्थियों को न्यायसंगत मौका मिलेगा।




