वडोदरा छात्रा ने ट्रोलर्स पर बरसी, डांस विवाद में पक्ष रखा
वडोदरा की MS यूनिवर्सिटी में हुए 'संस्कार संगम' कार्यक्रम में एक छात्रा ने डांस किया था। इस डांस वीडियो के बाद से ही सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा हो गया था। लोगों की ओर से तरह-तरह की टिप्पणियां और आलोचनाएं शुरू हो गई थीं। लेकिन अब उस छात्रा ने खुद आगे आकर अपना पक्ष रखा है। उसने एक वीडियो जारी किया है जिसमें उसने न सिर्फ अपनी ट्रोलिंग के बारे में विस्तार से बताया है, बल्कि उन लोगों को भी जवाब दिया है जिन्होंने उसे अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए 'सॉफ्ट टारगेट' बनाया।
डांस विवाद से शुरू हुई परेशानियां
जब से यह वीडियो वायरल हुआ था तब से इस छात्रा को कई तरह की नकारात्मक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। लोगों ने उसके डांस को लेकर तरह-तरह की बातें कहीं। कुछ लोग तो धर्म और संस्कृति का नाम लेकर उसे निशाना बनाने लगे। इस कार्यक्रम को लेकर भी काफी विवाद खड़ा हुआ। कुछ लोगों को यह कार्यक्रम ही पसंद नहीं आया और उन्होंने इसे संस्कृति के विरुद्ध बताया। लेकिन वास्तव में, यह तो बस एक सामान्य विश्वविद्यालय का सांस्कृतिक कार्यक्रम था जहां छात्र-छात्राएं अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करते हैं।
इस छात्रा को जो ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा, वह सोशल मीडिया पर बेहद गंभीर थी। कुछ लोगों ने तो धमकियां भी दी थीं। उसके खिलाफ तरह-तरह की अफवाहें फैलाई गई थीं। उसके परिवार को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। लेकिन इस छात्रा ने हार न मानते हुए अपना पक्ष रखने का फैसला किया।
छात्रा का मजबूत पक्ष और जवाबी कार्रवाई
अपने वीडियो में इस छात्रा ने बहुत साहस दिखाया है। उसने साफ कहा कि उसे 'मिर्च-मसाला' के लिए टारगेट किया गया। उसके मुताबिक, कुछ लोग सिर्फ अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए उसे निशाना बना रहे थे। वह जानती है कि यह विवाद असली नहीं था। असली मकसद कुछ और ही था। उसने कहा कि वह अपने अधिकार के लिए खड़ी है और किसी के दबाव में नहीं आएगी।
छात्रा ने अपने वीडियो में यह भी स्पष्ट किया कि संस्कार संगम कार्यक्रम विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित एक वैध और सांस्कृतिक कार्यक्रम था। वह एक छात्र के रूप में अपना कर्तव्य निभा रही थी। उसका डांस किसी को नुकसान नहीं पहुंचा रहा था। बल्कि यह तो बस कला और संस्कृति की अभिव्यक्ति थी। लेकिन कुछ लोगों ने इसे अपने हित के लिए किसी और रूप में प्रस्तुत कर दिया।
उसने इस बात पर भी जोर दिया कि वह अपनी पढ़ाई के साथ-साथ कला और संस्कृति में भी रुचि रखती है। यह कोई गलत बात नहीं है। हजारों छात्र-छात्राएं ऐसा ही करते हैं। लेकिन जब किसी विशेष घटना को राजनीतिक रंग दे दिया जाता है, तो सब कुछ गलत लगने लगता है। यही समस्या है।
समाज में बदलाव की जरूरत
इस पूरे विवाद से एक महत्वपूर्ण सवाल उठता है कि क्या हम अपनी महिलाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने की आजादी देते हैं? क्या हम सच में उन्हें सम्मान देते हैं? या फिर हम सिर्फ मौके की तलाश रहते हैं उन्हें निशाना बनाने के लिए?
इस छात्रा ने जो साहस दिखाया है, वह सराहनीय है। उसने अपना पक्ष रखा है और ट्रोलर्स को आईना दिखाया है। वह जानती है कि समाज में कुछ लोग हमेशा कुछ न कुछ नकारात्मक कहेंगे। लेकिन आप अपने काम को सही जानते हैं, तो उसमें आत्मविश्वास रखना चाहिए।
राजनीतिक लोगों ने भी इस विवाद को अपने लिए इस्तेमाल किया। कुछ राजनेताओं ने इस घटना को अपने एजेंडे के लिए उपयोग किया। लेकिन इस बीच, यह छात्रा ही सबसे बड़ा पीड़ित रही। उसे अकारण ही परेशानी का सामना करना पड़ा। इसलिए, हमें समझना चाहिए कि किसी को राजनीतिक खेल के लिए पैदल सिपाही बनाना गलत है।
यह घटना हमें सिखाती है कि हमें अपनी महिलाओं के साथ सम्मान से व्यवहार करना चाहिए। उन्हें अपनी पसंद अनुसार काम करने की आजादी देनी चाहिए। बस इसी में ही सच्चा संस्कार है, न कि किसी को निशाना बनाने में। इस छात्रा को उसके साहस के लिए सलाम है कि उसने अपने खिलाफ हो रहे सभी आरोपों का जवाब दिया है और अपना पक्ष मजबूती से रखा है।




