वैभव सूर्यवंशी को इंटरनेशनल मौका क्यों नहीं
भारतीय क्रिकेट की दुनिया में आजकल एक नाम बार-बार चर्चा में आ रहा है। यह नाम है वैभव सूर्यवंशी का। 'बेबी बॉस' के नाम से मशहूर यह युवा खिलाड़ी पिछले कुछ सालों में अपने शानदार प्रदर्शन से सभी को प्रभावित कर चुका है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उसका डेब्यू अभी तक नहीं हो पाया है। इसी बात को लेकर क्रिकेट जगत में काफी चर्चा हो रही है।
वैभव सूर्यवंशी के नाम पर एक रिकॉर्ड भी दर्ज है। वह आईपीएल इतिहास के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने हैं जिन्होंने इस लीग में खेला। मुंबई इंडियंस की ओर से खेलते हुए इस युवा ने अपनी शानदार बल्लेबाजी से सभी को मुग्ध कर दिया। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी और समझदारी देखकर ऐसा लगता है कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य उज्ज्वल है।
हालांकि, भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान और प्रबंधन को लगता है कि वैभव अभी बहुत कम उम्र में हैं। उन्हें लगता है कि उन्हें अभी और घरेलू क्रिकेट खेलना चाहिए ताकि वह अपने कौशल को और निखार सकें। लेकिन सवाल यह है कि जब टीम के शीर्ष क्रम के बल्लेबाज संघर्ष कर रहे हों, तो एक इनफॉर्म खिलाड़ी को क्यों नहीं मौका दिया जाए?
आयरलैंड सीरीज में मिसा हुआ अवसर
भारत और आयरलैंड के बीच खेली गई हाल की सीरीज में भारतीय टीम के शीर्ष क्रम को निराशाजनक प्रदर्शन करते देखा गया। कई मौकों पर ऐसा लगा कि जब बल्लेबाजों को नई सोच की जरूरत है, तब भी प्रबंधन पुराने चेहरों पर ही भरोसा कर रहा है। ऐसे समय में जब वैभव जैसे युवा खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन कर रहे हों, तो उन्हें मौका न देना समझ से परे है।
वैभव सूर्यवंशी ने घरेलू क्रिकेट में जो शतकों की बारिश की है, वह किसी से छिपी नहीं है। उनकी बल्लेबाजी में एक अलग ही आत्मविश्वास दिखाई देता है। वह सिर्फ रन बनाते नहीं हैं, बल्कि अपनी स्टाइल से मैच का चेहरा भी बदल देते हैं। ऐसे खिलाड़ी को टीम में जगह नहीं देना, मुझे व्यक्तिगत रूप से गलत लगता है।
इंग्लैंड दौरे पर संभावनाएं
इंग्लैंड का दौरा भारतीय बल्लेबाजों के लिए हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। इंग्लैंड की पिच पर स्विंगिंग गेंद से निपटना हर किसी के बस की बात नहीं है। ऐसे में अगर भारतीय प्रबंधन वैभव को इस दौरे पर मौका दे, तो यह उनके लिए एक बेहतरीन सीख का अवसर साबित हो सकता है। युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सीखने का सुযोग देना जरूरी है।
इंग्लैंड की पिचें तकनीकी रूप से कठिन जरूर होती हैं, लेकिन ऐसी ही परिस्थितियों में खिलाड़ी बड़े खिलाड़ी बनते हैं। सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और विराट कोहली जैसे महान खिलाड़ियों ने इंग्लैंड में ही अपने कौशल को निखारा। वैभव को भी ऐसा ही मौका दिया जाना चाहिए। हो सकता है कि इंग्लैंड दौरे पर ही उसका सेलेक्शन हो जाए।
विश्व चैंपियन कप्तान भी नहीं बचे, फिर वैभव को ही क्यों न मौका दें
एक बात और जो बेहद महत्वपूर्ण है, वह यह कि भारतीय क्रिकेट टीम का विश्व चैंपियन कप्तान भी सीमित ओवरों के क्रिकेट में सीमित हो गया है। ऐसे समय में जब बुजुर्ग खिलाड़ियों की जगह नई प्रतिभा को मौका देने की बात की जा रही है, तो वैभव जैसे तरुण प्रतिभा को क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है? भारतीय क्रिकेट को आगे बढ़ाने के लिए नई पीढ़ी को जिम्मेदारी देनी चाहिए।
क्रिकेट में बदलाव समय के साथ आता है। जब पुरानी पीढ़ी अपनी सीमा दिखाने लगे, तो नई पीढ़ी को तैयार करने का समय आ गया होता है। वैभव इसी नई पीढ़ी का हिस्सा हैं जो भारतीय क्रिकेट को एक नई दिशा दे सकते हैं। उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर खेलने का अवसर जल्दी से जल्दी दिया जाना चाहिए।
अंत में, यही कहना है कि वैभव सूर्यवंशी का इंतजार लंबे दिनों तक नहीं चलना चाहिए। उनकी प्रतिभा स्पष्ट है, उनका फॉर्म शानदार है, तो फिर क्यों न उन्हें भारतीय टीम में जगह दी जाए। क्रिकेट में सफलता के लिए सही समय पर सही निर्णय लेना जरूरी है। आशा है कि भारतीय क्रिकेट प्रबंधन जल्द ही इस बात को समझ जाएगा।




