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Saturday, 06 June 2026
व्यापार

पश्चिम एशिया संकट: डोभाल ने कहा भारत शांति के लिए तैयार

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Komal
संवाददाता
📅 29 May 2026, 5:47 AM ⏱ 1 मिनट 👁 415 views
पश्चिम एशिया संकट: डोभाल ने कहा भारत शांति के लिए तैयार
📷 aarpaarkhabar.com

मॉस्को में आयोजित किए गए अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के प्रति गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में चल रहे तनाव ने वैश्विक व्यापार को गंभीर रूप से प्रभावित किया है और यदि यह स्थिति बनी रहे तो दुनिया की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा। डोभाल ने जोर देकर कहा कि भारत इस परिस्थिति को सुलझाने और शांति स्थापित करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

भारतीय नेतृत्व ने विभिन्न पक्षों के बीच तनाव कम करने के लिए एक सकारात्मक भूमिका निभाने की बात कही है। डोभाल ने इस बात पर जोर दिया कि पश्चिम एशिया की स्थिरता न केवल उस क्षेत्र के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत एक जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में इस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के लिए काम करने में विश्वास करता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक व्यापार की जीवन रेखा

एनएसए डोभाल ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापार के प्रवाह को निर्बाध रखने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। यह जलडमरूमध्य विश्व के तेल व्यापार का लगभग 21 प्रतिशत हिस्सा से गुजरता है। जब इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो न केवल तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं, बल्कि समुद्री व्यापार भी प्रभावित होता है। डोभाल ने कहा कि किसी भी सैन्य कार्रवाई या राजनीतिक तनाव के कारण इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को बाधित होने नहीं देना चाहिए।

लाल सागर भी पश्चिम एशिया में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। पिछले कुछ सालों में इस क्षेत्र में सुरक्षा के मुद्दे उठ खड़े हुए हैं, जिससे जहाजों को लंबे रास्ते से जाना पड़ रहा है। इससे व्यापार की लागत में भारी वृद्धि हुई है। भारत ने इन दोनों महत्वपूर्ण जलमार्गों में व्यापार की निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित करने की मांग की है।

संयुक्त राष्ट्र ढांचे में सुधार की जरूरत

डोभाल ने मॉस्को में एक महत्वपूर्ण बात कही कि वर्तमान समय में संयुक्त राष्ट्र के 1945 के पुराने ढांचे में तत्काल सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह संस्था अब आधुनिक दुनिया की चुनौतियों का सामना करने के लिए पूर्ण रूप से सक्षम नहीं है। संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद की संरचना में बदलाव की आवश्यकता है, जिससे कि यह समकालीन विश्व राजनीति को बेहतर तरीके से प्रतिनिधित्व कर सके।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी संयुक्त राष्ट्र के सुधार की बात पहले से करते आ रहे हैं। भारत का मानना है कि विकासशील देशों को संयुक्त राष्ट्र के फैसले लेने की प्रक्रिया में अधिक भूमिका दी जानी चाहिए। डोभाल ने कहा कि जब तक संयुक्त राष्ट्र में वास्तविक सुधार नहीं होता, तब तक वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए काम करना मुश्किल होगा। उन्होंने विश्व के सभी देशों से इस बात पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।

भारत की शांति-सुलह की भूमिका

भारत का दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत ने अपनी परिपक्व विदेश नीति के माध्यम से कई अंतर्राष्ट्रीय विवादों में मध्यस्थता की है। पश्चिम एशिया में भी भारत के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। डोभाल ने कहा कि भारत इस क्षेत्र के सभी देशों के साथ अच्छे संबंध रखता है और किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं करता। भारत का दृष्टिकोण सदैव संवाद और शांतिपूर्ण समाधान पर आधारित है।

एनएसए ने जोर दिया कि पश्चिम एशिया में सैन्य विवाद से किसी को लाभ नहीं होगा। बल्कि इससे पूरे क्षेत्र को नुकसान पहुंचेगा। भारत विश्वास करता है कि राजनीतिक और कूटनीतिक उपायों के माध्यम से ही इस समस्या का समाधान संभव है। डोभाल ने कहा कि भारत सभी पक्षों से संवाद बढ़ाने और आपसी समझदारी के लिए काम करने का आग्रह करता है।

मॉस्को सुरक्षा सम्मेलन में डोभाल की यह बयानबाजी भारत की जिम्मेदारी पूर्ण विदेश नीति को दर्शाती है। भारत न केवल अपने हितों की रक्षा करता है, बल्कि वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए भी काम करता है। पश्चिम एशिया में भारत की भूमिका निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है और आने वाले दिनों में भारत की शांति-सुलह की कोशिशें और महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।