दक्षिण 24 परगना: अभिषेक बनाम शाह की साख की लड़ाई
दक्षिण 24 परगना में तृणमूल का साम्राज्य
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की 31 विधानसभा सीटों में से 30 पर तृणमूल कांग्रेस का मजबूत कब्जा है। यह आंकड़ा अपने आप में ही किसी पार्टी की जमीनी ताकत का प्रमाण है। ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने इस क्षेत्र को अपना गढ़ बना लिया है। यहां की जनता ने कई दशकों से तृणमूल पार्टी पर विश्वास जताया है और इसी कारण दक्षिण 24 परगना को पार्टी का किला कहा जाता है।
इस इलाके की राजनीति में तृणमूल के आंतरिक संरचना को समझना बेहद जरूरी है। ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने यहां एक इस्पाती तंत्र खड़ा किया है। वे यहां के सर्वेसर्वा हैं और हर निर्णय में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अभिषेक की टीम जमीनी स्तर पर इतनी मजबूत है कि यहां के लोग उन्हें अपना नेता मानते हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर जनता तक, सभी के दिलों में अभिषेक बनर्जी की एक छवि है।
ग्राउंड पर जाकर बात करने से पता चलता है कि तृणमूल की जड़ें यहां कितनी गहरी हैं। हर मोहल्ले, हर गांव में तृणमूल के कार्यकर्ता सक्रिय रहते हैं। स्थानीय समस्याओं को लेकर पार्टी का तंत्र लगातार काम कर रहा है। सड़क की मरम्मत से लेकर सामाजिक कल्याण तक, तृणमूल की उपस्थिति हर जगह दिखती है। यह कारण है कि दक्षिण 24 परगना में तृणमूल का आधार बेहद मजबूत है।
भाजपा की महत्वाकांक्षा और अमित शाह की रणनीति
भारतीय जनता पार्टी के लिए पश्चिम बंगाल हमेशा से एक चुनौतीपूर्ण राज्य रहा है। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद भाजपा की रणनीति में बदलाव आया। गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल को अपना प्रमुख एजेंडा बना लिया। उनकी नीति पूरे प्रदेश में सीटें जीतने की नहीं बल्कि एक मजबूत राजनीतिक उपस्थिति दर्ज करने की है।
दक्षिण 24 परगना में भाजपा की रणनीति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। अमित शाह की नीति यहां दो स्तरों पर काम कर रही है। पहला, वे यहां अपने पार्टी का खाता खोलना चाहते हैं। दूसरा, उन्होंने एक दीर्घकालीन योजना बनाई है जिससे भाजपा को दहाई का आंकड़ा छूना है। यह लक्ष्य शायद तुरंत हासिल न हो, लेकिन भाजपा के नेतृत्व की दृष्टि स्पष्ट है।
भाजपा की टीम दक्षिण 24 परगना में तेजी से काम कर रही है। पार्टी के कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों से संपर्क स्थापित कर रहे हैं। भाजपा का संगठनात्मक ढांचा यहां पिछले कुछ सालों में काफी मजबूत हुआ है। पार्टी के पास युवा नेतृत्व है और वह जमीनी राजनीति में निवेश कर रही है। भाजपा के आंतरिक सर्वेक्षणों में भी यहां की जनता में उसके प्रति सकारात्मक भाव दिख रहा है।
साख की लड़ाई: असली मुकाबला
दक्षिण 24 परगना में जो लड़ाई चल रही है, वह असल में सीटों की नहीं बल्कि साख की है। तृणमूल की तरफ से दावा है कि वह जनता के लिए विकास लाया है। सड़कें बनाई हैं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया है। अभिषेक बनर्जी नियमित रूप से जनता से जुड़ाव रखते हैं और स्थानीय समस्याओं का समाधान करते हैं।
भाजपा की तरफ से कहा जा रहा है कि वह राष्ट्रीय विकास का एजेंडा लेकर आया है। भाजपा का तर्क है कि पश्चिम बंगाल में जातिगत राजनीति को खत्म करके विकास केंद्रित नीतियों को अपनाया जाना चाहिए। भाजपा की टीम केंद्रीय योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचाने पर जोर दे रही है।
लेकिन जब जनता से बात की जाती है तो साफ दिखता है कि दक्षिण 24 परगना में तृणमूल का आधार अभी भी मजबूत है। स्थानीय नेतृत्व, पार्टी कार्यकर्ताओं का नेटवर्क और जनता के साथ सीधा संपर्क तृणमूल की ताकत है। दूसरी तरफ भाजपा एक राष्ट्रीय पार्टी की भूमिका में है जो पूरे बंगाल में अपनी उपस्थिति दर्ज करना चाहती है।
अभिषेक बनर्जी का इस्पाती तंत्र और अमित शाह की रणनीति दोनों ही अपने-अपने तरीके से सक्रिय हैं। अगले विधानसभा चुनावों में दक्षिण 24 परगना किस तरफ झुकेगा, यह देखना बाकी है। लेकिन यह निश्चित है कि यह लड़ाई बेहद रोचक होने वाली है। तृणमूल की स्थानीय मजबूती बनाम भाजपा की राष्ट्रीय रणनीति का मुकाबला, यही दक्षिण 24 परगना की असली कहानी है।
वर्तमान में तृणमूल की स्थिति दक्षिण 24 परगना में अभी भी मजबूत है, लेकिन भाजपा की मेहनत और संगठन भी कम नहीं है। अगले चुनाव तक कितना कुछ बदल सकता है, यह राजनीति की अनिश्चितता को दर्शाता है। दक्षिण 24 परगना की जनता ही तय करेगी कि किसकी साख अधिक प्रमाणिक है और किसकी रणनीति अधिक प्रभावी।




