विश्व उच्च रक्तचाप दिवस: युवाओं की खराब सेहत
विश्व उच्च रक्तचाप दिवस: आधुनिक जीवन की बीमारी
विश्व उच्च रक्तचाप दिवस के अवसर पर एक गंभीर चेतावनी सामने आई है। डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल और एबीवीआईएमएस के संयुक्त अध्ययन में पता चला है कि आजकल के युवा स्क्रीन टाइम, तनाव और जंक फूड की वजह से अपनी मानसिक और शारीरिक सेहत गंवा रहे हैं। यह अध्ययन पूरे देश में बहुत चिंता का विषय बन गया है क्योंकि इसमें साफ दिख रहा है कि कैसे हमारे बच्चे और युवा रोग की चपेट में आ रहे हैं।
भारत में उच्च रक्तचाप की समस्या तेजी से बढ़ रही है और सबसे खतरनाक बात यह है कि यह अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। युवा लड़के और लड़कियां भी इसका शिकार हो रहे हैं। शहरों में तो यह समस्या महामारी का रूप ले चुकी है। डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में उच्च रक्तचाप से ग्रसित युवा मरीजों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।
स्क्रीन टाइम: डिजिटल दुनिया का जहर
स्क्रीन टाइम आजकल युवाओं की सबसे बड़ी समस्या बन गया है। स्मार्टफोन, लैपटॉप और टीवी के सामने घंटों बिताना इनका दैनिक जीवन बन गया है। अध्ययन में यह पाया गया कि जो युवा प्रतिदिन छह से आठ घंटे स्क्रीन के सामने रहते हैं, उन्हें उच्च रक्तचाप की समस्या होने की संभावना उन लोगों की तुलना में दो गुना ज्यादा है जो कम स्क्रीन टाइम करते हैं।
स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी हमारे मस्तिष्क को उत्तेजित रखती है और नींद के पैटर्न को बिगाड़ देती है। जब नींद सही न हो तो हार्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं, जिससे रक्तचाप बढ़ने लगता है। इसके अलावा, स्क्रीन के सामने बैठे रहने से शारीरिक गतिविधि भी कम हो जाती है, जो उच्च रक्तचाप का एक प्रमुख कारण है।
युवा लड़कियां सोशल मीडिया पर इतना समय लगाती हैं कि वे अपना व्यायाम, पढ़ाई और परिवार के साथ समय बिताना भूल जाती हैं। सोशल मीडिया पर नकारात्मक टिप्पणियां और तुलना की वजह से मानसिक तनाव भी बढ़ता है। यह सब मिलकर उच्च रक्तचाप का कारण बनता है।
डॉक्टरों ने सलाह दी है कि प्रतिदिन स्क्रीन का उपयोग सीमित करना चाहिए। बीस-बीस मिनट के अंतराल पर आंखों को आराम देना चाहिए और सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन से दूर रहना चाहिए।
तनाव और खराब खान-पान: दोनों का घातक मेल
आजकल का युवा वर्ग अभूतपूर्व तनाव से जूझ रहा है। पढ़ाई का दबाव, नौकरी की चिंता, सामाजिक दबाव और भविष्य की अनिश्चितता - ये सब मिलकर उनके मानसिक स्वास्थ्य को नष्ट कर रहे हैं। अध्ययन में पाया गया कि जो युवा अत्यधिक तनाव में रहते हैं, उनका रक्तचाप सामान्य लोगों से बीस प्रतिशत ज्यादा होता है।
तनाव के कारण शरीर में कोर्टिसोल नाम का हार्मोन बढ़ता है, जो रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ता है और रक्तचाप को बढ़ाता है। लंबे समय तक तनाव रहने से यह समस्या स्थायी हो सकती है।
जंक फूड भी इसमें बराबर की भागीदार है। आजकल के युवा पिज्जा, बर्गर, डोसा, मोमो और अन्य तैलीय खाना खूब खाते हैं। नमक, शक्करा और कृत्रिम रंगों से भरा यह खाना रक्तचाप बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। घर का पौष्टिक खाना खाने के बजाय बाहर की डिलीवरी वाली खाना खाना युवाओं की आदत बन गई है।
अस्पताल के डॉक्टरों ने सुझाव दिया है कि युवाओं को योग, ध्यान और व्यायाम करना चाहिए। कम से कम तीस मिनट का रोजाना व्यायाम रक्तचाप को नियंत्रित रखता है। घर का बना हुआ, कम नमक और कम तेल वाला खाना खाना चाहिए।
स्वास्थ्य सुधार के उपाय
इस अध्ययन के आधार पर विशेषज्ञों ने कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए हैं। सबसे पहले, प्रतिदिन कम से कम डेढ़ घंटा बाहर समय बिताना चाहिए। धूप में टहलना, खेल कूद करना या सिर्फ हरियाली के बीच बैठना भी बहुत फायदेमंद है।
दूसरा, पारिवारिक भोजन को वापस लाना चाहिए। परिवार के साथ बैठकर खाना खाने से न सिर्फ पोषण मिलता है, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव भी बढ़ता है, जो तनाव कम करता है।
तीसरा, स्वास्थ्य जांच को नियमित बनाना चाहिए। साल में कम से कम एक बार अपना रक्तचाप चेक करवाना चाहिए, खासकर जो लोग जोखिम में हैं।
चौथा, पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है। कम से कम आठ घंटे की नींद लेने से शरीर और मस्तिष्क दोनों को आराम मिलता है।
इस विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर हम सभी को अपने स्वास्थ्य के प्रति गंभीर होना चाहिए। युवा वर्ग को अपनी जीवनशैली में बदलाव लाना चाहिए और एक स्वस्थ भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।




