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Thursday, 05 November 2026
समाचार

यमन: हूती विद्रोहियों पर 753 हमले, 218 लड़ाके मारे गए

यमन सेना ने डॉन ऑफ यमन अभियान में 24 घंटे में 753 हमले किए। 218 हूती लड़ाके और कमांडर मारे गए, 78 सैन्य वाहन तबाह।

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Komal
संवाददाता
📅 26 October 2026, 7:16 AM ⏱ 1 मिनट 👁 599 views
यमन: हूती विद्रोहियों पर 753 हमले, 218 लड़ाके मारे गए
📷 aarpaarkhabar.com

यमन में सैन्य अभियानों का नया दौर शुरू हुआ है। यमन की सेना ने 'डॉन ऑफ यमन' नामक एक बड़े आक्रामक अभियान में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जबरदस्त कार्रवाई की है। सेना की ओर से जारी आधिकारिक विवरण के अनुसार, इस अभियान के तहत मात्र 24 घंटों में 753 हमले किए गए हैं। यह संख्या यमन में चल रहे संघर्ष की तीव्रता को दर्शाती है।

यमन की सेना के सैन्य प्रवक्ता ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस अभियान की विस्तृत जानकारी साझी है। उनके अनुसार, इन 753 हमलों में कुल 218 हूती लड़ाके और कमांडर मारे गए हैं। इसके अलावा, सेना ने दावा किया है कि अभियान के दौरान 78 सैन्य वाहन भी नष्ट कर दिए गए हैं। यह दावा हूती विद्रोहियों की सैन्य क्षमता को कमजोर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

डॉन ऑफ यमन अभियान की पृष्ठभूमि

यमन में हूती विद्रोहियों के साथ संघर्ष पिछले कई वर्षों से जारी है। यह विद्रोही संगठन यमन के उत्तरी इलाकों में काफी मजबूत है और विभिन्न सरकारी लक्ष्यों पर नियमित रूप से हमले करते रहे हैं। 'डॉन ऑफ यमन' अभियान इसी संदर्भ में शुरू किया गया है, जो हूती विद्रोहियों को दबाने के लिए एक व्यापक सैन्य कार्रवाई है।

यमन की सरकार और सेना इस अभियान को एक महत्वपूर्ण मोड़ मान रही है। यह पहली बार नहीं है कि यमन की सेना ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया है, लेकिन 'डॉन ऑफ यमन' अभियान अपनी तीव्रता और व्यापकता के लिए खास माना जा रहा है। सेना की ओर से किए गए दावे अगर सच साबित होते हैं, तो यह विद्रोही संगठन के लिए एक बड़ा झटका होगा।

हूती विद्रोहियों पर प्रभाव

इस अभियान के तहत किए गए हमलों का हूती विद्रोहियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखना बाकी है। यमन की सेना का दावा है कि 218 लड़ाके और कमांडर मारे गए हैं, जिसका मतलब है कि विद्रोहियों की कमान शृंखला में गड़बड़ाहट आ सकती है। कमांडरों की मृत्यु विद्रोही संगठन के संचालन में बाधा डाल सकती है और उनकी कार्यक्षमता को कमजोर कर सकती है।

78 सैन्य वाहनों के नष्ट होने का मतलब यह है कि हूती विद्रोहियों की गतिशीलता प्रभावित हो सकती है। सैन्य वाहन किसी भी विद्रोही संगठन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। ये न केवल हथियार और सैनिकों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाते हैं, बल्कि सैन्य क्षमता का एक महत्वपूर्ण संकेतक भी होते हैं। इतनी बड़ी संख्या में वाहनों का नष्ट होना विद्रोहियों के लिए निश्चित रूप से एक बड़ा नुकसान है।

अंतर्राष्ट्रीय पहलू

यमन में चल रहे संघर्ष के अंतर्राष्ट्रीय आयाम भी हैं। यमन की सेना को सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन की सहायता मिलती रही है। हूती विद्रोहियों पर भी ईरान का प्रभाव माना जाता है। इस संदर्भ में, 'डॉन ऑफ यमन' अभियान केवल एक स्थानीय सैन्य अभियान नहीं है, बल्कि यह मध्य पूर्वी भू-राजनीति का एक हिस्सा है।

यमन में शांति और स्थिरता स्थापित करने के प्रयास पिछले कई वर्षों से चल रहे हैं, लेकिन सफलता सीमित ही रही है। यह नया सैन्य अभियान यमन की सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, यह भी संभव है कि इस तरह के सैन्य अभियान से यमन की स्थिति और भी जटिल हो सकती है।

यमन में हूती विद्रोहियों के साथ संघर्ष देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। लाखों लोग विस्थापित हो गए हैं, और मानवीय संकट की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। इसी संदर्भ में, यमन की सरकार और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में भी काम करना चाहिए।

'डॉन ऑफ यमन' अभियान निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण सैन्य कदम है, लेकिन इसकी सफलता केवल हूती विद्रोहियों को कमजोर करने में ही नहीं, बल्कि यमन में स्थायी शांति और विकास को सुनिश्चित करने में निहित है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह अभियान यमन की राजनीति और सुरक्षा परिस्थिति को कैसे प्रभावित करता है।