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Monday, 06 July 2026
राजनीति

योगी मंत्रिमंडल विस्तार में विभागों की खींचतान

author
Komal
संवाददाता
📅 16 May 2026, 7:16 AM ⏱ 1 मिनट 👁 790 views
योगी मंत्रिमंडल विस्तार में विभागों की खींचतान
📷 aarpaarkhabar.com

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के तीसरे मंत्रिमंडल विस्तार को एक हफ्ता बीत गया है, लेकिन विभागों का बंटवारा अभी भी अधूरा रह गया है। नए मंत्रियों को आज भी अपने पोर्टफोलियो की प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। यह स्थिति न केवल नए मंत्रियों के लिए शर्मनाक है, बल्कि सरकार की कार्यक्षमता पर भी सवाल उठाती है। दिल्ली के भाजपा केंद्रीय नेतृत्व और लखनऊ के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच विभागों के वितरण को लेकर काफी तनातनी देखने को मिल रही है।

इस देरी के पीछे मुख्य विवाद सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD), नगर विकास विभाग और डिप्टी मुख्यमंत्री के पद के पोर्टफोलियो को लेकर है। ये तीनों ही महत्वपूर्ण विभाग हैं जिनका राजनीतिक महत्व काफी अधिक है। दिल्ली में केंद्रीय भाजपा के नेता और लखनऊ के मुख्यमंत्री के बीच इन पोर्टफोलियोज के बारे में गहरा मतभेद है। केंद्र के नेता कुछ विशेष मंत्रियों को ये जिम्मेदारियां देना चाहते हैं, जबकि योगी आदित्यनाथ का अपना दृष्टिकोण है।

एक हफ्ते की इस अवधि में मंत्रालयों के कार्यालयों में एक अजीब सी शांति देखने को मिल रही है। खाली कुर्सियां, उदास चेहरे वाले अधिकारी और अधूरे काम की पूरी तस्वीर है। कुछ मंत्रियों को अपने विभागों के मंत्रालय में जाने का भी अवसर नहीं मिला है। विभागीय सचिव और अन्य अधिकारी भी दिशाहीन महसूस कर रहे हैं क्योंकि उन्हें पता ही नहीं कि अगला निर्देश किस तरफ से आएगा।

नई नियुक्तियों के बाद की अराजकता

मंत्रिमंडल विस्तार के समय सभी को खुशियों की बातें सुनाई गईं थीं। नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई, बधाइयां दी गईं, लेकिन जैसे ही विभाग बांटने का समय आया, सब कुछ अस्त-व्यस्त हो गया। यह केवल विभागों का बंटवारा नहीं है, बल्कि राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की खींचतान है।

उत्तर प्रदेश सरकार के आंतरिक सूत्रों के अनुसार, कई मंत्री अपने-अपने विभागों में बैठे हुए हैं, लेकिन उन्हें औपचारिक अधिसूचना नहीं मिली है। कुछ मंत्री तो ऊंघते हुए भी देखे गए हैं क्योंकि उन्हें कोई काम ही नहीं दिया गया है। यह स्थिति केवल शर्मनाक नहीं है, बल्कि प्रशासनिक अव्यवस्था का सबूत भी है।

जब तक विभाग का औपचारिक बंटवारा नहीं हो जाता, तब तक कोई मंत्री अपनी पूरी जिम्मेदारी नहीं निभा सकता। विभाग बांटे जाने के बिना मंत्रियों का मनोबल नहीं रहता। वे यह जान ही नहीं पाते कि उन्हें किस क्षेत्र में काम करना है, किस बजट के साथ काम करना है, और किन विभागीय कर्मचारियों के साथ काम करना है।

दिल्ली-लखनऊ खींचतान का राजनीतिक पहलू

यह पूरा विवाद दिल्ली के केंद्रीय भाजपा नेतृत्व और लखनऊ के मुख्यमंत्री के बीच की सत्ता संघर्ष का एक सूक्ष्म पहलू है। दिल्ली के नेता अपने पसंद के लोगों को महत्वपूर्ण विभाग देना चाहते हैं, जबकि योगी अपनी रणनीति के अनुसार विभाग बांटना चाहते हैं।

PWD विभाग तो बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके माध्यम से विकास परियोजनाओं को लागू किया जाता है। इसी तरह, नगर विकास विभाग भी राजस्व और शहरी विकास से जुड़ा है। डिप्टी सीएम का पद तो राजनीतिक महत्ता का प्रतीक ही है। इन तीनों ही विभागों की वजह से दोनों पक्षों के बीच खींचतान जारी है।

दिल्ली के शीर्ष भाजपा नेताओं को लगता है कि ये विभाग किसी खास व्यक्ति को दिए जाने चाहिए, जो केंद्र की नीतियों को अच्छी तरह से लागू कर सके। दूसरी ओर, योगी आदित्यनाथ अपने विश्वस्त लोगों को ये विभाग देना चाहते हैं, ताकि वह अपनी शासन व्यवस्था को मजबूत रख सकें।

प्रशासनिक और राजनीतिक परिणाम

इस विभाग बंटवारे में होने वाली देरी के कई नकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। सबसे पहली समस्या यह है कि विभागों के काम में बाधा आ रही है। कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं अधर में लटक गई हैं क्योंकि किसी को स्पष्ट रूप से जिम्मेदारी नहीं दी गई है।

दूसरी समस्या यह है कि इस तरह की राजनीतिक खींचतान से सरकार की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। जनता को लगता है कि सरकार अपने आंतरिक मतभेदों में इतनी उलझी है कि वह जनकल्याण के बारे में सोच ही नहीं रही है।

तीसरी समस्या यह है कि नए मंत्रियों का मनोबल गिर रहा है। उन्हें लगता है कि उनकी नियुक्ति केवल औपचारिकता थी, और वास्तविक शक्ति किसी और के पास है। यह स्थिति दीर्घकाल में सरकार की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है।

अभी भी स्पष्ट नहीं है कि दिल्ली और लखनऊ के बीच कब समझौता होगा और विभाग का अंतिम बंटवारा कब तय होगा। लेकिन यह जरूर है कि इस देरी के कारण उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक मजबूत और दक्ष सरकार के लिए आवश्यक है कि विभागों का बंटवारा जल्द से जल्द हो और सभी मंत्री अपनी पूरी क्षमता से काम करने लगें।