ईरान के नेता ने बताया ट्रंप कहां फेल हुए
भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिका-इस्राइल के साथ हुए युद्धविराम समझौते पर विस्तार से बात की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका को शुरुआत में ही लगा था कि वह सिर्फ तीन दिन में इस युद्ध को जीत लेगा। लेकिन ईरान की मजबूत सैन्य रणनीति और जन समर्थन के कारण ट्रंप की यह योजना पूरी तरह नाकाम हो गई।
इलाही ने बताया कि यह युद्ध ईरान पर बिल्कुल अप्रत्याशित रूप से थोपा गया था। जब इस्राइली सेना ने ईरानी क्षेत्र पर हमला किया, तो ईरान ने न केवल अपने आप को बचाया, बल्कि एक प्रभावी जवाबी कार्रवाई भी की। उन्होंने कहा कि ईरान की सेना और इस्लामिक गार्ड्स फोर्स ने अत्यधिक परिपक्वता और सामरिक कुशलता का प्रदर्शन किया। ईरानी सेना की तैयारी, संगठन और दृढ़ संकल्प ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को हतप्रभ कर दिया।
डॉ. अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने स्पष्ट किया कि ईरान कभी भी किसी अन्य देश के साथ विवाद चाहता नहीं है। लेकिन जब किसी ने उस पर हमला किया, तो ईरान को अपने अधिकार की रक्षा करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि ईरान की जनता हर समय अपनी सरकार और सेना के पीछे खड़ी है। यह जनसमर्थन ही ईरान की सबसे बड़ी शक्ति है। किसी भी बाहरी ताकत को यह समझ में आ गया है कि ईरान को दबाया नहीं जा सकता।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की कड़ी मुद्रा
डॉ. इलाही ने होर्मुज जलडमरूमध्य के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि विश्व के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से गुजरता है। ईरान इस रणनीतिक स्थान पर अपना अधिकार कायम रखता है। किसी भी देश के साथ यदि विवाद होता है, तो ईरान के पास इसे नियंत्रित करने की सामर्थ्य है। उन्होंने कहा कि ईरान इस रणनीतिक संसाधन का उपयोग विश्वासपूर्वक और जिम्मेदारी से करता है।
हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि किसी ने ईरान के अधिकारों को नजरअंदाज करने का प्रयास किया, तो ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सील करने में सक्षम है। इससे विश्व अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान हो सकता है। उन्होंने इसे एक स्पष्ट संकेत दिया कि ईरान की क्षमता को कम नहीं आंका जाए।
लेबनान में युद्धविराम पर इस्राइली सरकार की असंगति
डॉ. अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के उस बयान की कड़ी आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह लेबनान में युद्धविराम को लागू नहीं करेंगे। इलाही के अनुसार यह अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा अनुमोदित युद्धविराम समझौता सभी पक्षों के लिए बाध्यकारी है।
उन्होंने कहा कि नेतन्याहू की सरकार हर बार अंतरराष्ट्रीय कानून को तोड़ती है। इस्राइल लेबनान में निर्दोष नागरिकों को मार रहा है। हजारों बेगुनाह लोग मारे जा चुके हैं। बच्चों और महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है। यह सब कुछ अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध है। इलाही ने कहा कि दुनिया को इस पर सख्त नजरिया अपनाना चाहिए।
इस्राइली प्रधानमंत्री का यह रवैया दिखाता है कि वह युद्धविराम समझौते को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। वह लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखना चाहते हैं। इलाही के मुताबिक यह तरीका पूरे क्षेत्र में और अस्थिरता पैदा करेगा। क्षेत्रीय शांति के लिए सभी देशों को संधि का सम्मान करना चाहिए।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर ईरान की प्रतिबद्धता
डॉ. अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण के प्रति ईरान की मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि ईरान में भारतीय नागरिकों की एक बड़ी आबादी रहती है। ये लोग ईरान में व्यापार, अध्ययन और रोजगार के लिए हैं। ईरान सरकार इन सभी को पूरी सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
युद्ध के दौरान भी ईरान ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी भारतीय नागरिक किसी नुकसान का शिकार न हो। विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। इलाही ने कहा कि भारत और ईरान के बीच मजबूत ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध हैं। भारत भी ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण देश है। दोनों देश सहयोग और परस्पर सम्मान के आधार पर अपने संबंध आगे बढ़ाना चाहते हैं।
इलाही ने भारतीय सरकार की ईरान के साथ संतुलित विदेश नीति की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत का रुख क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के प्रति सकारात्मक रहा है। इसी नीति के कारण भारत के नागरिकों को ईरान में सुरक्षित माहौल मिला। भविष्य में भी दोनों देशों के बीच सहयोग और मैत्रीपूर्ण संबंध बने रहेंगे।
अंत में, डॉ. अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने कहा कि यह युद्ध ईरान को और मजबूत बना गया है। ईरान की जनता और सेना के साहस ने दुनिया को संदेश दे दिया है कि ईरान किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। आने वाले समय में ईरान क्षेत्रीय शांति और विकास के लिए अपनी भूमिका को और मजबूत करेगा। भारत इस मिशन में ईरान का साथी बन सकता है।




