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Wednesday, 19 August 2026
विश्व

ईरान-ओमान समझौता: ट्रंप की धमकी क्यों?

पश्चिम एशिया में ईरान और ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य पर समझौते की बातचीत चल रही है। अमेरिका ने बमबारी की धमकी दी है। जानिए ट्रंप क्यों भड़के।

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Komal
संवाददाता
📅 19 August 2026, 7:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 905 views
ईरान-ओमान समझौता: ट्रंप की धमकी क्यों?
📷 aarpaarkhabar.com

पश्चिम एशिया में तनाव का नया अध्याय लिखा जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच का विवाद अब ओमान को भी अपनी चपेट में ले रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान के बीच चल रही बातचीत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को बेहद नाराज कर गई है। ट्रंप ने खुले तौर पर बमबारी की धमकी तक दे दी है। यह पूरे क्षेत्र में एक विस्फोटक स्थिति बनाने की ओर इशारा कर रहा है।

वैश्विक व्यापार और तेल की आपूर्ति के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि विश्व का लगभग 30 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए जब भी इस जलडमरूमध्य पर कोई घटनाक्रम होता है, तो वह वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों को प्रभावित करता है।

ईरान और ओमान के बीच क्या समझौता हो रहा है?

होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए ईरान और ओमान बातचीत कर रहे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत दोनों देश अपने-अपने नियंत्रण वाले समुद्री रास्तों से जहाजों की आवाजाही को संभाल सकते हैं। यह समझौता मूलतः होर्मुज जलडमरूमध्य में शांति और व्यवस्था स्थापित करने के लिए किया जा रहा है।

ईरान इस रास्ते पर अपनी सुरक्षा और अधिकार बनाए रखना चाहता है। दूसरी ओर, ओमान एक तटस्थ मध्यस्थ की भूमिका निभाना चाहता है। ओमान ऐतिहासिक रूप से इस क्षेत्र में एक सुलह-समझौते वाली नीति अपनाता आया है। इसी नीति के कारण ओमान को अरब की खाड़ी में एक सम्मानजनक स्थिति प्राप्त है।

इस समझौते का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सुचारु रूप से चलता रहे। साथ ही, किसी भी देश की नौसेना को अनावश्यक रूप से जलडमरूमध्य में सैन्य कार्रवाई करने से रोका जा सके। यह एक तरह की सशर्त व्यवस्था है, जहां दोनों देश एक-दूसरे की चिंताओं को ध्यान में रखते हैं।

ट्रंप को यह समझौता क्यों नापसंद है?

डोनल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली अमेरिकी सरकार इस समझौते से असंतुष्ट है। अमेरिका को चिंता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ मजबूत हो जाएगी। अमेरिका अपने सहयोगी देशों, खासकर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से तेल निर्यात करने में किसी भी तरह की बाधा नहीं चाहता।

ट्रंप को यह भी संदेह है कि यह समझौता ईरान को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने का रास्ता दे सकता है। अमेरिका की नीति यह है कि ईरान को ज्यादा से ज्यादा आर्थिक दबाव में रखा जाए। लेकिन अगर ईरान और ओमान के बीच यह समझौता बन जाता है, तो अमेरिकी प्रतिबंधों की प्रभावशीलता कम हो सकती है।

ट्रंप ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अगर यह समझौता आगे बढ़ा, तो अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर सैन्य कार्रवाई भी कर सकता है। उन्होंने ईरान और ओमान दोनों को सीधी धमकी दी है कि अमेरिका बमबारी के लिए तैयार है। यह धमकी पश्चिम एशिया में तनाव को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखती है।

क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव

इस विवाद का असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल पर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं निर्भर हैं। भारत भी इस क्षेत्र से अपनी तेल जरूरतों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आयात करता है। इसलिए भारत को भी इस स्थिति पर सतर्क नजर रखनी चाहिए।

अगर अमेरिका वाकई होर्मुज जलडमरूमध्य पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो तेल की कीमतों में अचानक वृद्धि हो सकती है। इससे भारत समेत विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। मुद्रास्फीति बढ़ेगी और आम लोगों को महंगाई का दर्द झेलना पड़ेगा।

इसके अलावा, अगर अमेरिका सैन्य कार्रवाई करता है, तो इससे पूरे इलाके में एक बड़े संघर्ष की आशंका भी पैदा हो सकती है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इजरायल जैसे अमेरिकी सहयोगी अपनी सेनाएं सक्रिय कर सकते हैं। ईरान और उसके समर्थक देश भी जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं। ऐसे में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका बनी रहेगी।

अंतर्राष्ट्रीय कानून का सवाल

यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी अंतर्राष्ट्रीय जलडमरूमध्य पर किसी एक देश का एकतरफा नियंत्रण नहीं हो सकता। अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत, होर्मुज जलडमरूमध्य एक अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग है, जहां सभी देशों के जहाजों को आने-जाने की स्वतंत्रता है। लेकिन ईरान और ओमान का यह समझौता अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं करता, बल्कि क्षेत्रीय शांति बनाए रखने का एक प्रयास है।

ट्रंप की धमकी अंतर्राष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। किसी भी देश को दूसरे देशों के बीच व्यापार समझौतों को बलपूर्वक रोकने का अधिकार नहीं है। लेकिन अमेरिका अपनी सैन्य और आर्थिक ताकत का दुरुपयोग करके अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को नकार रहा है।

इस परिस्थिति में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। इन संगठनों को अमेरिकी धमकियों के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और अंतर्राष्ट्रीय कानून का सम्मान करने के लिए सभी देशों को प्रोत्साहित करना चाहिए।

निष्कर्ष

पश्चिम एशिया में ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पर समझौते की बातचीत एक सकारात्मक कदम है। यह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए एक अच्छा संकेत है। लेकिन ट्रंप की धमकी इस सकारात्मक प्रयास को बर्बाद कर सकती है। अमेरिका को अपनी एकतरफा नीति से मुक्त होकर बहुपक्षीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। दुनिया की शांति और समृद्धि के लिए सभी देशों को एक-दूसरे के साथ सहयोग करना होगा, न कि धमकियों और सैन्य बल का सहारा लेना होगा। इसी में सभी का हित है।