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Saturday, 13 June 2026
विश्व

ईरान संकट: भारत का सीजफायर पर बयान

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Komal
संवाददाता
📅 08 April 2026, 4:01 PM ⏱ 1 मिनट 👁 534 views

ईरान और इस्राइल के बीच चल रहे युद्ध विवाद को लेकर भारत सरकार ने अपना पहला आधिकारिक बयान जारी किया है। भारत सरकार की ओर से कहा गया है कि पश्चिम एशिया क्षेत्र में शांति और स्थिरता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का हम स्वागत करते हैं। भारत सरकार इस बात की आशा प्रकट करती है कि आने वाले समय में पश्चिम एशिया में स्थायी शांति बनी रहे।

विदेश मामलों के मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि दो हफ्तों का यह युद्धविराम एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत सरकार इस युद्धविराम को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखती है और इससे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा की स्थापना में मदद मिलेगी। भारत पश्चिम एशिया के सभी देशों के साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखना चाहता है और किसी भी प्रकार के संघर्ष को समाप्त करना चाहता है।

ईरान में भारतीयों की सुरक्षा पर ध्यान

भारत सरकार की ओर से ईरान में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ईरान में स्थित भारतीय दूतावास ने सभी भारतीय नागरिकों के लिए एक आधिकारिक सूचना जारी की है। इस सूचना में सभी भारतीयों को सलाह दी गई है कि वे अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निर्णय लें।

भारतीय दूतावास की ओर से भारतीय नागरिकों से कहा गया है कि यदि वे चाहें तो वे ईरान से बाहर आ सकते हैं। हालांकि, दूतावास ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह किसी प्रकार की अनिवार्य सूचना नहीं है। भारतीय नागरिक अपनी सुविधा और आवश्यकता के अनुसार निर्णय ले सकते हैं। दूतावास की ओर से सभी भारतीयों को आश्वस्त किया गया है कि उनकी सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

इससे पहले भारतीय विदेश मंत्रालय ने ईरान में रहने वाले भारतीयों की एक सूची तैयार की थी। इस सूची के अनुसार ईरान में कई हजार भारतीय नागरिक रहते हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में अपना काम-काज करते हैं। इनमें शिक्षक, डॉक्टर, इंजीनियर, व्यापारी और अन्य व्यावसायिक कार्य में लगे लोग शामिल हैं।

भारत की क्षेत्रीय शांति की नीति

भारत का पश्चिम एशिया क्षेत्र के प्रति एक स्पष्ट रुख रहा है। भारत सरकार का मानना है कि इस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा से ही भारत सहित पूरे विश्व को लाभ होगा। भारत विश्वास करता है कि सभी देशों को अपने विवादों को शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाना चाहिए न कि सैन्य शक्ति का प्रयोग करके।

भारत की विदेश नीति सदा से ही गुटनिरपेक्षता और शांतिवाद पर आधारित रही है। भारत सरकार किसी भी दो देशों के बीच होने वाले युद्ध विवाद को लेकर निरपेक्ष रुख अपनाती है। भारत का लक्ष्य हमेशा से ही विश्व शांति और सहयोग को बढ़ावा देना है।

भारत सरकार की ओर से कहा जाता है कि पश्चिम एशिया क्षेत्र भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में भारत के आर्थिक हित भी हैं और भारत का काफी बड़ा जनसंख्या वहां निवास करती है। इसलिए भारत के लिए यह जरूरी है कि इस क्षेत्र में शांति बनी रहे।

भारत सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि आने वाले समय में संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को चाहिए कि वे इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए विशेष प्रयास करें। भारत अपनी ओर से भी सभी प्रकार का सहयोग प्रदान करने के लिए तैयार है।

आगे की राह और संभावनाएं

दो हफ्तों का यह युद्धविराम एक अच्छी शुरुआत मानी जा रही है। इस अवधि के दौरान दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रहेगी। भारत सरकार इस बात की आशा करती है कि इस बातचीत के दौरान दोनों देश एक स्थायी समाधान तक पहुंचेंगे।

भारत के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह युद्धविराम सफल रहता है तो इससे पश्चिम एशिया क्षेत्र में एक नई स्थिरता आएगी। इस क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और लोगों को शांतिपूर्ण जीवन जीने का मौका मिलेगा। साथ ही, इस क्षेत्र में भारत के व्यापार और निवेश में भी वृद्धि होगी।

भारत सरकार की ओर से भी सभी संबंधित पक्षों से अपील की जा रही है कि वे इस युद्धविराम को सफल बनाने के लिए प्रयास करें। भारत का विश्वास है कि शांतिपूर्ण वार्ता के माध्यम से ही सभी समस्याओं का समाधान संभव है।

भारत सरकार ने ईरान में अपने दूतावास को निर्देश दिए हैं कि वह स्थिति पर लगातार निगरानी रखे और किसी भी आपातकालीन स्थिति में भारतीय नागरिकों की मदद के लिए तुरंत कार्रवाई करे। भारतीय नागरिकों को भी सलाह दी गई है कि वे अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और अनावश्यक जोखिम न लें।