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Wednesday, 22 April 2026
मौसम

मॉनसून 2026: अल नीनो का असर और बारिश का पूर्वानुमान

author
Komal
संवाददाता
📅 08 April 2026, 4:31 PM ⏱ 1 मिनट 👁 682 views

2026 का मॉनसून: अल नीनो का बढ़ता असर

भारत के मौसम विभाग और जलवायु विशेषज्ञों के लिए 2026 का मॉनसून सीजन चिंता का विषय बन गया है। स्काईमेट वेदर, जो भारत की प्रमुख मौसम पूर्वानुमान संस्था है, ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में बताया है कि आने वाले साल में भारतीय मॉनसून सामान्य से लगभग 6% कम बारिश के साथ कमजोर रहने की संभावना है। यह जानकारी किसानों, कृषि विभाग और जल संरक्षण विभाग के लिए अहम है।

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस कमजोरी का मुख्य कारण प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति है, जो भारत के मॉनसून पैटर्न को प्रभावित करती है। अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जो विश्वव्यापी तापमान और वर्षा के पैटर्न को बदल देती है। जब अल नीनो सक्रिय होता है, तो भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कमजोर पड़ जाता है और बारिश कम होती है।

स्काईमेट की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, जून से सितंबर तक चलने वाले मॉनसून सीजन में कुल बारिश 94% लॉन्ग पीरियड एवरेज (एलपीए) रहने का अनुमान है। यह आंकड़ा बताता है कि यह साल वर्षा की दृष्टि से कैसा रहेगा। 100% एलपीए को सामान्य माना जाता है, इसलिए 94% का मतलब है कि 6% कम बारिश होगी।

मॉनसून: क्षेत्रीय विविधता और स्थानीय प्रभाव

भारत एक विविध भूगोल वाला देश है और इसके विभिन्न क्षेत्रों में मॉनसून का असर अलग-अलग होता है। 2026 के मॉनसून पूर्वानुमान में भी यह विविधता साफ दिखाई दे रही है। स्काईमेट की रिपोर्ट में यह बताया गया है कि मध्य भारत और पश्चिमी भारत में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।

मध्य भारत में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्य मॉनसून पर अधिक निर्भर हैं। इन क्षेत्रों में कम बारिश का सीधा असर कृषि पर पड़ता है। जहां कहीं सिंचाई के साधन सीमित हैं, वहां कम बारिश का मतलब फसलों की पैदावार में कमी होता है। पश्चिमी भारत, विशेषकर महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में पहले से ही जल संकट की स्थिति रहती है, ऐसे में कम मॉनसून और भी समस्याएं पैदा कर सकता है।

हालांकि, भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में बेहतर बारिश की उम्मीद है। असम, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में मॉनसून की सामान्य से बेहतर परफॉर्मेंस हो सकती है। यह क्षेत्र भारत में सबसे ज्यादा बारिश वाला इलाका है और यहां अल नीनो का असर अपेक्षाकृत कम होता है।

दक्षिणी भारत, विशेषकर कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु का हाल भी निराशाजनक हो सकता है क्योंकि ये क्षेत्र मॉनसून पर पूरी तरह निर्भर हैं। कम बारिश से यहां की जलविद्युत परियोजनाएं और कृषि दोनों प्रभावित होंगे।

अल नीनो: भारतीय मॉनसून के लिए संकट

अल नीनो की घटना पिछले कुछ सालों में विश्व जलवायु के लिए गंभीर समस्या साबित हुई है। 2023 और 2024 में भी अल नीनो की गतिविधि देखी गई थी, जिससे भारत के साथ-साथ दुनिया भर में मौसम संबंधी समस्याएं पैदा हुई थीं। 2026 में अल नीनो की स्थिति यदि बनी रहती है, तो इसके कई नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं।

अल नीनो के कारण सूखे का खतरा भारत के कई हिस्सों में बढ़ जाता है। जब मॉनसून कमजोर पड़ता है और बारिश कम होती है, तो मिट्टी की नमी घटती है, भूजल स्तर नीचे चला जाता है और पानी की कमी हो जाती है। यह स्थिति कृषि संकट का कारण बन सकती है।

2026 में अगर यह परिस्थिति बनती है, तो सरकार को पानी के संरक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा। किसानों को खरीफ फसल लगाने से पहले अच्छी तरह सोच-समझ लेना चाहिए। सूखा-सहन शील फसलें लगाना और ड्रिप सिंचाई जैसी तकनीकें अपनाना इस स्थिति में आवश्यक हो जाता है।

ऐसी स्थिति में भारतीय किसान, जल संरक्षण विभाग और मौसम विज्ञानी सभी को मिलकर तैयारी करनी चाहिए। 2026 का मॉनसून कैसा रहेगा, यह जानने के लिए आने वाले महीनों में नियमित पूर्वानुमान और रिपोर्ट देखते रहना चाहिए। सरकार को भी बेहतर सिंचाई सुविधाएं विकसित करनी चाहिए ताकि कम बारिश की स्थिति में कृषि को बहुत नुकसान न हो।