🔴 ब्रेकिंग
DK शिवकुमार CM: IAS अधिकारियों की नई नियुक्ति|पर्स में ये 3 चीजें रखने से खाली होती है जेब|अनुष्का शर्मा होम्योपैथी सपोर्ट विवाद|ट्रंप और नेतन्याहू की तनाव भरी बातचीत का सच|सोने से पहले लगाएं लौंग की क्रीम, बुढ़ापा रहेगा दूर|पीली रोटी का चमत्कार, 43 दिन में बढ़ेगा धन|होटल कारोबारी हत्याकांड: मुख्य आरोपी मारा गया|ईरान युद्ध पर ट्रंप को झटका: संसद से सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव|मालवीय नगर अग्निकांड: क्या 1000 डिग्री तक पहुंचा था तापमान?|ईरान-अमेरिका समझौता: जंग टलेगी, खत्म नहीं होगी|DK शिवकुमार CM: IAS अधिकारियों की नई नियुक्ति|पर्स में ये 3 चीजें रखने से खाली होती है जेब|अनुष्का शर्मा होम्योपैथी सपोर्ट विवाद|ट्रंप और नेतन्याहू की तनाव भरी बातचीत का सच|सोने से पहले लगाएं लौंग की क्रीम, बुढ़ापा रहेगा दूर|पीली रोटी का चमत्कार, 43 दिन में बढ़ेगा धन|होटल कारोबारी हत्याकांड: मुख्य आरोपी मारा गया|ईरान युद्ध पर ट्रंप को झटका: संसद से सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव|मालवीय नगर अग्निकांड: क्या 1000 डिग्री तक पहुंचा था तापमान?|ईरान-अमेरिका समझौता: जंग टलेगी, खत्म नहीं होगी|
Friday, 05 June 2026
विश्व

ईरान युद्ध पर ट्रंप को झटका: संसद से सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव

author
Komal
संवाददाता
📅 04 June 2026, 6:01 AM ⏱ 1 मिनट 👁 663 views
ईरान युद्ध पर ट्रंप को झटका: संसद से सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव
📷 aarpaarkhabar.com

वाशिंगटन - अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने एक ऐतिहासिक फैसले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधा झटका दिया है। संसद ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को सीमित करने वाले युद्ध शक्ति संकल्प को बुधवार को 215-208 मतों से मंजूरी दे दी। यह निर्णय इसलिए और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ रिपब्लिकन सांसद भी इसमें डेमोक्रेटिक पक्ष के साथ हो गए।

यह प्रस्ताव वर्तमान सरकार के विदेश नीति के सबसे बड़े विरोध का संकेत है। राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी प्रशासन हाल ही में ईरान को लेकर कड़ा रुख अपना रहा था। लेकिन संसद के इस कदम से साफ है कि अमेरिकी जनप्रतिनिधि किसी नए युद्ध का समर्थन नहीं करना चाहते।

ट्रंप प्रशासन को संसद से मिला प्रत्यक्ष चेतावनी

यह निर्णय पूरी तरह से ट्रंप के लिए अप्रत्याशित नहीं है। संसद में इस तरह की आवाजें पिछले कुछ महीनों से उठ रही थीं। हालांकि, इतने बड़े अंतर से संकल्प पारित होना एक बड़ी बात है। 215 के मुकाबले 208 मतों का अंतर दिखाता है कि अमेरिकी नेतृत्व के बीच इस मुद्दे पर कितनी गंभीर असहमति है।

डेमोक्रेटिक पार्टी के सभी सांसद इस प्रस्ताव के पक्ष में थे यह तो अपेक्षित था, लेकिन रिपब्लिकन पार्टी के कुछ प्रभावशाली सदस्यों का भी समर्थन यह दिखाता है कि राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान नीति पर पार्टी के भीतर भी विभाजन है। यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप को विदेश नीति पर संसद से प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है।

प्रस्ताव का वास्तविक महत्व और भविष्य

यह प्रस्ताव सिर्फ एक प्रतीकात्मक कदम नहीं है। युद्ध शक्ति संकल्प के माध्यम से संसद राष्ट्रपति को सूचित कर रही है कि किसी भी नई सैन्य कार्रवाई के लिए उसे संसद की अनुमति लेनी होगी। अमेरिकी संविधान के अनुसार युद्ध की घोषणा की शक्ति संसद के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं।

वर्तमान में यह प्रस्ताव संसद के निचले सदन से पारित हो गया है। अब इसे सीनेट में भेजा जाएगा, जहां इसके पारित होने की संभावना अधिक है क्योंकि सीनेट में भी काफी संख्या में रिपब्लिकन सदस्य इसका समर्थन कर सकते हैं। यदि सीनेट भी इसे पारित कर दे, तो ट्रंप को वीटो करने का विकल्प होगा, लेकिन सांसदों के पास वीटो को ओवरराइड करने की शक्ति भी है।

इस पूरी प्रक्रिया में अगर दोनों सदनों से दो-तिहाई बहुमत मिल जाता है, तो राष्ट्रपति का वीटो भी अमान्य हो सकता है। यह परिस्थिति काफी गंभीर है और ट्रंप प्रशासन के लिए चिंता का विषय हो सकती है।

विश्व राजनीति में इसका प्रभाव

अमेरिकी संसद का यह कदम विश्व राजनीति में भी महत्वपूर्ण संदेश भेजता है। ईरान समेत दुनिया के तमाम देश यह सोच रहे होंगे कि अब अमेरिकी राष्ट्रपति की मनमानी में कटौती हो गई है। इससे अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में एक नई स्थिरता आ सकती है।

इसके अलावा, यह निर्णय अमेरिकी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का भी प्रमाण है। भले ही राष्ट्रपति अत्यंत शक्तिशाली हो, लेकिन संसद में भी काफी शक्ति है और वह अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में सक्षम है। यह अलग बात है कि यह शक्ति का प्रयोग काफी कम होता है, लेकिन जब होता है तो बहुत प्रभावी साबित होता है।

मध्य पूर्व में तनाव की परिस्थितियां पहले से ही बहुत गंभीर हैं। यदि इसमें अमेरिका की सीधी सैन्य भागीदारी हो जाती, तो स्थिति और भी बिगड़ सकती थी। इस मायने में अमेरिकी संसद का यह कदम वैश्विक शांति के लिए भी सकारात्मक साबित हो सकता है।

राष्ट्रपति ट्रंप अपनी दूसरी पारी में विदेश नीति को लेकर काफी आक्रामक रुख अपना रहे थे। उनके ईरान नीति में कड़े प्रतिबंध और सैन्य धमकियां शामिल थीं। लेकिन संसद का यह प्रस्ताव साफ कर देता है कि अमेरिकी जनता और उनके प्रतिनिधि किसी नए युद्ध के लिए तैयार नहीं हैं। यह पिछले दो दशकों में अफगानिस्तान और इराक जैसे लंबे युद्धों का परिणाम है, जहां हजारों अमेरिकी सैनिकों की जान चली गई और लाखों डॉलर खर्च हुए।

आने वाले दिनों में सीनेट में भी इसी तरह की बहस होगी और संभवतः इसी तरह का निर्णय होगा। यह निर्णय अमेरिकी विदेश नीति में एक नया मोड़ ला सकता है और राष्ट्रपति की शक्तियों पर भी प्रश्नचिह्न लगा सकता है।