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Tuesday, 21 April 2026
धर्म

परशुराम जयंती 2026: तारीख और पूजा मुहूर्त

author
Komal
संवाददाता
📅 10 April 2026, 8:01 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.2K views
परशुराम जयंती 2026: तारीख और पूजा मुहूर्त
📷 aarpaarkhabar.com

परशुराम जयंती 2026: तारीख और पूजा मुहूर्त

हिंदू धर्म में परशुराम जयंती का विशेष महत्व है। भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्मदिन हर साल बैसाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाया जाता है। 2026 में परशुराम जयंती 19 या 20 अप्रैल को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं कि इस बार कौन सी तारीख सही है और पूजा का मुहूर्त क्या होगा।

परशुराम जयंती कब है 2026 में

2026 में परशुराम जयंती की तारीख को लेकर कुछ भ्रम है। भारतीय पंचांग के अनुसार तिथि परिवर्तन के कारण परशुराम जयंती 19 अप्रैल को मनाई जा सकती है। हालांकि, कई क्षेत्रों में यह 20 अप्रैल को भी मनाई जाती है। दोनों तारीखें सही हैं, लेकिन आपके क्षेत्र के पंचांग के अनुसार सही समय जानना बेहद जरूरी है।

परशुराम जयंती को अक्षय तृतीया भी कहा जाता है क्योंकि भगवान परशुराम का जन्म इसी दिन हुआ था। अक्षय का मतलब होता है जो कभी खत्म न हो। इसीलिए इस दिन को बहुत पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का धरती पर जन्म हुआ था।

भगवान परशुराम जमदग्नि और रेणुका के पुत्र थे। वह भगवान शिव के महान भक्त थे और उन्होंने शिव से परशु (कुल्हाड़ी) प्राप्त की थी। इसी कारण उन्हें परशुराम कहा जाता है। उनका एक अलग ही स्थान हिंदू धर्म में है। कहा जाता है कि परशुराम को चिरंजीवी माना जाता है, यानी वह आज भी जीवित हैं और हर युग में प्रकट होते हैं।

पूजा का शुभ मुहूर्त

परशुराम जयंती पर पूजा करने का सही समय जानना बहुत महत्वपूर्ण है। 2026 में परशुराम जयंती के दिन सुबह का समय पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है। प्रातःकाल में तिथि का समय सुबह 7 बजे से दोपहर 1 बजे तक रहने की संभावना है।

पूजा के समय विशेष रूप से भगवान परशुराम को जल, दूध, दही, फल और फूल अर्पित किए जाते हैं। घर में भगवान की मूर्ति के सामने दीप जलाए जाते हैं। कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं। व्रत रखने वाले लोग दिन भर फल और दूध का सेवन करते हैं।

पूजा के दौरान परशुराम चालीसा या परशुराम आरती का पाठ किया जाता है। कुछ परिवारों में इस दिन को विशेष भोग तैयार करके मनाया जाता है। भगवान को भोग लगाने के बाद प्रसाद को सभी के बीच बांटा जाता है।

परशुराम जयंती का महत्व और परंपरा

परशुराम जयंती हिंदू समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन को अक्षय तृतीया के रूप में भी मनाया जाता है। माना जाता है कि इसी दिन महाभारत के लेखक महर्षि वेदव्यास ने महाभारत ग्रंथ की रचना शुरू की थी।

परशुराम जयंती पर कई धार्मिक कार्य किए जाते हैं। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है। कई लोग इस दिन गरीबों को भोजन कराते हैं और दान देते हैं। स्कूलों और महाविद्यालयों में भी परशुराम जयंती मनाई जाती है और बच्चों को भगवान परशुराम के बारे में जानकारी दी जाती है।

कई क्षेत्रों में इस दिन को नए काम शुरू करने के लिए शुभ माना जाता है। व्यापारी लोग अपनी दुकानों और दफ्तरों में नई किताबें (बही-खाता) शुरू करते हैं। यह माना जाता है कि अक्षय तृतीया पर शुरू किया गया कोई भी काम हमेशा सफल होता है।

भारत के विभिन्न हिस्सों में परशुराम जयंती मनाई जाती है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात और अन्य राज्यों में इस दिन विशेष पूजा की जाती है। कुछ मंदिरों में तो भव्य आरती और धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है।

परशुराम जयंती मनाते समय हमें भगवान परशुराम के जीवन से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने अपना पूरा जीवन सत्य और न्याय की स्थापना के लिए समर्पित किया था। उन्होंने बुराई के विनाश के लिए कड़े कदम उठाए थे। इसीलिए हमें भी परशुराम जयंती पर अपने जीवन में सत्य, न्याय और सदाचार को स्थापित करने का संकल्प लेना चाहिए।

2026 में परशुराम जयंती मनाते समय सही तारीख और मुहूर्त का पालन करें। अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार पूजा करें। भगवान परशुराम को अपनी भक्ति और श्रद्धा से नमन करें। इस दिन को महत्व देते हुए धार्मिक परंपराओं का पालन करें और परिवार के साथ इस पवित्र दिन को मनाएं।