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Wednesday, 22 April 2026
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जम्मू-कश्मीर डोडा में 4.6 तीव्रता का भूकंप

author
Komal
संवाददाता
📅 12 April 2026, 6:00 AM ⏱ 1 मिनट 👁 999 views
जम्मू-कश्मीर डोडा में 4.6 तीव्रता का भूकंप
📷 aarpaarkhabar.com

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में सोमवार की सुबह 4 बजकर 32 मिनट पर 4.6 तीव्रता का भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने इस भूकंप की पुष्टि की है। अभी तक इस भूकंप से किसी तरह के नुकसान की कोई खबर सामने नहीं आई है। भूकंप के झटके स्थानीय लोगों को तो महसूस हुए, लेकिन किसी संपत्ति को नुकसान की खबर नहीं मिली है।

यह पहली बार नहीं है कि इस क्षेत्र में भूकंप आया है। भारत के उत्तरी भागों में भूकंप आना एक आम बात है। खासकर हिमालय क्षेत्र और उसके आसपास के इलाकों में भूकंपीय गतिविधियां काफी अधिक होती हैं। जम्मू-कश्मीर क्षेत्र भूकंप के लिहाज से संवेदनशील इलाका माना जाता है। यहां से समय-समय पर भूकंपीय गतिविधियों की रिपोर्ट आती रहती हैं।

डोडा जिला जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में स्थित है। यह क्षेत्र तकनीकी रूप से सीस्मिक जोन-4 के अंतर्गत आता है, जिसका अर्थ है कि यह क्षेत्र मध्यम से उच्च भूकंपीय गतिविधि वाला है। इसी कारण यहां समय-समय पर भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। हालांकि, 4.6 तीव्रता का भूकंप आमतौर पर किसी गंभीर नुकसान का कारण नहीं बनता है।

भूकंप आने के पीछे वैज्ञानिक कारण

भूकंप पृथ्वी की सतह के नीचे होने वाली प्राकृतिक घटनाएं हैं। पृथ्वी की बाहरी परत कई टेक्टोनिक प्लेटों से बनी हुई है। ये प्लेटें हमेशा गति में रहती हैं, भले ही यह गति बहुत धीमी हो। जब ये प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं या एक-दूसरे के ऊपर से गुजरती हैं, तो भूकंप आता है। यह टकराहट का नतीजा है कि भूकंप की लहरें पृथ्वी की सतह पर पहुंचती हैं और हम उन्हें महसूस करते हैं।

भारत के मामले में, भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट के नीचे दबती जा रही है। यह प्रक्रिया लाखों सालों से चल रही है और इसी से हिमालय पर्वत का निर्माण हुआ था। इसी प्रक्रिया के कारण भारत के उत्तरी भागों में भूकंपीय गतिविधियां बनी रहती हैं। हिमालय क्षेत्र और उसके आसपास के भू-भाग में टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियां बहुत अधिक होती हैं।

तीव्रता कैसे मापी जाती है

भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है। यह स्केल 1 से लेकर 9 तक जाता है। 4.6 तीव्रता का भूकंप मध्यम श्रेणी का माना जाता है। इतने तीव्रता वाले भूकंप में कुछ नुकसान हो सकता है, लेकिन आमतौर पर यह गंभीर नुकसान का कारण नहीं बनता है। यदि भूकंप की तीव्रता 5.5 से अधिक हो, तो इसे मजबूत भूकंप माना जाता है। 7 से अधिक तीव्रता का भूकंप बहुत खतरनाक माना जाता है।

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र भारत में सभी भूकंपीय गतिविधियों को ट्रैक करता है। देश भर में सीस्मोग्राफ स्टेशन लगे हुए हैं, जो भूकंप की हलचलों को रिकॉर्ड करते हैं। जैसे ही कोई भूकंप आता है, ये स्टेशन उसकी जानकारी तुरंत भूकंप विज्ञान केंद्र को भेजते हैं। केंद्र डेटा का विश्लेषण करके भूकंप की तीव्रता, गहराई और स्थान की जानकारी जारी करता है।

डोडा क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता

डोडा जिला हिमालय की पहाड़ियों में बसा हुआ है। यह क्षेत्र भूकंप के लिहाज से बहुत संवेदनशील है। पिछले कुछ सालों में यहां कई बार भूकंप आ चुके हैं। कभी-कभी तो इतनी छोटी तीव्रता का भूकंप आता है कि लोगों को महसूस ही नहीं होता। लेकिन कभी-कभी मजबूत भूकंप भी आ जाते हैं जो थोड़ा नुकसान कर सकते हैं।

डोडा क्षेत्र में जनसंख्या अपेक्षाकृत कम है और यहां के मकान भी आमतौर पर मजबूत निर्माण से नहीं बने होते। भूकंप के समय अगर तीव्रता अधिक हो, तो नुकसान की संभावना बढ़ जाती है। इसी कारण स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन सेवाएं हमेशा सतर्क रहती हैं। भूकंप के बाद तुरंत नुकसान का आकलन किया जाता है और जरूरत पड़ने पर राहत कार्य शुरू किए जाते हैं।

डोडा में आया यह भूकंप 4.6 तीव्रता का था, जो मध्यम श्रेणी में आता है। ऐसे भूकंप से आमतौर पर गंभीर नुकसान नहीं होता। लेकिन यह एक अनुस्मारक है कि हमें भूकंपों के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। भवनों को भूकंप-सुरक्षित तरीके से बनाया जाना चाहिए। लोगों को भूकंप आने पर क्या करना चाहिए, इसकी जानकारी दी जानी चाहिए। आपातकालीन सेवाओं को हमेशा तैयार रहना चाहिए ताकि किसी आपातकाल में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

कुल मिलाकर, डोडा में आया यह भूकंप एक सामान्य घटना है। भारत के उत्तरी भागों में ऐसे भूकंप आते रहते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि हम इन प्राकृतिक आपदाओं के लिए तैयार रहें और अपनी जान-माल की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएं।