ईरान-अमेरिका बैठक: होर्मुज की शर्तें
पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली बातचीत को लेकर नए विकास सामने आए हैं। दोनों देशों के बीच स्थायी संघर्षविराम के लिए चल रहे कूटनीतिक प्रयासों में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने से पहले कुछ महत्वपूर्ण शर्तें रख दी हैं। हालांकि, अमेरिका ने इन शर्तों को मानने के लिए अभी तक कोई सहमति नहीं दी है और उसके पास भी अपनी कुछ शर्तें हैं।
आंतरिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह बातचीत बेहद गंभीर और संवेदनशील प्रकृति की है। होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। इसी मार्ग से दुनिया का लगभग 30 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। इसलिए इस जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और अमेरिका की बातचीत पूरी दुनिया की नजर में है। हर देश को इस बात की चिंता है कि अगर होर्मुज बंद रहता है तो वैश्विक तेल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है।
ईरान की शर्तें क्या हैं
ईरान ने अमेरिका के सामने जो शर्तें रखी हैं उनमें सबसे महत्वपूर्ण है अमेरिकी प्रतिबंधों को पूर्ण रूप से हटाना। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उन पर लगे प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटा नहीं देता, तब तक वह होर्मुज स्ट्रेट को व्यावसायिक कारणों के लिए पूरी तरह खुला नहीं करेगा। ईरान के नेतृत्व की ओर से कहा गया है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों ने उसकी अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान पहुंचाया है।
ईरान की दूसरी महत्वपूर्ण शर्त है कि अमेरिका को अपने सैन्य उपस्थिति को खाड़ी क्षेत्र से कम करना होगा। ईरान का तर्क है कि अमेरिकी सैन्य शक्ति इस क्षेत्र में अस्थिरता का मुख्य कारण है। इसके अलावा, ईरान ने कहा है कि अमेरिका को इजराइल को लेकर अपनी नीति में बदलाव करना होगा। ईरान के अनुसार, इजराइल की अमेरिकी समर्थन के कारण ही इस क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।
चौथी शर्त के अनुसार ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षण में कुछ सुविधाएं दी जानी चाहिए। ईरान के अनुसार उसके परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण हैं और बाकी देशों की तरह उसे भी तकनीकी विकास का अधिकार है।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
अमेरिका ने ईरान की इन शर्तों के प्रति अपनी स्पष्ट असहमति दर्शाई है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वह किसी भी दबाव में आकर अपनी नीति में परिवर्तन नहीं करेगा। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखना सभी देशों का दायित्व है, सिर्फ ईरान का नहीं।
अमेरिका की ओर से कहा गया है कि वह केवल उसी स्थिति में प्रतिबंध हटाएगा जब ईरान अपने सभी परमाणु कार्यक्रमों पर कड़ी निगरानी के लिए सहमत हो जाए। इसके अलावा, अमेरिका ने यह भी शर्त रखी है कि ईरान को अपने आतंकवादी संगठनों से संबंध पूरी तरह तोड़ने होंगे। अमेरिका का आरोप है कि ईरान कई अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी समूहों को समर्थन और वित्त पोषण प्रदान करता है।
अमेरिका के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र से सैन्य शक्ति को कम करना संभव नहीं है क्योंकि उसे अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है। अमेरिका ने कहा है कि वह इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को यथावत रखेगा और किसी भी बाहरी दबाव में नहीं आएगा।
अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव और भविष्य
दोनों देशों के बीच यह बातचीत विश्व अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से तेल का आयात करने वाले देश, विशेषकर एशियाई देश, इस बातचीत के परिणामों को लेकर गहरी चिंता में हैं। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के लिए होर्मुज स्ट्रेट का खुला रहना अत्यंत आवश्यक है।
रूस ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय दी है। रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि संवाद और समझौते के माध्यम से ही इस समस्या का समाधान संभव है। रूस का मानना है कि सभी पक्षों को एक दूसरे की चिंताओं को समझना चाहिए और आपसी सहमति से समस्या का समाधान निकालना चाहिए।
इस समय पाकिस्तान की भूमिका एक माध्यम की तरह है। पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। पाकिस्तानी नेतृत्व का मानना है कि यह बातचीत सफल हो सकती है यदि दोनों पक्ष कुछ समझौते के लिए तैयार हों।
विशेषज्ञों का मत है कि यह बातचीत लंबी हो सकती है क्योंकि दोनों पक्षों की शर्तें काफी गंभीर हैं। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय दबाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंताओं को देखते हुए, दोनों देशों को कुछ न कुछ समझौता करना पड़ सकता है। होर्मुज स्ट्रेट के खुले रहने से न केवल ईरान और अमेरिका को फायदा होगा बल्कि पूरी दुनिया को लाभ मिलेगा।




