121 खाली तेल टैंकर अमेरिका जा रहे हैं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक तेल नीति ने दुनियाभर के बाजारों में तहलकल मचा दी है। सबसे बड़ी खबर यह है कि 121 से अधिक खाली तेल टैंकर अमेरिका की ओर बढ़ रहे हैं। यह संख्या ही बताती है कि किस तरह ट्रंप की रणनीति वैश्विक ऊर्जा बाजार को नया रूप दे रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने और ट्रंप के दबाव के बीच यह मोड़ अचानक नहीं आया है। दरअसल यह एक सुविचारित कदम है जो अमेरिकी तेल उद्योग को फिर से दुनिया का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनाने के लिए उठाया गया है।
ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में अमेरिकी ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर जोर दिया था। लेकिन इस बार वह सिर्फ आत्मनिर्भरता नहीं चाहते हैं। वह अमेरिकी तेल को दुनिया का सबसे पसंदीदा विकल्प बनाना चाहते हैं। इसके लिए वह विश्व के विभिन्न देशों को प्रोत्साहित कर रहे हैं कि वे अमेरिकी तेल खरीदें। साथ ही ईरानी तेल पर अधिकतम दबाव बनाया जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर हालात तनावपूर्ण हैं। इसी वजह से विश्व का बड़ा हिस्सा अपनी आपूर्ति श्रृंखला बदल रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट
दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होर्मुज जलडमरूमध्य से होता है। यह मध्य पूर्व और विश्व के बाकी हिस्सों के बीच सबसे महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग है। लेकिन पिछले कुछ समय से इस रास्ते पर अनिश्चितता का माहौल है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील बन गया है। कई बार तेल टैंकरों को हमलों का सामना करना पड़ा है। कई मामलों में ड्रोन स्ट्राइक की भी खबरें आई हैं। ऐसे माहौल में कोई भी देश इस रास्ते पर अपनी निर्भरता बढ़ाना नहीं चाहता है।
यह मौका ट्रंप के लिए सोने का है। वह अमेरिकी तेल को विकल्प के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। अमेरिका खुद एक सुरक्षित देश है और अटलांटिक महासागर के रास्ते से तेल का परिवहन भी अपेक्षाकृत ज्यादा सुरक्षित है। इसलिए दुनियाभर के देश अमेरिकी तेल की ओर रुख कर रहे हैं। 121 खाली टैंकर जो अमेरिका की ओर जा रहे हैं, ये सब इसी बदलाव का हिस्सा हैं।
ईरानी तेल पर ट्रंप का दबाव
इरान दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में से एक है। लेकिन पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण उसका तेल दुनिया के बाजार में सीमित मात्रा में पहुंचता है। ट्रंप इन प्रतिबंधों को और कड़ा करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य ईरानी तेल को पूरी तरह बाजार से बाहर निकाल देना है। इससे अमेरिकी तेल की मांग बढ़ेगी और कीमतें भी बेहतर रहेंगी।
यह रणनीति काफी चालाकी भरी है। अगर ईरानी तेल बाजार से बाहर हो जाता है, तो तेल की कमी महसूस होगी। ऐसे में विश्व के देशों को किसी न किसी विकल्प का सहारा लेना पड़ेगा। और अमेरिका इस समय सबसे बड़ा वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता है। अमेरिकी शेल तेल का उत्पादन दिन दूनी रात चौगुनी गति से बढ़ रहा है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में नई तेल खोजें हो रही हैं। इसलिए अमेरिका के पास तेल की भरपूर आपूर्ति है।
अमेरिकी तेल का उदय
121 खाली टैंकर सिर्फ एक संख्या नहीं है। ये दरअसल एक बड़ी अर्थव्यवस्था की गतिविधि का संकेत देते हैं। ये दिखाता है कि दुनिया का बाजार कितनी तेजी से बदल रहा है। पिछले दशक में अमेरिका तेल का निर्यातक नहीं था। अपनी जरूरत के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहता था। लेकिन शेल तेल क्रांति ने सब कुछ बदल दिया है। अब अमेरिका न सिर्फ अपनी जरूरत पूरी करता है, बल्कि दुनियाभर को तेल निर्यात करता है।
ट्रंप इसी अमेरिकी ऊर्जा ताकत को अपनी विदेश नीति का केंद्र बना रहे हैं। वह दुनिया के देशों को साफ संदेश दे रहे हैं कि अगर आप अमेरिका के साथ हैं, तो सस्ता तेल मिल जाएगा। और अगर आप अमेरिका के खिलाफ हैं, तो ईरान जैसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा। यह एक कूटनीतिक औजार है जो काफी असरदार साबित हो रहा है।
लेकिन इसके दीर्घकालीन परिणाम क्या होंगे? क्या दुनिया हमेशा के लिए अमेरिकी तेल पर निर्भर हो जाएगी? या फिर नई तेल तकनीकें और नवीकरणीय ऊर्जा इस समीकरण को बदल देंगी? ये सवाल भविष्य की ओर इशारा करते हैं। फिलहाल, 121 खाली टैंकर अमेरिका की ओर जा रहे हैं और दुनिया की ऊर्जा राजनीति में नया अध्याय लिखा जा रहा है।




