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Thursday, 21 May 2026
राजनीति

परिसीमन बिल पर 12 घंटे की मैराथन बहस

author
Komal
संवाददाता
📅 17 April 2026, 7:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 417 views

नई दिल्ली - देश की संसद में एक बार फिर से राजनीतिक उत्तेजना का माहौल बन गया है। परिसीमन बिल और महिला आरक्षण को लेकर लोकसभा के विशेष सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच 12 घंटे की मैराथन बहस हुई। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच नोक-झोंक और तीखे तर्क-कुतर्क देखने को मिले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर कड़ी निंदा की और परिसीमन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के भेदभाव न होने की गारंटी दी।

संसद का यह विशेष सत्र काफी महत्वपूर्ण साबित हुआ। इसमें दोनों ओर से अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए गए। सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि परिसीमन एक तकनीकी प्रक्रिया है जो पूरी तरह तटस्थ और वैज्ञानिक आधार पर की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि इसमें किसी राज्य या क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं होगा और सभी को समान न्याय मिलेगा।

परिसीमन प्रक्रिया और इसका महत्व

परिसीमन से अभिप्राय है मतदान क्षेत्रों की सीमाओं को पुनः निर्धारित करना। जनसंख्या परिवर्तन के आधार पर प्रत्येक कुछ वर्षों में इस प्रक्रिया को दोहराया जाता है। यह भारतीय लोकतंत्र का एक अहम हिस्सा है जो सभी नागरिकों को समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करता है। हालांकि, परिसीमन को लेकर हमेशा ही राजनीतिक विवाद रहा है।

इस बार का परिसीमन भी काफी संवेदनशील है क्योंकि इसका सीधा असर विभिन्न राज्यों में सीटों की संख्या पर पड़ेगा। कुछ राज्यों को अतिरिक्त सीटें मिल सकती हैं तो कुछ को कम हो सकती हैं। यही कारण है कि विपक्ष ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। विरोधी दलों को डर है कि यह परिसीमन कुछ राज्यों के साथ भेदभाव पूर्ण हो सकता है।

विपक्ष के नेताओं ने संसद में तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि सरकार तटस्थता के सिद्धांत पर अमल नहीं कर रही है। उनका आरोप है कि सरकार परिसीमन को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल कर रही है। वे यह भी कहते हैं कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और आम जनता को पूरी जानकारी नहीं दी जा रही है।

महिला आरक्षण बिल पर विवाद

इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल भी एक प्रमुख विषय रहा। सरकार ने इस बिल को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि यह महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण कदम है। महिला आरक्षण बिल के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है।

सरकार का दावा है कि यह बिल भारतीय लोकतंत्र में एक नए दौर की शुरुआत करेगा। इससे महिलाओं को राजनीति में ज्यादा भाग लेने का मौका मिलेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की आधी आबादी को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल होना चाहिए। वह यह भी कहते हैं कि महिला आरक्षण बिल भारत को एक मजबूत राष्ट्र बनाने में मदद करेगा।

हालांकि, विपक्ष ने इस बिल पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि परिसीमन के साथ महिला आरक्षण को जोड़ना सही नहीं है। वह यह भी सुझाते हैं कि पहले परिसीमन को पूरा होने दिया जाए, फिर महिला आरक्षण को लागू किया जाए।

प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया और सरकार का रुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि यह सब बस राजनीतिक हंगामा है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि सरकार पूरी निष्पक्षता और तटस्थता के साथ परिसीमन प्रक्रिया को अंजाम दे रही है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि विपक्ष को सरकार के इरादों पर विश्वास करना चाहिए।

सरकार के मंत्रियों ने भी विस्तार से अपने तर्क प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि परिसीमन आयोग एक स्वतंत्र निकाय है और इसे सरकार का कोई दबाव नहीं है। यह आयोग सभी मापदंडों को देखते हुए अपना फैसला लेता है। सरकार के पक्ष में यह भी तर्क दिया गया कि पिछली सरकारें भी परिसीमन में कोई विवाद नहीं करती थीं।

यह 12 घंटे की मैराथन बहस संसद के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना बनी। इसमें देश के सबसे प्रभावशाली नेताओं ने अपनी बातें रखीं। सरकार ने अपनी नीतियों को सही ठहराया जबकि विपक्ष ने लगातार सवाल उठाए। अंत में, सरकार के विचार ही प्रबल नजर आए और परिसीमन प्रक्रिया आगे बढ़ने के लिए तैयार है। हालांकि, इस विवाद का अंजाम अभी आना बाकी है।