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Thursday, 20 August 2026
विश्व

पाक में हाफिज के करीबी अफरीदी की हत्या

author
Komal
संवाददाता
📅 28 April 2026, 7:32 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.2K views
पाक में हाफिज के करीबी अफरीदी की हत्या
📷 aarpaarkhabar.com

पाकिस्तान में एक बार फिर से आतंकवादियों को निशाना बनाकर उन्हें मार गिराया गया है। इस बार का शिकार लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख आतंकवादी नेता शेख यूसुफ अफरीदी है, जो विश्वव्यापी स्तर पर प्रतिबंधित संगठन के संस्थापक हाफिज सईद का बहुत करीबी माना जाता था। खैबर पख्तूनख्वा के एक दुर्गम इलाके में अज्ञात हमलावरों ने अफरीदी को गोलियों से भून दिया। इस घटना के बाद पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों में भारी दहशत फैल गई है और सुरक्षा विश्लेषकों द्वारा "शैडो वॉर" की जोरदार अटकलें लगाई जा रही हैं।

शेख यूसुफ अफरीदी का लश्कर-ए-तैयबा में बहुत महत्वपूर्ण स्थान था। वह न केवल हाफिज सईद के विश्वस्त सहयोगी थे, बल्कि संगठन के कई गुप्त और संवेदनशील कार्यों में भी सीधा जुड़े हुए थे। उनके साथ उनके तीन साथियों को भी इसी घटना में मार दिया गया था। यह पहली बार नहीं है जब खैबर पख्तूनख्वा में ऐसी घटना हुई हो। गत कुछ महीनों में ऐसी घटनाओं की कड़ी देखी जा रही है जहां आतंकवादियों को सुव्यवस्थित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।

यह हत्या इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि पाकिस्तान में खुद के भीतर एक गहरा संघर्ष चल रहा है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिगड़ी हुई छवि और आतंकवाद के खिलाफ बढ़ते दबाव के कारण देश के भीतर ही कुछ शक्तियां आतंकवादियों को खत्म करने में सक्रिय हो गई हैं। इसे ही "शैडो वॉर" कहा जा रहा है। यह अनौपचारिक और गुप्त तरीकों से चलाया जा रहा है।

खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ती हिंसा

खैबर पख्तूनख्वा प्रांत पाकिस्तान का सबसे असुरक्षित माना जाता है। यह प्रांत अफगानिस्तान की सीमा पर स्थित है और यहां आतंकवादियों का एक मजबूत नेटवर्क है। शेख यूसुफ अफरीदी की हत्या भी इसी प्रांत में हुई थी। पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना और विभिन्न आतंकवादी संगठनों के बीच संघर्ष तेज हुआ है। लेकिन वर्तमान में जो घटनाएं हो रही हैं, वे इस बात का संकेत देती हैं कि किसी तीसरी शक्ति का हाथ भी इन हत्याओं में हो सकता है।

खैबर पख्तूनख्वा के स्थानीय लोगों के अनुसार, इस प्रांत में पिछले कुछ महीनों में कई आतंकवादी नेताओं को रहस्यपूर्ण तरीके से मार दिया गया है। कोई भी संगठन इन हत्याओं की जिम्मेदारी नहीं ले रहा है और पाकिस्तानी पुलिस तथा सेना भी कोई ठोस सुराग नहीं दे रहे हैं। इसी वजह से लोग इसे "शैडो वॉर" कहने लगे हैं।

आतंकवादी संगठनों में दहशत

शेख यूसुफ अफरीदी की हत्या के बाद लश्कर-ए-तैयबा और अन्य आतंकवादी संगठनों में भारी घबराहट हो गई है। ये संगठन अपने वरिष्ठ नेताओं की सुरक्षा बढ़ा चुके हैं। हाफिज सईद अपने आप को पूरी तरह छुपा चुके हैं और सार्वजनिक रूप से कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। लश्कर-ए-तैयबा के अन्य कई नेताओं ने भी अपने ठिकानों को बदल दिया है।

आतंकवादी संगठनों के लिए यह समय बहुत कठिन साबित हो रहा है। एक ओर तो पाकिस्तानी सेना और अंतरराष्ट्रीय दबाव उन्हें कमजोर कर रहा है, दूसरी ओर ये रहस्यपूर्ण हत्याएं उनके अंदर विश्वास की कमी पैदा कर रही हैं। किसी को यह पता नहीं है कि अगला शिकार कौन बन सकता है।

भारत-पाकिस्तान संबंध पर असर

ये घटनाएं भारत-पाकिस्तान संबंधों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। भारत का मानना है कि पाकिस्तान आतंकवाद की जन्मभूमि बन गया है। भारत ने कश्मीर में आतंकवादी हमलों के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया है। अगर पाकिस्तान में ही आतंकवादियों को निशाना बनाया जा रहा है, तो इसे कुछ विश्लेषक भारत की ओर से किया गया कार्रवाई भी मान सकते हैं। हालांकि, भारत सरकार ने इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

शेख यूसुफ अफरीदी की हत्या से यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान में आतंकवाद के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई हो रही है। चाहे वह "शैडो वॉर" हो या कोई अन्य कारण, लेकिन यह निश्चित है कि आतंकवादी संगठनों के दिन खराब हो गए हैं। आने वाले समय में इस तरह की घटनाएं और भी बढ़ने की संभावना है। पाकिस्तान के लिए यह एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जहां देश को आतंकवाद से निपटने के लिए अपनी नीतियों पर पुनः विचार करना पड़ेगा।