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Wednesday, 10 June 2026
विश्व

ट्रंप नए टैरिफ: सुप्रीम कोर्ट खारिज के बाद नई रणनीति

author
Komal
संवाददाता
📅 29 April 2026, 6:30 AM ⏱ 1 मिनट 👁 507 views
ट्रंप नए टैरिफ: सुप्रीम कोर्ट खारिज के बाद नई रणनीति
📷 aarpaarkhabar.com

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले लगाए गए टैरिफ को खारिज किए जाने के बाद, ट्रंप प्रशासन अब नए शुल्क लागू करने की तैयारी में जुट गया है। इस कदम से वैश्विक व्यापार व्यवस्था में बड़े बदलाव की संभावना है। भारत सहित कई देशों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

ट्रंप ने 24 फरवरी 2026 को अधिकांश देशों पर 10 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ लगाया था। यह फैसला 150 दिनों के लिए वैध था। लेकिन अब जब इस टैरिफ की समय सीमा खत्म होने वाली है, तो ट्रंप प्रशासन पहले ही से नई रणनीति तैयार कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई रणनीति पहले वाली योजना से कहीं अधिक आक्रामक हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और उसके बाद की स्थिति

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की कुछ टैरिफ नीतियों को असंवैधानिक करार दिया था। कोर्ट का मानना था कि राष्ट्रपति को व्यापार संबंधी नीतियां बनाने के लिए कांग्रेस की अनुमति लेनी चाहिए। इसके बाद ट्रंप ने 24 फरवरी को एक नई योजना का ऐलान किया, जिसमें वह अधिकांश देशों पर 10 प्रतिशत का एकमुश्त टैरिफ लगा रहे थे। इस टैरिफ को कानूनी चुनौती से बचाने के लिए ट्रंप ने विभिन्न कानूनी आधारों का सहारा लिया।

यह टैरिफ नीति 150 दिनों के लिए लागू की गई थी। इसका मतलब यह था कि यह नीति लगभग छह महीने के लिए वैध रहेगी। लेकिन ट्रंप प्रशासन इसके समाप्त होने से बहुत पहले ही अगली रणनीति पर काम करने लगा। व्हाइट हाउस के आंतरिक दस्तावेजों से पता चलता है कि ट्रंप की टीम नई और अधिक प्रभावी टैरिफ नीतियों की रूपरेखा तैयार कर चुकी है।

नई टैरिफ नीति की संभावित रूपरेखा

अमेरिकी मीडिया और व्यापार विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप की नई टैरिफ नीति देश के आधार पर अलग-अलग दरें निर्धारित कर सकती है। वर्तमान में जो 10 प्रतिशत की एकमुश्त दर लागू है, उसे हटाकर ट्रंप के प्रशासन चयनात्मक टैरिफ नीति अपना सकते हैं। चीन, भारत, मेक्सिको और यूरोपीय देशों के साथ व्यापारिक मतभेदों के आधार पर अलग-अलग दरें लागू की जा सकती हैं।

भारत को लेकर ट्रंप के प्रशासन की नीति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। भारत को सूचना प्रौद्योगिकी, दवाइयां, वस्त्र और कृषि उत्पादों के लिए उच्च टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है। भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों और दवा निर्माताओं पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। अमेरिकी बाजार में भारत की बढ़ती उपस्थिति को लेकर ट्रंप प्रशासन चिंतित दिख रहा है।

नई नीति में सीमा शुल्क के अलावा अन्य प्रतिबंधात्मक उपाय भी शामिल हो सकते हैं। आयात कोटा, विशेष लाइसेंसिंग और अन्य प्रशासनिक बाधाओं का सहारा लिया जा सकता है। यह सब कुछ कानूनी रूप से वैध दिखने के लिए सावधानी से तैयार किया जा रहा है।

वैश्विक व्यापार पर संभावित प्रभाव

नई टैरिफ नीति से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ने की संभावना है। अगर ट्रंप प्रशासन अपनी योजना को अमल में लाता है, तो विश्व व्यापार संगठन में विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है। कई देश अमेरिका के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

भारत के लिए यह विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। भारतीय निर्यातकों को अपने उत्पादों के मूल्य में कमी करनी पड़ सकती है, जिससे उनके लाभ में गिरावट आएगी। भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों को अपने अमेरिकी संचालन में कटौती करनी पड़ सकती है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा क्योंकि प्रौद्योगिकी क्षेत्र भारत की समृद्धि का एक प्रमुख स्रोत है।

भारतीय सरकार पहले ही से इस संभावित संकट के लिए तैयारी करने लगी है। विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय दोनों ही इस मुद्दे पर सक्रिय हैं। भारत अपनी पक्ष की बात अमेरिकी प्रशासन के सामने रखने के लिए द्विपक्षीय वार्ता के लिए तैयार है।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी अनिश्चितता की स्थिति पैदा हुई है। कई देशों के सूचकांकों में गिरावट देखी जा रही है। निवेशक अमेरिका की नीतियों को लेकर चिंतित हैं। डॉलर की कीमत में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।

ट्रंप की नई टैरिफ नीति को लेकर विश्व व्यापार विशेषज्ञ चिंतित हैं। उनका मानना है कि यह नीति संरक्षणवादी और विनाशकारी साबित हो सकती है। इससे एक व्यापार युद्ध शुरू हो सकता है, जिसमें कई देश एक-दूसरे के विरुद्ध प्रतिशोधी टैरिफ लगा सकते हैं। इस स्थिति में सभी पक्षों को नुकसान होगा।

वर्तमान समय में देशों को अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है, न कि व्यापार युद्ध शुरू करने की। लेकिन ट्रंप की नई नीति इसी दिशा में एक कदम दिख रही है। आने वाले महीनों में दुनिया को इस विवाद को लेकर और भी गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

सारांश में, ट्रंप प्रशासन एक नई और अधिक लक्षित टैरिफ नीति लागू करने की तैयारी कर रहा है। यह नीति देशों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। भारत समेत कई देशों को इससे नुकसान हो सकता है। वैश्विक व्यापार व्यवस्था में भारी उथल-पुथल की संभावना है। आने वाले समय में इस स्थिति पर बारीकी से निगरानी रखनी होगी।