🔴 ब्रेकिंग
TMC ऑफिस पर ताला: ममता के खिलाफ ऋतब्रत का विद्रोह|पुरानी झाड़ू हटाएं और बढ़ाएं बैंक बैलेंस|दिग्विजय सिंह राम मंदिर चंदा वापस लेंगे कोर्ट में|वैभव सूर्यवंशी का न्यू चैप्टर पोस्ट डेब्यू या सरप्राइज|शोहरत की कीमत: आलिया की ट्रोलिंग पर महेश भट्ट|उत्तर-पश्चिम भारत में तेज बारिश, मॉनसून अपडेट|मानसून में राजस्थान की 5 सबसे खूबसूरत जगहें|फ्रांस ने अमेरिका को दिया स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी गिफ्ट|राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई बैठक, इस्तीफों पर विचार|खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति का दर्द भरा रोना|TMC ऑफिस पर ताला: ममता के खिलाफ ऋतब्रत का विद्रोह|पुरानी झाड़ू हटाएं और बढ़ाएं बैंक बैलेंस|दिग्विजय सिंह राम मंदिर चंदा वापस लेंगे कोर्ट में|वैभव सूर्यवंशी का न्यू चैप्टर पोस्ट डेब्यू या सरप्राइज|शोहरत की कीमत: आलिया की ट्रोलिंग पर महेश भट्ट|उत्तर-पश्चिम भारत में तेज बारिश, मॉनसून अपडेट|मानसून में राजस्थान की 5 सबसे खूबसूरत जगहें|फ्रांस ने अमेरिका को दिया स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी गिफ्ट|राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई बैठक, इस्तीफों पर विचार|खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति का दर्द भरा रोना|
Tuesday, 14 July 2026
धर्म

नृसिंह जयंती 2026: पूजन मुहूर्त और पारण समय

author
Komal
संवाददाता
📅 30 April 2026, 6:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 291 views
नृसिंह जयंती 2026: पूजन मुहूर्त और पारण समय
📷 aarpaarkhabar.com

नृसिंह जयंती हर साल वैशाख महीने में बहुत ही धूमधाम से मनाई जाती है। यह दिन भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार को समर्पित होता है। नृसिंह अवतार विष्णु के दसों अवतारों में से एक सबसे महत्वपूर्ण और शक्तिशाली अवतार माना जाता है। इस वर्ष 2026 में नृसिंह जयंती का पर्व अत्यंत महत्व रखता है और इसे बड़ी आस्था के साथ मनाया जाएगा।

भगवान नृसिंह को शक्ति, पराक्रम और न्याय के देवता के रूप में जाना जाता है। उन्हें शत्रुओं के नाशक और अधर्म को समाप्त करने वाले के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने नृसिंह का अवतार लेकर अपने परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी। प्रह्लाद की भक्ति और समर्पण उस समय के दौरान असाधारण थी, जबकि उसके पिता हिरण्यकश्यप एक अत्याचारी दानव राजा थे।

हिरण्यकश्यप को विष्णु से बहुत नफरत थी और वह विष्णु के विरोध में लगातार कार्य कर रहा था। उसे वरदान था कि न तो कोई देवता उसे मार सकता है, न असुर, न इंसान, न पशु और न ही कोई अस्त्र। इसी अभिमान में चूर होकर वह अत्यंत दुराचारी हो गया था। परंतु भगवान विष्णु को प्रह्लाद की निष्ठा और भक्ति प्रिय थी। इसलिए भगवान विष्णु ने नृसिंह (आधा मनुष्य, आधा शेर) का रूप धारण किया और हिरण्यकश्यप का वध किया। यह घटना वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हुई थी।

नृसिंह अवतार का महत्व और धार्मिक उत्सव

नृसिंह जयंती का पर्व सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन से हम यह संदेश लेते हैं कि चाहे कितना भी अत्याचार हो, अत्याचारी को अवश्य ही दंड मिलता है। भगवान विष्णु स्वयं अवतार लेकर धर्म की रक्षा करते हैं और दुष्टों का संहार करते हैं। यह बात हमें सदा सत्य का पक्ष लेने और अन्याय का विरोध करने के लिए प्रेरित करती है।

नृसिंह जयंती के दिन भक्तजन मंदिरों में जाते हैं और भगवान नृसिंह की प्रतिमा के आगे दीप जलाते हैं। पूरे दिन व्रत रखने की परंपरा भी है। कई लोग संपूर्ण दिन उपवास करते हैं और भगवान को प्रसाद के रूप में खीर, पूरी और अन्य व्यंजन अर्पित करते हैं। मंदिरों में विशेष पूजन-अर्चन का आयोजन किया जाता है और भगवान नृसिंह के मंत्रों का जाप किया जाता है।

इस दिन मंत्रों में "ॐ नमो नारायणाय" और "नृसिंह कवचम्" का विशेष महत्व है। भक्तजन इन मंत्रों का पाठ करते हैं और भगवान से सुरक्षा और मार्गदर्शन की कामना करते हैं। नृसिंह जयंती पर भगवान के भक्त अपने घरों में भी छोटे-छोटे पूजन का आयोजन करते हैं और परिवार के साथ प्रसाद बांटते हैं।

पूजन का शुभ मुहूर्त और पारण समय

2026 में नृसिंह जयंती का पूजन सूर्योदय के समय से शुरू होता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन प्रातःकाल में ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटे पहले) में पूजन करना सबसे शुभ माना जाता है। यदि आप व्रत रख रहे हैं तो इसी समय आपको पूजन शुरू कर देना चाहिए।

पारण का समय आमतौर पर चतुर्दशी तिथि के समाप्त होने के बाद आता है। 2026 में पारण का समय स्थानीय समय के अनुसार निर्धारित होगा। सामान्यतः पारण दोपहर के बाद किया जाता है, लेकिन सटीक समय के लिए आपको अपने स्थान के पंचांग को देखना चाहिए या किसी पंडित से सलाह लेनी चाहिए।

व्रत के दौरान आप फल, दूध, दही और मेवे खा सकते हैं। कुछ लोग केवल दूध और फल पर ही रहते हैं, जबकि कुछ लोग पूरी तरह निर्जल व्रत रखते हैं। व्रत का नियम आपकी स्वास्थ्य स्थिति और क्षमता के अनुसार तय करना चाहिए।

नृसिंह जयंती की तैयारी और परंपराएं

नृसिंह जयंती की तैयारी कई दिन पहले से ही शुरू हो जाती है। घरों को साफ-सुथरा किया जाता है, रंगाई-पुताई की जाती है और मंदिरों को सजाया जाता है। बाजारों में विशेष रूप से पूजन की सामग्री बिकने लगती है। फूलों की मालाएं, धूप, दीप, अगरबत्ती और देवताओं की मूर्तियां खरीदी जाती हैं।

नृसिंह जयंती के दिन कई समुदायों में भंडारे का आयोजन किया जाता है। लोग गरीबों को भोजन देते हैं और दान-पुण्य करते हैं। यह परंपरा भगवान विष्णु के न्याय और करुणा के सिद्धांत को दर्शाती है। प्राचीन काल से ही नृसिंह जयंती के दिन समाज में एकता और भाईचारे की भावना को बढ़ावा दिया जाता रहा है।

इस पवित्र पर्व को मनाते हुए हम भगवान विष्णु की शक्ति को नमन करते हैं और उनसे प्रार्थना करते हैं कि हमारे जीवन में सदा धर्म, न्याय और सत्य का वास रहे। नृसिंह जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह हमारे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का एक महत्वपूर्ण अंग है।