सावन दुर्गाष्टमी 2026: पूजा मुहूर्त और विधि
सावन दुर्गाष्टमी आज मनाई जाएगी। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 8:19 से 10:35 बजे तक है। मां को चढ़ाएं लाल चुनरी और पुष्प।
सावन की दुर्गाष्टमी आज मनाई जाएगी
आगरा - सावन मास की मासिक दुर्गाष्टमी आज बहुत ही धूमधाम के साथ मनाई जा रही है। इस पवित्र दिन पर भक्तगण माता दुर्गा को अपनी श्रद्धा और भक्ति से पूजते हैं। माता दुर्गा को सशक्ति का रूप माना जाता है और उनकी पूजा हर महीने की अष्टमी को की जाती है। सावन का महीना माता के भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसी माह में विभिन्न देवताओं और देवियों की पूजा की परंपरा है।
दुर्गाष्टमी को मां शक्ति के रूप में पूजा जाता है। इसी दिन को महिषासुर मर्दिनी के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि माता दुर्गा ने इसी दिन महिषासुर नामक राक्षस का वध किया था। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। भारतीय संस्कृति और धर्मग्रंथों में माता दुर्गा की पूजा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
पूजा का शुभ मुहूर्त दो घंटे सोलह मिनट का
इस बार सावन दुर्गाष्टमी की पूजा के लिए सुबह के समय को सबसे ज्यादा शुभ माना गया है। धार्मिक गणना के अनुसार, पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह आठ बजकर उन्नीस मिनट से शुरू होकर दस बजकर पैंतीस मिनट तक रहेगा। कुल मिलाकर यह समय दो घंटे सोलह मिनट का है। इस समय को माता दुर्गा की पूजा के लिए सर्वोत्तम माना गया है। धार्मिक विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, इसी समय में माता का अभिषेक और पूजन किया जाना चाहिए।
इस मुहूर्त का विशेष महत्व है क्योंकि इसी समय देवता और देवियां धरती पर आती हैं और भक्तों की प्रार्थनाएं सुनती हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, इस समय ग्रहों की स्थिति भी अत्यंत अनुकूल होती है। इसलिए इस मुहूर्त में किई गई पूजा का फल सर्वोत्तम होता है। घर और मंदिरों में इसी समय माता की विशेष पूजा की जाती है।
पूजन की विधि और समर्पित वस्तुएं
माता दुर्गा को पूजन करते समय कई महत्वपूर्ण चीजों को अर्पित किया जाता है। सबसे पहले माता का अभिषेक किया जाता है जिसमें गंगा जल, दूध, दही और शहद का प्रयोग होता है। इसके बाद माता को लाल रंग की चुनरी चढ़ाई जाती है क्योंकि लाल रंग माता का सबसे प्रिय रंग माना जाता है।
लाल चुनरी के अलावा माता को विभिन्न प्रकार के पुष्प समर्पित किए जाते हैं। गुलाब, गेंदा, कमल और गुलदाउदी जैसे फूल माता को चढ़ाए जाते हैं। इसके अलावा सुहाग सामग्री जैसे मेहंदी, चूड़ी, बिंदी और सिंदूर भी माता को अर्पित की जाती है। माता के लिए हलवा-पूरी और काले चने का भोग तैयार किया जाता है जो प्रसाद के रूप में सभी भक्तों को दिया जाता है।
दुर्गा सप्तशती का पाठ भी इस दिन का एक महत्वपूर्ण अंग है। माता की कथा सुनने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति मिलती है। कई घरों में पूरी रात माता का जागरण किया जाता है और भजन-कीर्तन किया जाता है। घंटियों की आवाज़ और मंत्रों का जाप माता को प्रसन्न करता है।
माता दुर्गा की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। बुरी शक्तियों से रक्षा मिलती है और भय दूर होता है। माता का आशीर्वाद पाने के लिए भक्तों को पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ पूजा करनी चाहिए। सावन माह में माता की पूजा करने का विशेष महत्व है क्योंकि इस महीने में प्रकृति अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में होती है।
इस दुर्गाष्टमी पर सभी भक्तों को माता का आशीर्वाद मिले और वे सुख-समृद्धि का जीवन जिएं। माता दुर्गा की कृपा सभी पर रहे यह कामना है।




