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Saturday, 03 October 2026
स्वास्थ्य

भारत में ओरल कैंसर बढ़ रहा है ICMR चेतावनी

author
Komal
संवाददाता
📅 30 April 2026, 6:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 329 views
भारत में ओरल कैंसर बढ़ रहा है ICMR चेतावनी
📷 aarpaarkhabar.com

भारत में एक चिंताजनक स्वास्थ्य समस्या तेजी से बढ़ रही है। पुरुषों में मुंह का कैंसर, जिसे मेडिकल भाषा में ओरल कैंसर कहा जाता है, लगातार बढ़ रहा है। यह बात भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर ने अपने ताजा अध्ययन में सामने लाई है। दुनिया के अमीर और विकसित देशों में जहां यह कैंसर धीमा पड़ रहा है, वहीं भारत में इसका ग्राफ ऊपर जा रहा है। यह बात कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत में कैंसर से होने वाली कुल मौतों में मुंह के कैंसर का बड़ा हिस्सा है।

आईसीएमआर के शोधकर्ताओं ने अपने विस्तृत अध्ययन में यह पाया है कि भारत में तंबाकू का सेवन और मुंह के कैंसर के बीच सीधा संबंध है। तंबाकू के विभिन्न रूपों का उपयोग, चाहे वह पान मसाला हो, खैनी हो या सिगरेट हो, सभी मुंह के कैंसर के लिए जिम्मेदार हैं। भारत में तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों की संख्या विश्व में सबसे ज्यादा है। इसी वजह से मुंह का कैंसर भारत में एक गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या बन गया है।

तंबाकू और ओरल कैंसर का खतरनाक रिश्ता

भारत में तंबाकू का सेवन करने की परंपरा बहुत पुरानी है। पान, गुटखा, खैनी और सिगरेट जैसे तंबाकू उत्पादों का उपयोग लाखों भारतीय करते हैं। आईसीएमआर के अध्ययन में यह साफ किया गया है कि तंबाकू में मौजूद कार्सिनोजेनिक तत्व मुंह की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। ये तत्व धीरे-धीरे कोशिकाओं को खराब करते हैं और कैंसर का रूप ले लेते हैं।

पान मसाला और गुटखा के साथ तंबाकू का मिश्रण विशेष रूप से खतरनाक साबित हुआ है। जब कोई व्यक्ति नियमित रूप से इन उत्पादों का सेवन करता है तो उसके मुंह की भीतरी परत में जलन और सूजन आने लगती है। इसी सूजन और जलन से कैंसर की शुरुआत हो जाती है। गौरतलब है कि भारत में युवा आबादी भी इन उत्पादों का उपयोग तेजी से कर रही है, जिससे मुंह का कैंसर अब युवाओं में भी देखा जा रहा है।

आईसीएमआर की चेतावनी के अनुसार, तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों में मुंह का कैंसर होने का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में 50 गुना ज्यादा होता है। यह आंकड़ा अपने आप में चिंताजनक है। जो लोग गुटखा और पान मसाला का नियमित उपयोग करते हैं, उन्हें मुंह के कैंसर का खतरा बहुत ज्यादा होता है। शराब के साथ तंबाकू का सेवन खतरे को और भी बढ़ा देता है।

शुरुआती लक्षण को पहचानना बहुत जरूरी है

मुंह के कैंसर के शुरुआती लक्षणों को समझना और पहचानना बहुत जरूरी है। यदि समय पर इसे पहचान लिया जाए तो इलाज संभव है। आईसीएमआर के विशेषज्ञों ने कहा है कि मुंह में लगातार रहने वाली घाव, सफेद या लाल धब्बे, निगलने में कठिनाई और मुंह से अजीब गंध आना ये सब लक्षण हो सकते हैं।

यदि किसी को मुंह में किसी तरह की सूजन, जलन या दर्द दो हफ्ते से ज्यादा समय तक रहता है तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। जीभ, होंठ या गलती से मुंह के किसी भी हिस्से में अगर कोई अजीब परिवर्तन नजर आए तो देर न करके चिकित्सक से मिलना चाहिए। मुंह में सफेद या लाल पैच दिखाई देना विशेष रूप से चिंताजनक संकेत है।

जीवनशैली में सुधार ही समाधान है

आईसीएमआर ने अपनी चेतावनी में जीवनशैली में सुधार पर जोर दिया है। मुंह के कैंसर से बचने के लिए सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण बात है तंबाकू का सेवन पूरी तरह बंद करना। चाहे किसी भी रूप में हो, तंबाकू शरीर के लिए घातक है। गुटखा, पान मसाला, सिगरेट या किसी भी तंबाकू उत्पाद से दूर रहना चाहिए।

नियमित व्यायाम और स्वस्थ खान-पान भी मुंह के कैंसर से बचाव में मदद कर सकता है। ताजे फल और सब्जियों का सेवन करना चाहिए। शराब का सेवन कम से कम करना या पूरी तरह बंद करना चाहिए। मुंह की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। दिन में कम से कम दो बार दांत ब्रश करने चाहिए। दंत चिकित्सक के पास साल में कम से कम दो बार जांच करवानी चाहिए।

आईसीएमआर के अनुसार, 40 साल से ऊपर के सभी लोगों को साल में कम से कम एक बार मुंह की जांच करवानी चाहिए। जो लोग तंबाकू का उपयोग करते हैं, उन्हें और भी बार-बार जांच करवानी चाहिए। समय पर जांच से कैंसर को शुरुआती अवस्था में ही पकड़ा जा सकता है, जिससे इलाज आसान हो जाता है।

भारत सरकार को भी तंबाकू के विज्ञापन पर और भी कड़े प्रतिबंध लगाने चाहिए। युवाओं को तंबाकू के खतरों से अवगत कराने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम चलाने चाहिए। मुंह के कैंसर से बचाव केवल चिकित्सा की बात नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक दायित्व भी है। हर व्यक्ति को अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य के बारे में सचेत रहना चाहिए। आईसीएमआर की चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए सभी को तंबाकू से दूर रहने का प्रयास करना चाहिए।