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Saturday, 03 October 2026
अपराध

ईडी ने 81422 करोड़ की संपत्ति जब्त की, 94% दोष सिद्धि दर

author
Komal
संवाददाता
📅 02 May 2026, 5:30 AM ⏱ 1 मिनट 👁 322 views
ईडी ने 81422 करोड़ की संपत्ति जब्त की, 94% दोष सिद्धि दर
📷 aarpaarkhabar.com

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय ने देश में आर्थिक अपराधों के विरुद्ध अपनी कड़ी कार्रवाई जारी रखते हुए पिछले वर्ष 81,422 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की हैं। इसके साथ ही, ईडी की दोष सिद्धि दर 94 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो देश में आर्थिक अपराधों को लेकर कितनी गंभीर और सुव्यवस्थित कार्रवाई की जा रही है, इसका सबूत है।

प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक राहुल नवीन शर्मा ने इन आंकड़ों का खुलासा करते हुए कहा कि यह उपलब्धि संगठन की प्रतिबद्धता और कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने बताया कि ईडी ने इस वर्ष विशेष अदालतों में अपने मामलों में असाधारण सफलता दर हासिल की है। इस दर ने साफ संदेश दिया है कि आर्थिक अपराधों में लिप्त लोगों के लिए कानून की लंबी बांह अवश्यंभावी है।

आर्थिक अपराधों के विरुद्ध ईडी की मजबूत कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय भारत की आर्थिक सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। इस संगठन ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी कार्यक्षमता को काफी हद तक बढ़ाया है। काला धन, जालसाजी, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य आर्थिक अपराधों के खिलाफ ईडी की टीम निरंतर सतर्क रहती है।

81,422 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। यह रकम उन सभी अवैध कार्यकलापों से संबंधित है जिनमें नकली दस्तावेज़, भ्रष्टाचार, काला धन और विदेशी मुद्रा से संबंधित अपराध शामिल हैं। इन जब्ती की गई संपत्तियों में बैंक खातों में जमा रकम, रियल एस्टेट संपत्तियां, सोना, चांदी और अन्य मूल्यवान सामग्रियां शामिल हैं।

ईडी के अनुसार, आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए उन्होंने अपनी तकनीकी क्षमता को भी काफी हद तक बढ़ाया है। डिजिटल फोरेंसिक्स, साइबर इंटेलिजेंस और अन्य आधुनिक तरीकों का उपयोग करके ईडी आर्थिक अपराधियों के जाल को पकड़ने में सफल हो रहा है।

दोष सिद्धि दर में 94 प्रतिशत की उपलब्धि

विशेष अदालतों में ईडी की 94 प्रतिशत दोष सिद्धि दर एक असाधारण सफलता है। यह दर साफ संकेत देती है कि ईडी द्वारा किए गए अन्वेषण और एकत्र किए गए साक्ष्य कितने मजबूत होते हैं। इस उच्च दोष सिद्धि दर का अर्थ यह है कि ईडी पर लगाए गए आरोपों में अधिकांश मामले अदालत में सिद्ध हो जाते हैं।

राहुल नवीन शर्मा के अनुसार, यह उच्च दर संभव हुई है क्योंकि ईडी के कानूनी विभाग ने मामलों को बेहद सावधानी और व्यावसायिकता से संभाला है। प्रत्येक मामले में विशेषज्ञ कानूनी सलाहकार नियुक्त किए गए हैं जो अदालत में मजबूत पक्ष रखते हैं।

दोष सिद्धि की यह दर न केवल ईडी की सक्षमता को दर्शाती है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि आर्थिक अपराध करने वाले लोगों के लिए पकड़े जाने की संभावना बहुत अधिक है। इससे संभावित अपराधियों को अवैध कार्यकलापों से दूर रहने के लिए प्रेरणा मिलती है।

कुल दर्ज मामलों में सीमित अंतिम निर्णय

हालांकि, ईडी की इन असाधारण आंकड़ों के बीच एक चिंता का विषय भी है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज कुल मामलों का केवल एक छोटा हिस्सा ही अंतिम निर्णय तक पहुंच पाया है। इस वर्ष 31 मार्च तक, विभिन्न विशेष अदालतों द्वारा केवल लगभग 60 मामलों का ही पूर्ण निपटारा किया गया है।

यह स्थिति कई कारणों से उत्पन्न हुई है। सबसे पहले, भारतीय न्यायिक व्यवस्था में मामलों के निपटारे में काफी समय लग जाता है। विशेष अदालतें भी अक्सर कार्यभार से जूझती रहती हैं। दूसरा, जटिल आर्थिक अपराधों में साक्ष्य एकत्र करना और उन्हें अदालत में सिद्ध करना एक लंबी प्रक्रिया है।

इसके बावजूद, ईडी ने अपने अन्वेषण कार्यों को तेजी से संचालित करने के लिए अपने अंदरूनी कार्य प्रणाली को सुधारा है। संगठन के भीतर एक विशेष सेल बनाया गया है जो केवल अदालती मामलों की निगरानी करता है और सुनिश्चित करता है कि मामले समय पर सुनवाई के लिए तैयार रहें।

प्रवर्तन निदेशालय की इस तरह की कड़ी कार्रवाई भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आर्थिक अपराधों पर नियंत्रण रखने से न केवल सार्वजनिक धन की सुरक्षा होती है, बल्कि यह भी सुनिश्चित होता है कि नियमित नागरिकों और व्यवसायों के लिए खेल का मैदान समान रहे।

आने वाले समय में, ईडी को अपने विशेषज्ञ दल को और भी मजबूत करना होगा, विशेष अदालतों के साथ समन्वय बढ़ाना होगा और तकनीकी संसाधनों में निवेश जारी रखना होगा। केवल तभी भारत में आर्थिक अपराधों पर पूर्ण नियंत्रण संभव होगा और एक स्वच्छ तथा पारदर्शी आर्थिक व्यवस्था की स्थापना हो सकेगी।