लेबनान पर इजरायल की एयरस्ट्राइक, 5 की मौत
लेबनान पर इजरायल की सैन्य कार्रवाई फिर से सुर्खियों में आ गई है। इस बार इजरायली सेना ने लेबनान के विभिन्न इलाकों पर तेज हमले किए हैं, जिसमें एक सैनिक समेत कुल पांच लोगों की मृत्यु हुई है। यह घटना दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है।
इजरायल और लेबनान स्थित हिज़्बुल्लाह संगठन के बीच सशस्त्र संघर्ष लंबे समय से चल रहा है। इस बार की एयरस्ट्राइक में कई इमारतें ध्वस्त हो गई हैं और भारी जन-धन की हानि हुई है। स्थानीय निवासियों में भय और असुरक्षा की भावना व्याप्त है।
इजरायल-हिज़्बुल्लाह संघर्ष की पृष्ठभूमि
इजरायल और हिज़्बुल्लाह के बीच का संघर्ष दशकों पुराना है। मार्च 2024 में यह संघर्ष एक नए मोड़ पर पहुंचा जब ईरान ने इजरायल पर हमले किए। इसके ठीक दो दिन बाद, हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी इजरायल की ओर सैकड़ों रॉकेट दागे। यह कदम एक बड़ी पराजय थी और इसके कारण इजरायली सरकार ने तुरंत प्रतिक्रिया व्यक्त की।
इजरायली सेना ने बदले में लेबनान पर भीषण हमले शुरू कर दिए। ये हमले केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि आवासीय इलाकों और नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया गया। इसके परिणामस्वरूप लेबनान में हजारों लोगों की जान चली गई है।
हाल की एयरस्ट्राइक और उसके परिणाम
हाल ही में हुई इजरायली एयरस्ट्राइक लेबनान के कई क्षेत्रों में की गई। बेरूत शहर के आसपास के इलाकों में भी जबरदस्त बमबारी हुई। लेबनानी सुरक्षा बलों ने कहा है कि इस हमले में एक सैनिक सहित पांच लोगों की मृत्यु हुई है। कई अन्य लोग घायल हुए हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, इजरायली सेना ने बहु-मंजिला इमारतों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया। हजारों परिवार अपने घरों से विस्थापित हुए हैं। बेरूत के कई इलाके पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं। लोगों के पास खान-पान, दवाई और आश्रय के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं।
रेड क्रेसेंट और अंतर्राष्ट्रीय मानवीय संगठन लेबनान में राहत कार्य में जुटे हुए हैं। लेकिन युद्ध के कारण मानवीय सहायता पहुंचाना बेहद मुश्किल हो गया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव इतना अधिक है कि विदेशी मदद वाली एजेंसियों को भी सावधानी बरतनी पड़ रही है।
संघर्षविराम और वर्तमान स्थिति
लेबनान और इजरायल के बीच एक संघर्षविराम घोषित किया गया था। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र, इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए प्रयास कर रहा था। लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। दोनों पक्ष छोटे-मोटे हमले जारी रखे हुए हैं।
हिज़्बुल्लाह कहता है कि वह ईरानी हितों की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ रहा है। दूसरी ओर, इजरायल कहता है कि वह अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई कर रहा है। लेकिन इस सब के बीच सबसे ज्यादा पीड़ित आम लेबनानी नागरिक हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, लेबनान में वर्तमान संघर्ष से एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हुआ है। हजारों बच्चे विस्थापित हुए हैं। शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ गई है। आर्थिक तंगी से देश जूझ रहा है।
लेबनान की सरकार कमजोर है और इसमें आंतरिक विभाजन भी हैं। इसलिए वह इजरायली दबाव का प्रभावी तरीके से विरोध नहीं कर पा रही है। प्रांतीय शक्तियां और हिज़्बुल्लाह का प्रभाव लेबनानी राज्य से अधिक मजबूत है।
अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में भी यह मुद्दा काफी संवेदनशील है। अमेरिका इजरायल का समर्थन कर रहा है, जबकि ईरान और रूस लेबनान के पक्ष में हैं। इसके कारण समस्या का कोई स्थायी समाधान निकलता नहीं दिख रहा है।
कुल मिलाकर, लेबनान की स्थिति दिनों-दिन खराब हो रही है। मानवीय आपदा का संकट गहराता जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इस संघर्ष को तुरंत समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। लेबनानी जनता को शांति और सुरक्षा की जरूरत है।




