दूसरा बड़ा मंगल 2026: हनुमान पूजन मुहूर्त और विधि
दूसरा बड़ा मंगल और पंचक का साए का संयोग
हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष का दूसरा बड़ा मंगल आज का दिन है। इस शुभ अवसर पर पंचक का साए के साथ एक विशेष संयोग बन रहा है जो धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। बड़ा मंगल वह दिन होता है जब मंगलवार को मंगल ग्रह की स्थिति विशेष रूप से शुभ हो जाती है। हिंदू धर्म में मंगलवार को ही बजरंगबली हनुमान जी को समर्पित दिन माना जाता है।
पंचक का मतलब है पांच दिनों का एक विशेष समय जब विभिन्न प्रकार के धार्मिक कार्यों के लिए सावधानी बरतनी पड़ती है। लेकिन दूसरे बड़े मंगल पर पंचक का साए का संयोग इसे और भी खास बना देता है। इस दिन को बजरंगबली के आशीर्वाद प्राप्त करने का सबसे उत्तम समय माना जाता है। भक्तों की मान्यता है कि इसी दिन हनुमान जी की पूजा करने से उनका आशीर्वाद सीधा प्राप्त होता है और सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।
आधुनिक समय में जब लोग अनेक समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तब ऐसे शुभ दिनों का महत्व और भी बढ़ जाता है। घर-परिवार की शांति, व्यावसायिक सफलता, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए लोग बजरंगबली की शरण लेते हैं। कहा जाता है कि हनुमान जी की भक्ति से न केवल शारीरिक बल बढ़ता है, बल्कि मानसिक शक्ति भी प्राप्त होती है।
हनुमान जी के पूजन का शुभ मुहूर्त
इस दूसरे बड़े मंगल पर हनुमान जी की पूजा के लिए निर्धारित समय बेहद महत्वपूर्ण है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्योदय के समय से ही इस दिन की पूजा का महत्व शुरू हो जाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करने के बाद हनुमान जी के मंदिर में जाना चाहिए। यदि घर पर ही पूजा करनी हो तो घर के पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।
प्रातः काल का समय सबसे शुभ माना जाता है। इसी समय में मन की शुद्धता और एकाग्रता सबसे ज्यादा रहती है। हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए भी प्रातः काल सर्वोत्तम है। कई धार्मिक विद्वान सलाह देते हैं कि हनुमान जी की पूजा सूर्योदय के बाद और दोपहर बारह बजे से पहले पूरी कर लेनी चाहिए। इसके अलावा संध्या के समय भी पूजा की जा सकती है, लेकिन प्रातः काल का समय सबसे उत्तम माना जाता है।
यह ध्यान देना जरूरी है कि पूजा से पहले स्नान कर शुद्ध और पवित्र होकर ही पूजा स्थल पर जाएं। हनुमान जी को लाल रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए लाल फूल, लाल कपड़े और लाल मिठाई का प्रयोग करना चाहिए। तेल का दीपक जलाना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। घर में चूल्हे की आग से भी लैंप जला सकते हैं, जो परंपरा के अनुरूप होता है।
पूजन की विधि, मंत्र और नियम
हनुमान जी की पूजा करते समय कुछ विशेष विधियों और नियमों का पालन करना चाहिए। सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करें और वहां कुछ फूल या हरी घास बिछाएं। फिर हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर को रखें और उसके सामने दीपक जलाएं। गंध, फूल, फल और प्रसाद को भी सजाएं।
पूजा शुरू करने से पहले गणेश जी को प्रणाम करना चाहिए क्योंकि वे सभी कार्यों के सिद्धि दाता हैं। इसके बाद सूर्य को नमस्कार करें और फिर हनुमान जी को। हनुमान चालीसा का पाठ करना सबसे महत्वपूर्ण है। यह चालीसा हनुमान जी की महिमा का वर्णन करती है और इसके पाठ से अंतः करण में शुद्धता आती है।
सबसे महत्वपूर्ण मंत्र है - "ॐ हं हनुमते नमः"। इस मंत्र का जप करने से हनुमान जी का आशीर्वाद मिलता है। एक और प्रसिद्ध मंत्र है - "बजरंग बली आओ मेरे घर में, सब दुख दूर करो तुम घर में"। इन मंत्रों का जप करते समय मन को पूरी तरह एकाग्र रखना चाहिए।
पूजा के दौरान कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना अत्यावश्यक है। सबसे पहले, मंदिर या पूजा स्थल पर जाते समय पवित्रता का ध्यान रखें। दूसरा, किसी को गलत भाषा या क्रोधपूर्ण व्यवहार न करें। तीसरा, झूठ न बोलें और किसी को ठेस न पहुंचाएं। चौथा, दिन भर निरामिषी भोजन करें या कम से कम पूजा के दिन मांसाहार से दूर रहें।
पूजा के बाद प्रसाद का वितरण करना चाहिए और उसे सभी को खिलाना चाहिए। घर के बड़े-बुजुर्गों को सबसे पहले प्रसाद दिया जाता है। हनुमान जी को हलवा-पूरी का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है। कई लोग गुड़ और आटे का प्रसाद भी तैयार करते हैं। पूजा के बाद आरती करना भी महत्वपूर्ण है।
इस दूसरे बड़े मंगल पर यदि आप सच्चे मन से हनुमान जी की पूजा करते हैं, तो निश्चित रूप से आपके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। बजरंगबली की महिमा अपरंपार है और वे अपने सभी भक्तों की सुनते हैं। इसलिए इस शुभ दिन पर पूरे मन और विश्वास के साथ पूजा करें और हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त करें।




