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Wednesday, 10 June 2026
धर्म

शनि जयंती 2026: पूजा मुहूर्त, विधि और साढ़ेसाती से मुक्ति

author
Komal
संवाददाता
📅 16 May 2026, 6:15 AM ⏱ 1 मिनट 👁 476 views
शनि जयंती 2026: पूजा मुहूर्त, विधि और साढ़ेसाती से मुक्ति
📷 aarpaarkhabar.com

शनि जयंती का पर्व प्रति वर्ष वैशाख महीने की कृष्ण पक्ष में मनाया जाता है। इस साल सोलह मई को शनि जयंती मनाई जा रही है। माना जाता है कि इसी दिन कर्मफल के देवता शनिदेव का जन्म हुआ था। शनि ग्रह हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली ग्रह माने जाते हैं। इनके बारे में कहा जाता है कि ये व्यक्ति के कर्मों का फल प्रदान करते हैं। शनि जयंती का दिन भक्तों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसी दिन शनिदेव को प्रसन्न करके व्यक्ति अपनी सारी बाधाओं से मुक्त हो सकता है।

इस वर्ष शनि जयंती पर कई शुभ योग बन रहे हैं। ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन विशेष पूजा और अनुष्ठान करने से व्यक्ति को असाधारण लाभ मिल सकते हैं। साढ़ेसाती और ढैय्या की अवधि में पीड़ित लोगों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। शनि जयंती पर किए गए पूजन और दान से व्यक्ति को शनिदेव की कृपा मिलती है और उनकी नकारात्मक ऊर्जा से बचा जा सकता है।

शनि जयंती पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

शनि जयंती की पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त सूर्योदय के समय माना जाता है। इस दिन सूर्य के निकलने के साथ ही पूजा शुरू कर देनी चाहिए। पारंपरिक रीति के अनुसार, शनि जयंती पर तेल का दीपक जलाना विशेष महत्व रखता है। शनिदेव को तेल बेहद प्रिय है, इसलिए घी या तेल के दीपक से पूजा करने से शनिदेव तुरंत प्रसन्न हो जाते हैं।

पूजा की विधि सरल है। सबसे पहले व्यक्ति को एक स्वच्छ स्थान पर शनिदेव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करनी चाहिए। उसके बाद फूलों से पूजा शुरू करें। शनिदेव को नीले रंग के फूल बेहद पसंद हैं। काले और नीले फूलों का उपयोग करना सबसे उत्तम माना जाता है। इसके बाद भोग के रूप में तेल, उड़द की दाल, काली तिल और गुड़ का प्रसाद अर्पित करना चाहिए।

पूजा के दौरान शनि मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी होता है। सबसे प्रभावी मंत्र है - "ॐ शं शनैश्चराय नमः"। इस मंत्र को कम से कम 108 बार जपना चाहिए। इसके अलावा, शनि चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है। शनि जयंती पर व्रत भी रखा जाता है। इस दिन व्रत रखने वाले को विशेष लाभ मिलता है और वह शनिदेव की नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षित रहता है।

साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति के अचूक उपाय

साढ़ेसाती और ढैय्या शनि की सबसे भयानक दशा मानी जाती है। साढ़ेसाती साढ़े सात वर्ष की अवधि को कहते हैं जब शनि किसी जातक के जन्म चक्र के एक निश्चित बिंदु से गुजरते हैं। इसी तरह, ढैय्या दो और आधे वर्ष की अवधि को कहते हैं जो साढ़ेसाती से पहले आती है। इन दोनों अवधियों में व्यक्ति को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

शनि जयंती पर साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति के लिए विशेष उपाय किए जा सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण उपाय है तेल का दान। शनिदेव को तेल अर्पित करना उनके सबसे प्रिय कार्यों में से एक है। शनि जयंती पर काले तिल के तेल का दान करने से शनिदेव की कृपा मिलती है। इस तेल को किसी मंदिर में दीपक के लिए दान किया जा सकता है या किसी दरिद्र व्यक्ति को दिया जा सकता है।

दूसरा महत्वपूर्ण उपाय है काली वस्तुओं का दान। शनिदेव को काला रंग प्रिय है, इसलिए काली दाल, काला कपड़ा, काली गाय या गाय के गोबर का दान भी लाभकारी होता है। शनि जयंती पर इन वस्तुओं को दान करने से व्यक्ति को अलौकिक लाभ मिलता है। तीसरा उपाय है लोहे के बर्तन में तेल रखना और उसे जरूरतमंद लोगों को दान करना। शनि लोहे के स्वामी भी माने जाते हैं, इसलिए लोहे का उपयोग भी महत्वपूर्ण है।

शनि जयंती पर दान और पूजन की सूची

शनि जयंती पर सही दान करने से व्यक्ति को शनिदेव की कृपा मिलती है और उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। पहला और सबसे महत्वपूर्ण दान है तेल का दान। काले तिल का तेल, सरसों का तेल या नारियल का तेल दान किया जा सकता है। दूसरा दान है काली दाल का दान। उड़द की दाल को शनिदेव को अर्पित करके किसी जरूरतमंद को दिया जा सकता है।

तीसरा दान है काला कपड़ा दान करना। शनि जयंती पर किसी गरीब व्यक्ति को काला कपड़ा देना बेहद लाभकारी होता है। चौथा दान है आयरन की वस्तुओं का दान। लोहे की कड़ी, कांटे या अन्य आयरन की वस्तुओं का दान भी किया जा सकता है। पांचवां दान है नमक का दान। कुछ लोग शनि जयंती पर नमक का दान करते हैं जो भी शुभ फल देता है।

पूजा के समय गुड़ और काली तिल का प्रसाद अवश्य बनाया जाए। इसे परिवार के सभी सदस्यों को खिलाया जाए और कुछ हिस्सा किसी जरूरतमंद को दिया जाए। शनि जयंती पर मंदिर जाकर शनिदेव को प्रणाम करना भी महत्वपूर्ण है। यदि किसी को साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है तो वह इस दिन विशेष पूजा करवा सकता है।

शनि जयंती का पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का एक माध्यम है। सही विधि से पूजा करने और उचित दान करने से व्यक्ति को शनिदेव की कृपा मिलती है और उसके जीवन में खुशहाली आती है। इसलिए शनि जयंती को बेहद महत्व के साथ मनाया जाना चाहिए और सभी परंपराओं का पालन करते हुए पूजा की जानी चाहिए।