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Sunday, 05 July 2026
समाचार

पुरुषोत्तम मास 2026: नियम, वर्जन और महत्व

author
Komal
संवाददाता
📅 17 May 2026, 7:30 AM ⏱ 1 मिनट 👁 523 views
पुरुषोत्तम मास 2026: नियम, वर्जन और महत्व
📷 aarpaarkhabar.com

पुरुषोत्तम मास की शुरुआत हो चुकी है और यह पवित्र महीना 15 जून तक चलेगा। यह वह समय है जब हिंदू धर्म के अनुयायियों को अपने आचरण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इस महीने को हिंदू पंचांग में अधिक मास भी कहा जाता है। आइए जानते हैं कि इस पवित्र अवधि में कौन से काम करने चाहिए और कौन से बिल्कुल नहीं करने चाहिए।

पुरुषोत्तम मास क्या है और इसका महत्व

पुरुषोत्तम मास हिंदू पंचांग का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। प्रत्येक तीन साल में एक बार यह अतिरिक्त महीना आता है। इसे अधिक मास या मलमास भी कहते हैं। हिंदू ज्योतिष के अनुसार, सूर्य और चंद्रमा की गति में अंतर को दूर करने के लिए यह महीना जोड़ा जाता है। इसलिए इसे पवित्र माना जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी महीने को भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। कहा जाता है कि इस महीने में जो भी धार्मिक कार्य किए जाते हैं, उनका फल कई गुना बढ़ जाता है। इसी वजह से इसे आध्यात्मिक उन्नति का सबसे उत्तम समय माना जाता है। महर्षि पाराशर ने भी इस महीने को सर्वश्रेष्ठ बताया है।

पुरुषोत्तम मास में वर्जित कार्य और निषेध

इस पवित्र महीने में कई ऐसे काम हैं जिन्हें बिल्कुल नहीं करना चाहिए। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, इन कार्यों को करने से व्यक्ति को पाप लगता है और उसके भाग्य पर बुरा असर पड़ता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस महीने में कोई नया विवाह नहीं करना चाहिए। शास्त्रों में विवाह को पुरुषोत्तम मास में अशुभ माना गया है। इसके अलावा किसी की नई नियुक्ति के समारोह भी इस महीने में नहीं करने चाहिए। गृह प्रवेश भी इस समय वर्जित है।

यात्रा पर जाना भी इस महीने में उचित नहीं माना जाता है, खासकर लंबी यात्रा। अगर कोई जरूरी काम हो तो किसी विद्वान से सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा किसी को गुस्सा करना, झूठ बोलना, चोरी करना और किसी को गाली देना भी सख्त वर्जित है।

व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखें तो इस महीने में नए बिजनेस की शुरुआत भी नहीं करनी चाहिए। नई चीजें खरीदना भी अनुचित माना जाता है। अगर जरूरी हो तो किसी मुहूर्त विशेषज्ञ से पूछ लेना चाहिए।

पुरुषोत्तम मास में करने योग्य कार्य और अनुष्ठान

जहां इस महीने में कई काम वर्जित हैं, वहीं कई ऐसे काम हैं जिन्हें करने से बहुत पुण्य मिलता है। यह महीना आध्यात्मिक विकास के लिए सर्वोत्तम है।

इस महीने में भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण की पूजा विशेष महत्व रखती है। महाभारत के अनुसार, इसी महीने में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इसलिए इस महीने में कृष्ण नाम जप करना अत्यंत शुभ फल देता है। "हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे" - यह मंत्र इस महीने में जपने से विशेष लाभ मिलता है।

नियमित पूजा-पाठ करना इस महीने का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। घर में रोज दीपक जलाना और भगवान को भोग लगाना भी उत्तम माना जाता है। पवित्र ग्रंथों का पाठ करना, विशेषकर भगवद्गीता का पाठ करना अत्यंत फलदायक है।

दान देना भी इस महीने में विशेष महत्व रखता है। गरीबों को अन्न, वस्त्र और पैसे का दान देने से कई गुना पुण्य मिलता है। व्रत रखना भी इस महीने में शुभ माना जाता है। अगर पूरे महीने का व्रत न भी रख सकें तो कम से कम सोमवार और शुक्रवार को व्रत रखना चाहिए।

मंदिरों में सेवा करना, फूलों से पूजा करना, और भगवान की आरती में शामिल होना भी इस महीने की विशेषता है। आत्मचिंतन और ध्यान-मेडिटेशन को भी इस समय महत्व दिया जाता है।

निष्कर्ष

पुरुषोत्तम मास एक ऐसा समय है जब हर हिंदू को अपने आचरण और कर्मों पर ध्यान देना चाहिए। इस महीने में किए गए धार्मिक कार्य अत्यंत फलदायक होते हैं। वर्जित कार्यों से बचकर, धार्मिक कार्यों को करके आप अपनी आत्मा का उत्थान कर सकते हैं। याद रखें कि यह समय सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक विकास का भी है। इस पावन महीने का सदुपयोग करें और अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाएं।