337 करोड़ चढ़ावा फिर भी मंदिर का हाल बेहाल
चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित श्री सांवलिया सेठ मंदिर को लेकर हाल ही में एक विवादास्पद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस वीडियो में मंदिर परिसर की दशा को लेकर भक्तों और आम जनता में काफी गुस्सा देखने को मिल रहा है। मंदिर प्रबंधन के पास 337 करोड़ रुपए का विशाल फंड होने के बावजूद मंदिर परिसर की जमीन पूरी तरह से उजड़ी हुई स्थिति में है। राजस्थान की भीषण गर्मी में यह जमीन अंगारों की तरह तप रही है, जिससे मंदिर आने वाले भक्तों को असहनीय पीड़ा झेलनी पड़ रही है।
वीडियो में दिखाई दे रहे दृश्य काफी विचलित करने वाले हैं। छोटे-छोटे बच्चे अपने पैरों को जलाते हुए रोते हुए दिख रहे हैं। महिलाएं और बुजुर्ग लोग भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं। गर्मी इतनी तेज है कि मंदिर परिसर का फर्श कोयले की तरह काला पड़ गया है और उससे निकलने वाली गर्मी से लोग बेहाल हो रहे हैं। कुछ जगहों पर तो जमीन इतनी गर्म है कि उस पर खड़े होना मुश्किल हो गया है।
मंदिर के बड़े फंड के बावजूद बुनियादी सुविधाएं नहीं
श्री सांवलिया सेठ मंदिर राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। इस मंदिर को हर साल लाखों रुपए का चढ़ावा मिलता है। गत वर्षों में यह फंड 337 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। ऐसी स्थिति में किसी को भी यह उम्मीद होगी कि मंदिर परिसर में सभी बुनियादी सुविधाएं होंगी। लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है।
मंदिर प्रबंधन ने न तो मंदिर परिसर में कोई छत लगाई है और न ही कोई ऐसी व्यवस्था की है जो भक्तों को गर्मी से बचा सके। गर्मी के मौसम में जब तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है, तब मंदिर परिसर एक भट्ठी बन जाता है। ऐसी परिस्थिति में बुजुर्ग और बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
मंदिर प्रबंधन के पास इतना बड़ा फंड है कि वह आसानी से परिसर में एक आधुनिक छत प्रणाली लगवा सकता है। इसके अलावा वह पानी की ठंडी सुविधाएं, शेडिंग और अन्य सुविधाएं भी दे सकता है। लेकिन इन सब चीजों के लिए कोई ठोस प्रयास दिख नहीं रहा है। यह बहुत ही चिंताजनक बात है कि चढ़ावे के पैसे का सदुपयोग नहीं हो रहा है।
भक्तों का गुस्सा और सवाल
मंदिर परिसर की इस दुर्दशा को लेकर भक्तों में काफी गुस्सा है। सोशल मीडिया पर लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर यह विशाल फंड कहां खर्च हो रहा है। क्या मंदिर प्रबंधन भक्तों की सुविधा को लेकर कोई चिंता ही नहीं करता? लोगों का कहना है कि यदि मंदिर में बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, तो फिर इतने बड़े फंड का क्या उपयोग है।
कई भक्त तो यह भी कह रहे हैं कि वे मंदिर में जाने से पहले सोच समझ लेते हैं क्योंकि परिसर में इतनी गर्मी है कि बीमार पड़ जाने का खतरा रहता है। बुजुर्ग लोग तो मंदिर दर्शन करने जाना ही टाल देते हैं। गर्भवती महिलाओं को भी परिसर में जाने में कठिनाई होती है। ऐसी स्थिति में सवाल यह उठता है कि क्या धर्मस्थल भक्तों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन गया है।
प्रबंधन को जवाबदेही का सामना करना चाहिए
इस पूरे मामले में मंदिर प्रबंधन को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्हें यह बताना चाहिए कि 337 करोड़ रुपए का यह विशाल फंड कहां खर्च हो रहा है। यदि भक्तों के दान का पैसा है, तो इसका उपयोग भक्तों की सुविधा के लिए ही होना चाहिए न कि कहीं और।
मंदिर प्रबंधन को तुरंत कदम उठाने चाहिए। उन्हें परिसर में छत, पंखे, पानी की व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाएं लगानी चाहिए। राजस्थान की गर्मी में भक्तों की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि मंदिर के पास इतने सारे पैसे हैं, तो उन्हें भक्तों के लिए एक आरामदायक वातावरण बनाना चाहिए।
यह वीडियो इस बात का प्रमाण है कि धन की उपलब्धता से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका सदुपयोग है। मंदिर प्रबंधन को यह समझना चाहिए कि धर्मस्थल केवल पूजा करने की जगह नहीं, बल्कि शांति और सुख का केंद्र होना चाहिए। भक्तों को मंदिर जाते समय परेशानी का सामना नहीं करना चाहिए। उम्मीद है कि मंदिर प्रबंधन इस मामले को गंभीरता से लेगा और जल्द से जल्द आवश्यक सुधार के कदम उठाएगा।




