तीसरा बड़ा मंगल: पूजा के शुभ मुहूर्त और विधि
ज्येष्ठ माह का आगमन हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी माह में आने वाला तीसरा बड़ा मंगल यानी 19 मई को भगवान हनुमान जी की विशेष पूजा का दिन है। इस दिन को बढ़वा मंगल भी कहा जाता है क्योंकि इसी दिन हनुमानजी के वृद्ध स्वरूप की पूजा का विशेष विधान शास्त्रों में बताया गया है। आइए जानते हैं कि इस पावन दिन पर हनुमान जी की पूजा कैसे करें और कौन से पांच शुभ मुहूर्त रहेंगे।
ज्येष्ठ मास में हनुमान जी की पूजा का महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास को बेहद शुभ माना जाता है। इसी महीने में आने वाले मंगलवार को विशेष महत्व दिया जाता है। कहा जाता है कि ज्येष्ठ मास में हनुमानजी के वृद्ध स्वरूप की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। बहुत से भक्त इस दिन को व्रत भी रखते हैं और हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं।
ज्येष्ठ मास ग्रीष्म ऋतु का अंतिम महीना होता है। इसी समय गर्मी अपने शिखर पर होती है। ऐसे में माना जाता है कि हनुमानजी की पूजा से शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। हनुमान जी को बलिष्ठ देवता माना जाता है। उनकी शक्ति, साहस और भक्ति की गाथाएं पूरे भारत में प्रसिद्ध हैं। इसलिए हर मंगलवार को हनुमान जी की पूजा की जाती है, लेकिन ज्येष्ठ मास का मंगल विशेष महत्व रखता है।
इस दिन को बढ़वा मंगल कहने का कारण यह है कि इस दिन हनुमानजी के परिपक्व और अनुभवी स्वरूप की पूजा की जाती है। बढ़ती उम्र में भी हनुमान जी की शक्ति और समर्पण कम नहीं होते। इसलिए वृद्ध स्वरूप में भी उनकी पूजा का विधान है। यह दिन उन लोगों के लिए खास है जो जीवन के किसी भी चरण में सफलता और शक्ति चाहते हैं।
तीसरे बड़े मंगल पर पूजा के पांच शुभ मुहूर्त
19 मई को तीसरे बड़े मंगल पर पूजा के लिए पांच शुभ मुहूर्त रहेंगे। इन मुहूर्तों में से किसी भी समय आप हनुमान जी की पूजा कर सकते हैं। सही मुहूर्त में पूजा करने से देवताओं का आशीर्वाद जल्दी मिलता है और पूजा का फल अधिक प्रभावी होता है।
पहला शुभ मुहूर्त: प्रातःकाल सूर्योदय के समय से लेकर दोपहर तक। इस समय पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है। घर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसी समय हनुमान चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है।
दूसरा शुभ मुहूर्त: दोपहर 12:30 से शाम 3:30 तक का समय। इस समय भी पूजा का विशेष महत्व है। बहुत से लोग इसी समय अपने घर के पूजा घर में दीपक जलाते हैं।
तीसरा शुभ मुहूर्त: शाम 3:30 से शाम 5:00 तक। यह समय संध्या काल कहलाता है। इस समय गंगा जल से हनुमान जी को नहलाना और पूजा करना शुभ माना जाता है।
चौथा शुभ मुहूर्त: शाम 5:00 से रात 7:00 तक। इस समय घर में दीपक जलाकर हनुमान जी को भोग लगाया जा सकता है। परिवार के सभी सदस्य मिलकर प्रार्थना कर सकते हैं।
पांचवां शुभ मुहूर्त: रात 7:00 से 8:30 तक। रात की शांति में हनुमान जी की पूजा विशेष फल देती है। इसी समय हनुमान आरती भी की जा सकती है।
हनुमान जी की पूजा विधि और नियम
हनुमान जी की पूजा करने के लिए कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है। पहले घर को अच्छी तरह साफ कर लें। पूजा के स्थान को विशेष रूप से शुद्ध करें। हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर को उत्तर या पूर्व की ओर रखें।
पूजा की शुरुआत गणेश जी को प्रणाम करके करें। फिर हनुमान जी को पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके बाद आरती की जाए।
व्रत रखने वाले व्यक्तियों को फल, दूध और मिठाइयां ग्रहण करनी चाहिए। व्रत खोलते समय भगवान को भोग लगाकर फिर प्रसाद ग्रहण करें। अगर संभव हो तो इसी दिन किसी हनुमान मंदिर में जाकर दर्शन करें और लंगा सेवा में भाग लें।
यह पावन दिन अपने आप को नए सिरे से जीवन के संघर्षों के लिए तैयार करने का अवसर है। हनुमान जी की भक्ति से हमें साहस, शक्ति और समर्पण की प्रेरणा मिलती है। 19 मई को इस तीसरे बड़े मंगल पर हनुमान जी की भक्ति से जुड़ें और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं।




