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Sunday, 05 July 2026
समाचार

ब्रिक्स देशों ने पहलगाम हमले की की निंदा

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Komal
संवाददाता
📅 24 May 2026, 6:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 244 views
ब्रिक्स देशों ने पहलगाम हमले की की निंदा
📷 aarpaarkhabar.com

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स काउंटर टेररिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक में एक महत्वपूर्ण विकास हुआ है। इस बैठक में ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों ने अप्रैल 2025 में कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है। यह हमला हमारे देश के लिए एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना रही है। ब्रिक्स देशों के इस कदम से यह साफ हो गया है कि आतंकवाद के खिलाफ एक वैश्विक सहमति बन गई है।

ब्रिक्स के सदस्य देशों ने भारत के आतंकवाद के खिलाफ "जीरो टॉलरेंस" की नीति का भी समर्थन किया है। यह भारत की एक दृढ़ और स्पष्ट नीति है जिसके तहत हम किसी भी प्रकार के आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करते हैं। चाहे वह किसी भी रूप में हो या जहां से भी आए, भारत सरकार इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करती है। ब्रिक्स देशों के इस समर्थन से भारत की इस नीति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिली है।

पहलगाम हमले की गंभीरता

पहलगाम में हुए आतंकी हमले की घटना बेहद गंभीर और चिंताजनक थी। कश्मीर घाटी में पर्यटन के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में पहलगाम की अपनी एक विशेष पहचान है। इस खूबसूरत पहाड़ी इलाके में हुए इस हमले से न केवल जान-माल का नुकसान हुआ, बल्कि यह आतंकवादियों की नापाक मंशा को भी दर्शाता है। वे हमारे देश की शांति और सुरक्षा को नष्ट करना चाहते हैं।

इस हमले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद अभी भी हमारे लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है। कश्मीर घाटी में पर्यटन को बढ़ावा देने और क्षेत्र की आर्थिक विकास के लिए शांति और सुरक्षा बेहद आवश्यक है। लेकिन आतंकवादी हमेशा से इस क्षेत्र में अशांति फैलाने की कोशिश करते हैं।

भारतीय सुरक्षा बलों ने पहलगाम हमले के बाद तुरंत प्रभावी कदम उठाए हैं। हमारी सेना, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियां निरंतर आतंकवादियों के खिलाफ अपने अभियान को जारी रखे हुए हैं। इन सुरक्षा बलों की कड़ी मेहनत और समर्पण के कारण ही हमारे देश को बड़ी घटनाओं से बचाया जा सका है।

ब्रिक्स की भूमिका और आतंकवाद विरोधी रणनीति

ब्रिक्स एक शक्तिशाली अंतरराष्ट्रीय समूह है जिसमें भारत, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील जैसे प्रभावशाली देश शामिल हैं। इन देशों की आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रुख हमारे वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करता है। ब्रिक्स काउंटर टेररिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस बैठक में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने आतंकवाद से निपटने की विभिन्न रणनीतियों पर विचार किया है। एक समन्वित और सुव्यवस्थित दृष्टिकोण आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में बेहद जरूरी है। ब्रिक्स देशों के बीच जानकारी साझा करने की व्यवस्था भी इस बैठक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ब्रिक्स के सदस्य देशों ने आतंकवाद की वित्तीय सहायता को रोकने पर भी चर्चा की है। आतंकवादियों को विदेशी राष्ट्रों या विदेशी संस्थाओं से मिलने वाली आर्थिक सहायता आतंकवाद को बढ़ावा देती है। इसे रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सख्त कानून और निगरानी की व्यवस्था की जा रही है।

भारत की आतंकवाद विरोधी नीति और भविष्य की दिशा

भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी "जीरो टॉलरेंस" नीति को लेकर हमेशा एक दृढ़ और स्पष्ट रुख अपनाया है। यह नीति केवल एक घोषणा नहीं है, बल्कि इसे व्यावहारिक रूप में लागू किया जाता है। भारत की सुरक्षा एजेंसियां निरंतर आतंकवाद के विभिन्न नेटवर्कों पर निगरानी रखती हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई करती हैं।

सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा को मजबूत करना भारत की एक प्रमुख प्राथमिकता है। पड़ोसी देशों से आने वाले आतंकवादियों को रोकने के लिए हमारी सीमा सुरक्षा दलों ने अपनी क्षमता को बढ़ाया है। साइबर आतंकवाद से निपटने के लिए भी हमारे देश ने आधुनिक तकनीकों में निवेश किया है।

भविष्य में आतंकवाद से निपटने के लिए और भी बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता होगी। ब्रिक्स जैसे मंचों पर आतंकवाद विरोधी रणनीति पर चर्चा करना इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत इन मंचों पर अपनी सक्रिय भूमिका निभाना जारी रखेगा।

निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि ब्रिक्स देशों के इस कदम से न केवल पहलगाम हमले की निंदा होती है, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ एक वैश्विक संदेश भी जाता है। भारत की "जीरो टॉलरेंस" नीति को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलना हमारे देश के लिए एक शक्तिशाली संदेश है। हम आशा करते हैं कि विश्व के सभी देश मिलकर आतंकवाद के इस खतरे को समाप्त करने में भारत का साथ देंगे।