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Saturday, 04 July 2026
विश्व

ट्रंप ने बताया US-ईरान समझौता कब तक होगा

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Komal
संवाददाता
📅 24 May 2026, 7:01 AM ⏱ 1 मिनट 👁 287 views
ट्रंप ने बताया US-ईरान समझौता कब तक होगा
📷 aarpaarkhabar.com

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक नया मोड़ आया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि दोनों देश युद्ध खत्म करने के समझौते के बेहद करीब हैं। इस समझौते से न सिर्फ दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा, बल्कि होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा भी सुलझ सकता है। ट्रंप के इस बयान ने विश्व राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है।

दूसरी ओर ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर कलीबाफ ने कहा है कि तेहरान अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं करता। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपने राष्ट्रीय अधिकारों से कभी पीछे नहीं हटेगा। यह बयान ट्रंप के आशावादी बयान के विपरीत है और दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को दर्शाता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है और यहाँ से दुनिया के तेल का लगभग 20-21 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। यह मार्ग एशिया, यूरोप और अमेरिका के बीच व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए इसके ऊपर नियंत्रण रखना किसी भी शक्तिशाली देश के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होता है।

पिछले कुछ सालों में अमेरिका और ईरान के बीच इसी होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कई बार तनाव देखा गया है। ईरान ने अमेरिका के खिलाफ प्रतिबंध लगाए जाने पर होर्मुज को बंद करने की धमकी भी दी है। अमेरिका के लिए यह सबसे बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि इससे तेल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है।

ट्रंप के अनुसार अगर दोनों देश समझौता कर लेते हैं तो होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए मुद्दे भी सुलझ सकते हैं। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी स्थिरता मिलेगी। लेकिन ईरान के कलीबाफ का बयान साफ करता है कि यह समझौता आसानी से नहीं होने वाला है।

अमेरिका का रुख और ट्रंप की नीति

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में ईरान के साथ 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) से अमेरिका को अलग कर दिया था। उस समय उन्होंने इसे "सबसे बुरा समझौता" बताया था। उसके बाद से अमेरिका ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं।

अब अपने दूसरे कार्यकाल में ट्रंप एक अलग रवैया अपना रहे हैं। वह ईरान से सीधे संवाद की बात कर रहे हैं और समझौते की संभावना व्यक्त कर रहे हैं। इस बदलाव के पीछे विभिन्न कारण हो सकते हैं। अमेरिका की अर्थव्यवस्था को तेल की कीमतों में स्थिरता चाहिए। साथ ही, विश्व के अन्य हिस्सों में अमेरिका के सैनिक संसाधन भी लगे हैं।

ट्रंप की व्यावहारिक नीति व्यापार और आर्थिक हितों पर केंद्रित है। उनके लिए ईरान के साथ समझौता कर के व्यापार को बढ़ाना अधिक लाभदायक साबित हो सकता है। इसीलिए वह ईरान के साथ बातचीत की पहल कर रहे हैं।

ईरान की सतर्कता और भविष्य की चुनौतियाँ

ईरानी नेतृत्व को अमेरिका पर विश्वास नहीं है। ईरान का मानना है कि अमेरिका अपने हितों के अनुसार किसी भी समझौते को तोड़ सकता है। 2015 के परमाणु समझौते को तोड़ना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। उस समय ईरान ने सभी शर्तें मानी थीं, लेकिन अमेरिका अपने राजनीतिक कारणों से उससे अलग हो गया।

इसीलिए कलीबाफ का बयान समझदारी दिखाता है। ईरान अपनी परमाणु क्षमता को बनाए रखना चाहता है और अपनी क्षेत्रीय शक्ति को भी कायम रखना चाहता है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण उसके लिए रणनीतिक महत्व रखता है।

भविष्य में दोनों देशों के बीच समझौता तभी संभव है जब वास्तविक विश्वास का माहौल बने। इसके लिए दोनों को एक-दूसरे के हितों को समझना होगा। होर्मुज का मुद्दा इतना महत्वपूर्ण है कि इसे दोनों देश अलग से सुलझा भी सकते हैं। लेकिन यह बहुत कठिन है क्योंकि यह मुद्दा ईरान की क्षेत्रीय शक्ति से जुड़ा है।

ट्रंप के दावे के बाद भी विशेषज्ञों को संदेह है कि असल में कोई ठोस समझौता होगा या नहीं। आने वाले समय में दोनों देशों की नीतियों का निरीक्षण करना होगा। एक बात तय है कि होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य विषय बना रहेगा।