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Sunday, 05 July 2026
विश्व

चीन में 70 करोड़ कैमरों से विदेशी नागरिकों की निगरानी

author
Komal
संवाददाता
📅 25 May 2026, 5:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 567 views
चीन में 70 करोड़ कैमरों से विदेशी नागरिकों की निगरानी
📷 aarpaarkhabar.com

चीन में विदेशी नागरिकों की निगरानी को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है जो पूरी दुनिया को हैरान कर देने वाला है। नई रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि चीन सरकार 70 करोड़ से भी ज्यादा कैमरों और अत्याधुनिक डिजिटल डाटा सिस्टम की मदद से विदेशी नागरिकों की गतिविधियों पर पूरी तरह नजर रख रही है। यह निगरानी प्रणाली इतनी व्यापक है कि कोई भी विदेशी नागरिक चीन में इससे बच नहीं सकता।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और फेस रिकग्निशन तकनीक का उपयोग करके चीन हर विदेशी व्यक्ति के ठिकाने, उनकी गतिविधियों, उनके सामाजिक संबंधों और उनकी निजी जानकारी को ट्रैक कर रहा है। यह प्रणाली इतनी शक्तिशाली है कि विदेशी पत्रकारों, कूटनीतिज्ञों और संवेदनशील व्यक्तियों को विशेष निगरानी सूची में रखा गया है।

चीन की यह डिजिटल जासूसी प्रणाली दुनिया में सबसे बड़ी और सबसे व्यापक निगरानी व्यवस्था मानी जाती है। इस प्रणाली को स्थापित करने में चीन सरकार ने अरबों डॉलर का निवेश किया है। लाखों कैमरे सड़कों, होटलों, एयरपोर्ट, ट्रेन स्टेशन, बैंकों और सरकारी कार्यालयों में लगे हुए हैं जो 24 घंटे निगरानी करते हैं।

चीन की निगरानी प्रणाली कितनी उन्नत है

चीन की यह निगरानी व्यवस्था दुनिया की सबसे उन्नत तकनीक पर आधारित है। इस प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, बायोमेट्रिक डाटा, जीपीएस ट्रैकिंग और क्लाउड डाटा स्टोरेज शामिल है। चीन सरकार ने अमेरिका, यूरोप और अन्य देशों की तुलना में एक अधिक आक्रामक निगरानी नीति अपनाई है।

यह निगरानी प्रणाली केवल अपराधियों को पकड़ने के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक विरोधियों और अलगाववादियों को ट्रैक करने के लिए भी उपयोग की जाती है। चीन के जिंजियांग क्षेत्र में तो यह निगरानी प्रणाली इतनी सख्त है कि वहां के उइगर समुदाय की हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है।

चीन की सरकार ने एक शक्तिशाली डाटाबेस तैयार किया है जिसमें देश आने वाले हर विदेशी नागरिक की जानकारी दर्ज होती है। इस डाटाबेस में व्यक्ति का नाम, पासपोर्ट नंबर, आने की वजह, ठहरने का पता, फोन नंबर और यहां तक कि उनके परिवार की जानकारी भी शामिल होती है। जब विदेशी नागरिक चीन में प्रवेश करते हैं, तो उनके फेस, आइरिस और फिंगरप्रिंट की स्कैनिंग की जाती है।

विदेशी पत्रकारों और संवेदनशील लोगों की विशेष निगरानी

चीन सरकार विदेशी पत्रकारों, राजनेताओं, कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को विशेष निगरानी सूची में रखती है। इन लोगों के लिए चीन में रहना बेहद मुश्किल हो गया है क्योंकि उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है। विदेशी पत्रकारों को अनुमति के बिना कहीं जाने की स्वतंत्रता नहीं है। उन्हें निर्धारित इलाकों में ही रहना पड़ता है।

चीन सरकार ने अनौपचारिक रूप से कई विदेशी पत्रकारों को देश छोड़ने के लिए मजबूर किया है। इसके अलावा, विदेशी एनजीओ के कार्यकर्ताओं पर भी सख्त नियंत्रण बनाया गया है। इंटरनेट पर विदेशियों की गतिविधियों को भी मॉनिटर किया जाता है। चीन के सोशल मीडिया ऐप्लिकेशन पर विदेशी नागरिकों की पोस्ट को भी देखा जाता है।

डिजिटल निगरानी के खतरे और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया

चीन की इस निगरानी प्रणाली के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने आलोचना की है। अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य देशों ने चीन से इस निगरानी व्यवस्था को समाप्त करने की मांग की है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह निगरानी प्रणाली व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता का उल्लंघन करती है।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी चीन की इस प्रणाली के खिलाफ चेतावनी दी है। हालांकि, चीन सरकार इन आलोचनाओं को नजरअंदाज करती रही है। चीन का कहना है कि यह निगरानी प्रणाली राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

चीन की सरकार ने साफ कर दिया है कि विदेशी नागरिकों को चीन में पूरी तरह निगरानी के अधीन रहना पड़ेगा। इस नीति के तहत कोई भी विदेशी नागरिक चीन में अपनी निजता को बरकरार नहीं रख सकता। सरकार के सुरक्षा एजेंसियों को किसी भी विदेशी व्यक्ति के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिवाइसों तक पहुंचने का अधिकार है।

विदेशी बिजनेसमैन और कर्मचारियों को भी इसी प्रणाली के अधीन रहना पड़ता है। कई विदेशी कंपनियों के कर्मचारियों ने चीन में काम करना छोड़ दिया है क्योंकि उन्हें अपनी गोपनीयता का खतरा महसूस होता है। विदेशी मीडिया संस्थानों के सामने भी बड़ी चुनौतियां आ रही हैं।

कुल मिलाकर, चीन की यह निगरानी व्यवस्था विश्व में अभूतपूर्व है। 70 करोड़ कैमरों की नेटवर्क के माध्यम से चीन सरकार हर विदेशी नागरिक पर नजर रख रही है। यह प्रणाली न केवल सुरक्षा के नाम पर, बल्कि राजनीतिक नियंत्रण के लिए भी उपयोग की जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को चीन से इस प्रणाली को मानवीय तरीके से संचालित करने की मांग करनी चाहिए।