🔴 ब्रेकिंग
TMC ऑफिस पर ताला: ममता के खिलाफ ऋतब्रत का विद्रोह|पुरानी झाड़ू हटाएं और बढ़ाएं बैंक बैलेंस|दिग्विजय सिंह राम मंदिर चंदा वापस लेंगे कोर्ट में|वैभव सूर्यवंशी का न्यू चैप्टर पोस्ट डेब्यू या सरप्राइज|शोहरत की कीमत: आलिया की ट्रोलिंग पर महेश भट्ट|उत्तर-पश्चिम भारत में तेज बारिश, मॉनसून अपडेट|मानसून में राजस्थान की 5 सबसे खूबसूरत जगहें|फ्रांस ने अमेरिका को दिया स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी गिफ्ट|राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई बैठक, इस्तीफों पर विचार|खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति का दर्द भरा रोना|TMC ऑफिस पर ताला: ममता के खिलाफ ऋतब्रत का विद्रोह|पुरानी झाड़ू हटाएं और बढ़ाएं बैंक बैलेंस|दिग्विजय सिंह राम मंदिर चंदा वापस लेंगे कोर्ट में|वैभव सूर्यवंशी का न्यू चैप्टर पोस्ट डेब्यू या सरप्राइज|शोहरत की कीमत: आलिया की ट्रोलिंग पर महेश भट्ट|उत्तर-पश्चिम भारत में तेज बारिश, मॉनसून अपडेट|मानसून में राजस्थान की 5 सबसे खूबसूरत जगहें|फ्रांस ने अमेरिका को दिया स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी गिफ्ट|राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई बैठक, इस्तीफों पर विचार|खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति का दर्द भरा रोना|
Sunday, 05 July 2026
विश्व

ट्रंप ईरान डील पर ओबामा को निशाना

author
Komal
संवाददाता
📅 25 May 2026, 5:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 643 views
ट्रंप ईरान डील पर ओबामा को निशाना
📷 aarpaarkhabar.com

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ किसी भी संभावित समझौते पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि वह कोई डील करेंगे तो वह निश्चित रूप से पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा किए गए समझौते से कहीं बेहतर होगी। ट्रंप की यह बयानबाजी अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच आई है और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया आयाम जोड़ रही है।

वाशिंगटन से मिली जानकारी के अनुसार ट्रंप ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि ओबामा प्रशासन द्वारा २०१५ में किया गया ईरान नाभिकीय समझौता (जेसीपीओए) पूरी तरह से असफल रहा था। उन्होंने कहा कि उस समय की डील ईरान को बहुत अधिक सुविधा देती थी और अमेरिका के हितों की रक्षा नहीं करती थी। ट्रंप के अनुसार वह समझौता दुनिया के लिए खतरनाक था और अमेरिकी सुरक्षा को कमजोर करता था।

ट्रंप की ओबामा डील के प्रति आलोचना

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने राष्ट्रपति काल में २०१८ में ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को अलग कर दिया था। यह कदम अंतरराष्ट्रीय समुदाय में काफी विवादास्पद रहा था। ट्रंप का मानना था कि ओबामा की डील पूरी तरह से खामियों से भरी हुई थी और यह ईरान को अपने नाभिकीय कार्यक्रम को जारी रखने का मौका दे रही थी। उन्होंने दावा किया था कि यह समझौता अमेरिकी सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा था।

अब जबकि ट्रंप फिर से अमेरिकी राजनीति के केंद्र में हैं, वह ईरान के साथ नए सिरे से बातचीत की बात कर रहे हैं। लेकिन उनकी शर्त साफ है कि कोई भी नया समझौता पहले वाले की तुलना में बहुत अधिक मजबूत और अमेरिका के पक्ष में होगा। उन्होंने कहा है कि उनकी टीम पहले से ही विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है और ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयारी कर रही है।

ट्रंप के मुताबिक, ईरान को समझना चाहिए कि अगर वह किसी समझौते पर आना चाहते हैं तो उन्हें अमेरिका की शर्तों को स्वीकार करना होगा। उन्होंने साफ कर दिया है कि अमेरिका किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा जो अमेरिकी हितों के विपरीत हो। ट्रंप का रुख यह दर्शाता है कि वह ईरान के साथ अपनी पूर्ववर्ती नीति को जारी रखने का इरादा रखते हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भू-राजनीतिक प्रभाव

ट्रंप की इन टिप्पणियों के बाद से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में काफी चर्चा चल रही है। यूरोपीय संघ के देश जो ईरान के साथ वर्तमान समझौते को बनाए रखने के पक्ष में थे, वे अब चिंतित दिख रहे हैं। ईरान की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया मिली है। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि अगर अमेरिका एकतरफा रूप से शर्तें बदलने की कोशिश करता है तो वह भी अपनी प्रतिशोधी कार्रवाई करेगा।

इस मुद्दे का असर विश्व के तेल बाजार पर भी पड़ रहा है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष की स्थिति आ जाए तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

मध्य पूर्व में अमेरिका की भू-राजनीतिक रणनीति के लिए भी ट्रंप की यह नीति महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इजराइल जैसे देश अमेरिका के साथ गठबंधन में हैं, जो ईरान के मजबूत होने से नाखुश हैं। इसलिए ट्रंप की ईरान विरोधी नीति इन देशों को पसंद आ रही है।

भविष्य की संभावनाएं और बातचीत का दायरा

ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान समय में ईरान के साथ बातचीत अभी शुरुआती दौर में है और अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा है कि उनकी टीम विभिन्न विकल्पों पर गंभीरता से काम कर रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि ईरान को अमेरिका की शर्तें माननी होंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह नीति मध्य पूर्व की राजनीति को और जटिल बना सकती है। ईरान पहले से ही कई क्षेत्रीय शक्तियों के साथ संघर्षरत है, और अमेरिका की कड़ी नीति इस स्थिति को और बिगाड़ सकती है। दूसरी ओर, यदि दोनों देशों के बीच कोई समझौता हो जाता है तो यह पूरे क्षेत्र में शांति के लिए एक बड़ा कदम हो सकता है।

ट्रंप की ईरान नीति का एक और पहलू यह है कि वह डमोक्रेटिक पार्टी और ओबामा को निशाना बनाना चाहते हैं। २०२४ की राष्ट्रीय चुनाव प्रक्रिया में ट्रंप की यह नीति उनके राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ एक मजबूत हथियार साबित हो सकती है। वह दावा कर रहे हैं कि ओबामा की विदेश नीति गलत थी और अब वह उसे सुधारने के लिए तैयार हैं।

अंत में, यह कहा जा सकता है कि अमेरिका और ईरान के बीच का यह तनाव आने वाले दिनों में और भी बढ़ सकता है। ट्रंप की कड़ी नीति और ईरान की प्रतिक्रियात्मक रणनीति एक दूसरे को चुनौती दे रही हैं। इस परिस्थिति में विश्व समुदाय और खासकर यूरोपीय देशों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है कि वे दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाए रखें और शांति के लिए प्रयास करें।