तृणमूल में AAP जैसा खेला, सांसद नाराज भाजपा से संपर्क
पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी के अंदर भारी उथल-पुथल मची हुई है। हार से पहले जहां पार्टी में एकता और भाईचारे का माहौल दिखता था, वहीं चुनाव के बाद पार्टी के भीतर कलह की स्थिति पैदा हो गई है। कई दिग्गज सांसद और विधायक अपने नेतृत्व से नाराज हो गए हैं और उनका कहना है कि टिकट वितरण में भेदभाव किया गया। यह स्थिति आम आदमी पार्टी जैसी ही लग रही है, जहां कुछ साल पहले आंतरिक कलह के कारण पार्टी में बड़े बदलाव देखने को मिले थे।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तृणमूल कांग्रेस के कई राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता अब भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़ने की बातचीत कर रहे हैं। ये लोग अपनी नई राजनीतिक दिशा तय करने में जुटे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि तृणमूल कांग्रेस का नेतृत्व उनके प्रति न्यायसंगत नहीं रहा। पार्टी के अंदर पदों और टिकटों को लेकर जो पारदर्शिता होनी चाहिए थी, वह नहीं रही। इसके कारण कई वरिष्ठ और अनुभवी नेता अपना समर्थन दूसरी पार्टियों की ओर मोड़ने के लिए तैयार हो गए हैं।
नेतृत्व से नाराजगी का कारण
तृणमूल कांग्रेस में नाराजगी के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है टिकट वितरण की प्रक्रिया में भेदभाव। कई ऐसे सांसद हैं जिन्होंने पार्टी के लिए कई साल तक मेहनत की है, लेकिन इस बार उन्हें टिकट नहीं दिए गए। इसके अलावा, पार्टी की कार्यशैली और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर भी कई शिकायतें सामने आई हैं। नेतृत्व द्वारा किए गए कुछ फैसलों को लेकर आम सदस्यों में भी असंतोष है।
चुनाव के बाद की स्थिति को देखते हुए कई सांसदों का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस अब राज्य में सत्ता में नहीं रह पाएगी। ऐसे में उनके लिए अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में सोचना जरूरी है। वे यह भी सोचते हैं कि भाजपा के साथ जुड़कर वे राष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसी सोच के तहत कई नेता भाजपा के साथ संपर्क स्थापित कर रहे हैं।
भाजपा की सावधानी और रणनीति
भारतीय जनता पार्टी इस स्थिति को समझ रही है, लेकिन वह किसी भी तरह की जल्दबाजी करने से बच रही है। भाजपा के नेताओं का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी कलह स्वाभाविक तरीके से होगी और उन्हें इसका लाभ उठाने के लिए धैर्य से काम लेना चाहिए। भाजपा की रणनीति यह है कि वह उन नेताओं को अपने में शामिल करे जो पार्टी के लिए वास्तविक सामर्थ्य रखते हों। किसी भी ऐसे नेता को शामिल करना भाजपा के लिए हानिकारक हो सकता है जो सिर्फ अपने हितों के लिए पार्टी बदले।
भाजपा के शीर्ष नेताओं ने अपने कार्यकर्ताओं को इन नेताओं से संपर्क रखने के लिए कहा है, लेकिन कोई जल्दबाजी का फैसला न लें। भाजपा को पता है कि पश्चिम बंगाल में उसकी मजबूत उपस्थिति के लिए स्थानीय नेताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए वह सही समय का इंतजार कर रही है ताकि सही लोग सही समय पर पार्टी में शामिल हों।
आम आदमी पार्टी से तुलना
तृणमूल कांग्रेस की वर्तमान स्थिति आम आदमी पार्टी से मिलती-जुलती है। कुछ साल पहले आम आदमी पार्टी में भी ऐसी ही परिस्थिति देखने को मिली थी। पार्टी के भीतर आंतरिक कलह ने पार्टी को कमजोर कर दिया था। कई शीर्ष नेता पार्टी छोड़कर चले गए थे। कुछ लोग तो भाजपा में भी शामिल हो गए। यह स्थिति आम आदमी पार्टी के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हुई।
तृणमूल कांग्रेस भी ऐसी ही स्थिति से गुजर रहा है। अगर पार्टी नेतृत्व अपने भीतर की समस्याओं को तुरंत हल नहीं करता है, तो यह पार्टी के लिए घातक साबित हो सकता है। कई अनुभवी नेताओं के चले जाने से पार्टी की कार्यक्षमता में कमी आ सकती है। इसके अलावा, पार्टी की जमीनी मजबूती भी प्रभावित हो सकती है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हुई है। आने वाले दिनों में कई ऐसी घटनाएं होने वाली हैं जो राज्य की राजनीतिक परिस्थिति को पूरी तरह से बदल सकती हैं। तृणमूल कांग्रेस का नेतृत्व अगर अपने अंदर की समस्याओं को दूर न कर सका, तो पार्टी के लिए आने वाले समय में चुनौतियां और भी बढ़ सकती हैं। पार्टी को तुरंत अपने नेताओं को संतुष्ट करने के उपाय करने चाहिए अन्यथा पार्टी की हालत खस्ता हो सकती है।




