अमेरिका ने तोड़ा सीजफायर, ईरान भड़का
खाड़ी क्षेत्र में एक बार फिर से तनाव की स्थिति बन गई है। अमेरिका के नए सैन्य हमलों के बाद ईरान ने तीव्र प्रतिक्रिया दी है। तेहरान के अधिकारियों का मानना है कि अमेरिका ने सीजफायर समझौते का उल्लंघन किया है। होर्मुज स्ट्रेट के पास हुए इन हमलों से मध्य पूर्व में शांति की प्रक्रिया को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
ईरानी सेना के प्रवक्ता ने बताया कि अमेरिकी सैन्य विमान बंदर अब्बास के समीप उड़ रहे थे। इसी दौरान ईरानी वायु सेना ने एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया है। इसके अलावा, एक F-35 फाइटर जेट को भी पीछे हटने पर मजबूर किया गया। यह घटना इस क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों में हुए सबसे गंभीर सैन्य संघर्ष को दर्शाती है।
अमेरिकी रक्षा विभाग ने इन आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा है कि उनके सभी विमान और ड्रोन सुरक्षित हैं। हालांकि, होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ने के बाद से कई अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं। खाड़ी क्षेत्र में व्यापार और तेल के परिवहन पर इसका सीधा असर देखा जा सकता है।
सीजफायर समझौते में आई दरार
पिछले दो महीने पहले ईरान और अमेरिका के बीच एक सीमित सीजफायर समझौता हुआ था। इसके तहत दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर सैन्य कार्रवाई रोकने का वचन दिया था। लेकिन अब यह समझौता खतरे में दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय शांति सम्मेलनों में जो बातचीत चल रही थी, वह भी ठंडी पड़ गई है।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका लगातार इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। इससे शांति के लिए प्रतिबद्धता का संदेश नहीं मिल रहा। तेहरान का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से सीजफायर बातचीत को गंभीर नुकसान पहुंचेगा।
अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ भी इस परिस्थिति से चिंतित हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने दोनों पक्षों से संयम बरतने का आह्वान किया है। यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों ने भी कहा है कि किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई से बचा जाना चाहिए। इस समय दोनों देशों के बीच संवाद ही एकमात्र समाधान हो सकता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव
होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक है। यहां से रोजाना लाखों बैरल तेल का परिवहन होता है। इस क्षेत्र में सैन्य तनाव से वैश्विक तेल की कीमतें प्रभावित होती हैं। भारत सहित कई एशियाई देश इसी मार्ग पर तेल आयात करते हैं।
मध्य पूर्व के अन्य देश भी इस स्थिति से प्रभावित हो रहे हैं। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी सहयोगी परिषद के सदस्य देश इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। इन देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
यमन जैसे युद्धग्रस्त क्षेत्रों में भी इसका असर पड़ रहा है। हूती विद्रोहियों ने कहा है कि वे अमेरिकी जहाजों पर निगरानी बढ़ा रहे हैं। इसी क्षेत्र में पहले भी व्यापारिक जहाजों पर हमले की घटनाएं हुई हैं। ऐसे में नए सैन्य तनाव से क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ सकती है।
आगे का रास्ता और संभावनाएं
इस समय दोनों देशों के बीच वार्ता के लिए कोई तय समय निर्धारित नहीं है। कतर और ओमान जैसे देश मध्यस्थता के प्रयास कर रहे हैं। लेकिन सैन्य तनाव से बातचीत मुश्किल हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों पक्ष संयम नहीं बरतते तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
बिडेन प्रशासन का यह कदम राजनीतिक दबाव से जुड़ा हो सकता है। घरेलू राजनीति में कई मुद्दों पर अमेरिका का रुख कठोर दिख रहा है। वहीं, ईरान के नेतृत्व में भी राजनीतिक बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच किसी भी समझौते पर पहुंचना कठिन दिख रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रयास कर रहा है। किंतु, जब तक दोनों पक्ष आपसी विश्वास और संयम का रास्ता नहीं अपनाते, तब तक शांति की कोई संभावना नहीं दिखती है। होर्मुज स्ट्रेट के पास अगर कोई बड़ी घटना हो गई तो इसके परिणाम वैश्विक स्तर पर देखे जा सकते हैं।
निकट भविष्य में ईरान-अमेरिका संबंधों की दिशा तय होगी। अगर दोनों देश सैन्य प्रदर्शनी से हटकर संवाद का मार्ग अपनाएं तो क्षेत्र में शांति संभव है। परंतु, वर्तमान घटनाओं के आलोक में यह निकट संभव नहीं दिखता है। आने वाले दिनों में इस क्षेत्र की निगरानी और भी महत्वपूर्ण हो गई है।




