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Saturday, 06 June 2026
खेल

एवरेस्ट पर हिलेरी-तेनजिंग का ऐतिहासिक विजय

author
Komal
संवाददाता
📅 29 May 2026, 7:15 AM ⏱ 1 मिनट 👁 779 views
एवरेस्ट पर हिलेरी-तेनजिंग का ऐतिहासिक विजय
📷 aarpaarkhabar.com

आज का दिन विश्व के पर्वतारोहण के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। 29 मई 1953 को एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर पहली बार मानव कदम रखे थे। यह एक ऐतिहासिक पल था जिसने पूरी दुनिया को अवाक कर दिया था। दोनों पर्वतारोहियों की इस महान उपलब्धि को आज भी हर पर्वतारोही और खेल प्रेमी याद करते हैं।

यह घटना केवल एक पर्वतारोहण अभियान नहीं था, बल्कि मानव की शारीरिक और मानसिक क्षमता का एक अद्भुत प्रमाण था। 8,849 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचना कोई आसान काम नहीं था। वहां की जलवायु बेहद कठोर है, ऑक्सीजन की कमी है, और तापमान शून्य से कहीं नीचे रहता है। इन सभी विषम परिस्थितियों के बावजूद ये दोनों वीर सेनानी अपने सपने को पूरा करने में कामयाब रहे।

एवरेस्ट फतह का रोमांचक सफर

एडमंड हिलेरी न्यूजीलैंड के थे जबकि तेनजिंग नोर्गे नेपाल से संबंधित थे। दोनों ने 1953 के अभियान में शेरपा समुदाय के सदस्यों के साथ मिलकर काम किया। यह अभियान ब्रिटिश पर्वतारोहण दल का हिस्सा था, जिसका नेतृत्व जॉन हंट कर रहे थे। पूरी दुनिया की नजरें इस अभियान पर लगी हुई थीं क्योंकि कई देश पहले एवरेस्ट पर चढ़ने की कोशिश कर चुके थे, लेकिन सभी असफल रहे थे।

हिलेरी और तेनजिंग की जोड़ी 29 मई 1953 की सुबह कैंप चार से चोटी की ओर बढ़ी। उन्होंने 11:30 बजे एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचा। इस महान क्षण में उन्होंने एक-दूसरे को गले लगाया और दुनिया के सर्वोच्च बिंदु पर खड़े होने का जश्न मनाया। हिलेरी ने बाद में कहा कि यह उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पल था। उन्होंने एवरेस्ट की चोटी पर नेपाली झंडा, भारतीय झंडा और यूनियन जैक फहराए। यह दृश्य पूरी दुनिया में खबर बन गया।

ऐतिहासिक उपलब्धि और इसका महत्व

हिलेरी और तेनजिंग की एवरेस्ट विजय विश्व इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुई। इससे पहले कोई नहीं जानता था कि क्या मनुष्य इतनी ऊंचाई पर जीवित रह सकता है। यह विजय साबित करती थी कि मनुष्य की संकल्प शक्ति और दृढ़ निश्चय से कोई भी असंभव काम संभव हो सकता है।

तेनजिंग नोर्गे के लिए यह विजय विशेष महत्व रखती थी क्योंकि वे एवरेस्ट के पास रहने वाले शेरपा समुदाय से आते थे। शेरपा लोगों को पर्वतारोहण में माहिर माना जाता है। तेनजिंग के इस सफल प्रयास ने शेरपा समुदाय को पूरी दुनिया में प्रसिद्धि दिलाई। उनकी प्रतिभा और समर्पण को सभी ने स्वीकार किया।

हिलेरी को इस उपलब्धि के लिए न्यूजीलैंड में किट्टी साहब की उपाधि दी गई। नेपाल में तेनजिंग को देश का एक वीर माना जाता है। दोनों पर्वतारोहियों को पूरी दुनिया में सम्मान मिला। उन्होंने विभिन्न देशों में व्याख्यान दिए और पर्वतारोहण के बारे में अपने अनुभव साझा किए।

विरासत और आधुनिक समय में प्रभाव

हिलेरी और तेनजिंग की सफलता के बाद हजारों पर्वतारोही एवरेस्ट पर चढ़ने की कोशिश करने लगे। आजकल हर साल सैकड़ों लोग एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचते हैं। महिलाएं भी इस चुनौती को स्वीकार करने लगीं। जूमुला्मो के नाम से विख्यात नेपाली पर्वतारोही जुंको ताबेई 1975 में पहली महिला के रूप में एवरेस्ट पर पहुंचीं।

भारतीय पर्वतारोहियों ने भी एवरेस्ट पर अपनी शक्ति दिखाई है। भारतीय सेना की महिला पर्वतारोही अंशु जामसेन्पा ने 2011 में रिकॉर्ड समय में एवरेस्ट पर पहुंचा था। ऐसे अनेक उदाहरण हैं जो हिलेरी और तेनजिंग की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

एवरेस्ट पर चढ़ना आज भी एक दुर्लभ उपलब्धि है। हालांकि तकनीकी और उपकरणों में काफी सुधार हुआ है, फिर भी यह जोखिम भरा काम बना हुआ है। हर साल कुछ पर्वतारोही एवरेस्ट पर अपनी जान गंवाते हैं। लेकिन मानव की साहस और संकल्प शक्ति ऐसी है कि हर साल नए पर्वतारोही इस चुनौती को स्वीकार करते हैं।

हिलेरी और तेनजिंग की 1953 की विजय मानव जाति के लिए एक सदा-प्रेरणादायक घटना बनी हुई है। यह केवल एवरेस्ट तक की यात्रा नहीं थी, बल्कि मानव सीमाओं को तोड़ने का प्रयास था। आज जब हम इस ऐतिहासिक पल को याद करते हैं, तो हमें गर्व महसूस होता है कि मानवता में इतनी शक्ति है कि वह पृथ्वी के सर्वोच्च बिंदु तक पहुंच सकती है। 29 मई को विश्व के हर कोने में एवरेस्ट दिवस मनाया जाता है, जो इसी ऐतिहासिक विजय को समर्पित है।