दिल्ली में जल संकट: गर्मी में पानी की किल्लत
दिल्ली में इस गर्मी की तपिश लोगों की परेशानियों को और भी बढ़ा देती है। आजकल पूरी दिल्ली एक गंभीर जल संकट से जूझ रही है। दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) बार-बार यह दावा करता है कि पूरी दिल्ली को पर्याप्त पानी की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। शहर के कई इलाकों में लोगों को दिन में सिर्फ कुछ घंटों के लिए ही पानी मिल रहा है। इसी बीच, टैंकर मालिकों के लिए यह समय सोने की खान बन गया है। वे लोग असाधारण मुनाफा कमा रहे हैं, जबकि आम जनता के लिए पानी की हर बूंद कीमती हो गई है।
इस समस्या का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यवर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। दिल्ली के कई इलाकों जैसे नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और दिल्ली के बाहरी इलाकों में हालात और भी गंभीर हैं। महिलाओं को सुबह चार-पांच बजे उठकर पानी भरने के लिए पड़ोस के कुएं, नलकूपों और सरकारी टैंकरों के पास लाइन लगानी पड़ रही है। बुजुर्ग और बीमार लोगों के लिए तो यह स्थिति और भी कठिन साबित हो रही है।
भीषण गर्मी और पानी की अभूतपूर्व कमी
इस बार की गर्मी अभूतपूर्व साबित हुई है। तापमान 47-48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे लोगों का पसीना बहना लाजिमी है। ऐसे में पानी की मांग कई गुना बढ़ गई है। सिर्फ पीने के लिए नहीं, बल्कि नहाने, कपड़े धोने और घर की सफाई के लिए भी पानी की जरूरत पड़ती है। लेकिन दिल्ली जल बोर्ड इस बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है।
जल बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि पानी की आपूर्ति पूरी तरह से यमुना, सतलुज और अन्य नदियों पर निर्भर है। इस साल इन नदियों में पानी की आपूर्ति पिछली वर्षों के मुकाबले कम रही है। हिमालय में बर्फ कम गिरने के कारण और सूखे की स्थिति के कारण नदियों में पानी का स्तर काफी नीचे चला गया है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि दिल्ली जल बोर्ड ने वर्षों से इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला है।
सरकारी दावे और जमीनी हकीकत में खाई
दिल्ली के मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों का दावा है कि शहर को 1100 करोड़ गैलन प्रति दिन (एमजीडी) पानी की आपूर्ति की जा रही है। लेकिन जब हम दिल्ली के विभिन्न इलाकों में देखते हैं, तो यह दावा बिल्कुल झूठा साबित होता है। सफदरजंग, करोल बाग, द्वारका, नोएडा सिटी और महावीर एन्क्लेव जैसे इलाकों में तो पानी की स्थिति बेहद खराब है।
रहवासियों की शिकायतों के अनुसार, सरकारी टैंकर कई दिनों बाद ही आते हैं और जब आते हैं, तो भी वे पूरी क्षमता से नहीं भरे होते। कई मामलों में तो टैंकर आता ही नहीं है। इसी बीच, निजी टैंकर चालकों ने इस समस्या को अपने मुनाफे का जरिया बना लिया है। वे एक टैंकर पानी के लिए 1000 से 2000 रुपये तक चार्ज कर रहे हैं। कुछ इलाकों में तो यह दर और भी ज्यादा है।
टैंकर मालिकों की चांदी और जनता की परेशानी
दिल्ली में टैंकर मालिकों का एक शक्तिशाली नेटवर्क बन गया है। ये लोग जल संकट को अपने फायदे का माध्यम बना रहे हैं। कई टैंकर मालिकों ने इस गर्मी में अपनी कमाई में कई गुना बढ़ोतरी देखी है। एक टैंकर चालक ने बताया कि वह पहले महीने में 30-35 हजार रुपये कमाता था, लेकिन अब वह रोज 1500 से 2000 रुपये आसानी से कमा रहा है। यानी महीने की कमाई 45 हजार से 60 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
इसी तरह, बोतलबंद पानी के विक्रेताओं को भी खूब मुनाफा मिल रहा है। बाजार में पानी की कीमत बढ़ गई है। पहले जहां 20 लीटर का जग 100-150 रुपये में मिलता था, अब वह 250-300 रुपये में मिल रहा है। छोटी बोतलों की कीमत भी दोगुनी हो गई है।
दूसरी तरफ, गरीब परिवारों के लिए यह सब कुछ सहन करना असंभव हो गया है। एक महिला ने बताया कि वह महीने में 2000 रुपये कमाती है, लेकिन अब सिर्फ पानी के लिए ही 500-600 रुपये खर्च करनी पड़ रही है। ऐसे में अन्य जरूरी चीजों पर खर्च करना मुश्किल हो गया है।
यह समय-समय पर दिल्ली सरकार को यह सोचने के लिए मजबूर करता है कि आखिर क्यों यह संकट बार-बार सामने आता है। दिल्ली जल बोर्ड को इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए। वर्षा जल संचयन, भूजल का उचित प्रबंधन और अन्य वैकल्पिक स्रोतों को विकसित करना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो आने वाली गर्मियों में यही स्थिति दोहराई जाएगी, और जनता की परेशानियां बढ़ती ही रहेंगी।




