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Saturday, 04 July 2026
शिक्षा

CBSE मूल्यांकन घोटाला: राहुल का आरोप

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Komal
संवाददाता
📅 01 June 2026, 5:47 AM ⏱ 1 मिनट 👁 504 views
CBSE मूल्यांकन घोटाला: राहुल का आरोप
📷 aarpaarkhabar.com

देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर से गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के कॉपियों के मूल्यांकन को लेकर विपक्ष के शीर्ष नेता राहुल गांधी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। राहुल गांधी का दावा है कि CBSE ने टेंडर की शर्तों में ढील देकर मोबाइल फोन से छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करवाया है। इस कदम से देश के 18.5 लाख छात्रों का भविष्य गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। राहुल गांधी ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी घेरते हुए सवाल उठाए हैं।

CBSE पर राहुल गांधी के आरोप

कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से CBSE के खिलाफ एक विस्तृत पोस्ट साझा की है। उन्होंने अपने आरोप में कहा कि बोर्ड ने परीक्षा के टेंडर की मूल शर्तों में संशोधन करके बेहद महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। राहुल के अनुसार, मूल टेंडर दस्तावेजों में साफ-साफ लिखा था कि सभी कॉपियों को स्कैनर मशीन से ही स्कैन करना होगा। हालांकि, बाद में इस शर्त को हटाकर मोबाइल फोन से कॉपियां स्कैन करने की अनुमति दे दी गई।

राहुल गांधी का तर्क है कि मोबाइल फोन से स्कैन की गई कॉपियों की गुणवत्ता पेशेवर स्कैनर से कम होती है। इससे उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल संस्करण में विकृति आ सकती है। जब मूल्यांकनकर्ता इन विकृत छवियों को देखकर कॉपियों का मूल्यांकन करते हैं, तो उन्हें सही से कुछ उत्तर समझ नहीं आते। इससे सीधे तौर पर छात्रों के अंकों पर नकारात्मक असर पड़ता है।

मूल्यांकन प्रक्रिया में संदिग्ध बदलाव

राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में विस्तार से बताया है कि कैसे इस संपूर्ण प्रक्रिया को लेकर घपलेबाजी की गई है। उन्होंने कहा कि जब टेंडर की शर्तें बदली जा रही थीं, तो CBSE के अधिकारियों को पता होना चाहिए था कि इससे क्या परिणाम हो सकते हैं। लेकिन फिर भी यह निर्णय लिया गया। यह साफ इशारा करता है कि इस पूरे मामले में कोई न कोई राजनीतिक दुरभिसंधि है।

राहुल गांधी ने सवाल उठाया है कि आखिर CBSE ने अचानक से ऐसा फैसला क्यों लिया? वे कहते हैं कि यह साधारण प्रशासनिक निर्णय नहीं लगता। यह एक सुनियोजित कदम प्रतीत होता है जिसके पीछे कोई उद्देश्य हो सकता है। राहुल का मानना है कि इसके पीछे केंद्र सरकार की मिलीभगत है।

पीएम मोदी को घेरते हुए सवाल

राहुल गांधी ने इस मामले में सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा है। वे कहते हैं कि जब देश के 18.5 लाख बच्चों का भविष्य दांव पर है, तो प्रधानमंत्री को इस पर सीधे कार्रवाई करनी चाहिए। राहुल का मानना है कि यह केवल शिक्षा का मामला नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र के भविष्य से जुड़ा विषय है।

राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा है कि अगर सरकार सच में जनहित में काम करती है, तो उसे तुरंत CBSE के इस निर्णय को रद्द करना चाहिए और सभी कॉपियों का नए सिरे से पेशेवर तरीके से मूल्यांकन करवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों का भविष्य किसी राजनीतिक खेल का विषय नहीं हो सकता।

शिक्षा प्रणाली में विश्वास का संकट

इस पूरे विवाद से देश की शिक्षा व्यवस्था में एक गंभीर विश्वास का संकट उत्पन्न हुआ है। अगर सच में CBSE ने टेंडर की शर्तों में अनुचित बदलाव किए हैं, तो यह अत्यंत चिंताजनक है। लाखों माता-पिता अपने बच्चों को CBSE बोर्ड में डालते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यह एक निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था है।

लेकिन ऐसी खबरें सामने आने से यह विश्वास डगमगा जाता है। अगर एक सरकारी संस्था अपनी ही स्थापित प्रक्रियाओं में बदलाव करती है, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर क्यों? क्या वास्तव में इसके पीछे कोई भेदभाव तो नहीं? क्या कुछ छात्रों को अनुचित लाभ देने के लिए ऐसा किया गया है?

आगे का रास्ता

इस मामले का सरकार को गंभीरता से संज्ञान लेना चाहिए। एक स्वतंत्र जांच समिति का गठन करना चाहिए जो यह पता लगाए कि टेंडर में क्यों बदलाव किए गए? क्या सही प्रक्रिया अपनाई गई? और सबसे महत्वपूर्ण बात, क्या इन बदलावों का असर छात्रों के अंकों पर पड़ा है?

राहुल गांधी के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, CBSE को खुद भी स्पष्टीकरण देना चाहिए। बोर्ड को बताना चाहिए कि ऐसे बदलाव क्यों किए गए और क्या ये बदलाव मूल्यांकन की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। पारदर्शिता के साथ अगर सभी बातें साफ हो जाएं, तो इस विवाद को शांत किया जा सकता है।

देश के युवाओं का भविष्य किसी राजनीतिक खेल का विषय नहीं हो सकता। शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी होना चाहिए। अगर CBSE जैसी संस्था पर ही संदेह के बादल मंडराने लगें, तो समूची शिक्षा प्रणाली ही संकट में पड़ जाती है। इसलिए यह जरूरी है कि इस मामले की तुरंत स्वतंत्र जांच की जाए और सच्चाई सामने आए।