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Saturday, 06 June 2026
विश्व

होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान टोल वसूली का कानून

author
Komal
संवाददाता
📅 01 June 2026, 7:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 998 views
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान टोल वसूली का कानून
📷 aarpaarkhabar.com

ईरानी संसद आज एक ऐतिहासिक फैसले के लिए तैयार है। होर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन को लेकर जो विधेयक संसद में आने वाला है, वह न केवल ईरान के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। इस बिल के जरिए ईरान चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट पर टोल वसूली शुरू की जाए और इस पर उसका पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो।

यह स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक है। यहां से हर दिन लाखों बैरल तेल गुजरता है। दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल की खपत इसी स्ट्रेट से होकर गुजरती है। इसलिए इस स्ट्रेट पर किसी भी देश का नियंत्रण अंतर्राष्ट्रीय बाजार को प्रभावित कर सकता है।

ईरान का दावा और अधिकार की बहस

ईरानी नेताओं का स्पष्ट कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट के संचालन का अधिकार केवल ईरान और ओमान के पास है। ईरान का तर्क है कि यह उसके क्षेत्रीय जलों का हिस्सा है और इसलिए वह यहां पर किसी भी प्रकार की टोल वसूली कर सकता है। ईरानी सरकार के अनुसार, इस स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को एक निश्चित राशि का भुगतान करना होगा।

हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय कानून की बात करें तो होर्मुज स्ट्रेट को एक अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता है। संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन के तहत, ऐसे जलमार्गों से सभी देशों के जहाजों को निर्बाध रूप से गुजरने का अधिकार है। इसे "निर्दोष मार्ग" का अधिकार कहा जाता है।

ईरान के इस कदम से पश्चिमी देशों में खलबली मची है। विशेषकर अमेरिका इसका सबसे बड़ा विरोधी है। अमेरिका का कहना है कि ईरान की यह कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।

अमेरिकी नाकेबंदी और आर्थिक दबाव

दूसरी ओर, अमेरिका अभी भी ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी जारी रखने की बात कह रहा है। अमेरिका ने वर्षों पहले ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। ये प्रतिबंध ईरान के तेल निर्यात पर सीधा असर डालते हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रमों पर नियंत्रण करना चाहिए।

ईरान की ओर से कहा गया है कि अगर अमेरिका नाकेबंदी जारी रखेगा, तो ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपने दावे को और भी मजबूती से लागू करेगा। यह एक प्रकार का जवाबी कदम है जो अमेरिकी नीतियों के खिलाफ एक संदेश है।

ईरान का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट से आने वाली राजस्व उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद करेगी। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही कमजोर है। तेल के निर्यात में कमी से ईरान को भारी नुकसान हो रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भविष्य के खतरे

यह विधेयक पास होने के बाद स्थिति और भी जटिल हो सकती है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इसे गंभीरता से ले रहा है। यूरोपीय देशों ने भी चिंता व्यक्त की है कि ऐसा कदम वैश्विक व्यापार को प्रभावित करेगा।

तेल की कीमतें पहले से ही अस्थिर हैं। अगर होर्मुज स्ट्रेट पर टोल लगाया जाता है, तो इससे तेल की कीमतों में और भी वृद्धि हो सकती है। यह विश्व अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।

भारत जैसे देश जो बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं, उनके लिए यह स्थिति और भी गंभीर है। भारत अपनी बहुत सारी तेल की जरूरत मध्य पूर्व से पूरी करता है। होर्मुज स्ट्रेट पर किसी भी प्रकार की बाधा भारतीय अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करेगी।

ईरान की संसद में आज की वोटिंग के बाद स्पष्ट होगा कि ईरान कितना गंभीर है। अगर बिल पास हो जाता है, तो दुनिया को इसके परिणामों के लिए तैयार रहना चाहिए। यह एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है जो आने वाले दिनों में अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करेगा।

ईरान का यह कदम न केवल अमेरिका के साथ उसके संबंधों को और बिगाड़ेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में होर्मुज स्ट्रेट के इर्द-गिर्द हलचल और भी बढ़ेगी। यह मुद्दा भू-राजनीतिक संतुलन को बदल सकता है।