खान सर कोचिंग पर हमला: सात साल में दूसरी घटना
पटना के मुसल्लाहपुर हाट में दो जून 2026 को शहर की सबसे मशहूर कोचिंग संस्था पर एक बार फिर से गोलीबारी की घटना सामने आई है। इस हमले में खान सर के कोचिंग सेंटर के एक सुरक्षा गार्ड को गंभीर चोटें आईं। पुलिस की जांच में पता चल रहा है कि यह हमला कोचिंग इंडस्ट्री में चल रही आपसी प्रतिद्वंद्विता का नतीजा हो सकता है। जो बात सबको हैरान कर रही है, वह यह कि खान सर को यह दूसरा बड़ा हमला है। साल 2019 में भी इसी सेंटर पर क्रूड बम से हमला किया जा चुका था।
पटना में शिक्षा का व्यवसाय पिछले दशक में तेजी से बढ़ा है। खान सर की कोचिंग संस्था इसी बूम का एक सफल उदाहरण है। उन्होंने सस्ती और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई का मॉडल अपनाया, जिससे हजारों गरीब और मध्यम वर्गीय छात्रों तक शिक्षा पहुंची। लेकिन यही उनकी कामयाबी उनके लिए खतरा भी बन गई। जैसे-जैसे खान सर की कोचिंग बड़ी होती गई, वैसे-वैसे अन्य बड़ी कोचिंग संस्थाओं में उनके प्रति असंतुष्टि बढ़ने लगी।
कोचिंग इंडस्ट्री की छिपी लड़ाई
पटना में कोचिंग का व्यवसाय अब सिर्फ शिक्षा नहीं रह गया है। यह एक बहुत बड़ा आर्थिक खेल बन गया है। दसियों अरब रुपये का यह बाजार कई बड़ी और छोटी कोचिंग संस्थाओं के बीच बंटा हुआ है। खान सर की कामयाबी का मतलब दूसरी कोचिंगों के लिए अपना मार्केट शेयर कम होना है। इसीलिए कई विश्लेषकों का मानना है कि ये हमले सिर्फ आपसी रंजिश नहीं हैं, बल्कि कोचिंग इंडस्ट्री के अंदर चल रहे आर्थिक युद्ध का हिस्सा हैं।
बिहार पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा गार्ड को गोली लगी है और घटना के बाद पांच से छह राउंड फायर किए गए। यह हमला बिल्कुल निर्दयता के साथ किया गया, जो इसे एक सामान्य घटना नहीं बनाता। पुलिस की मानें तो गोली मारने वाले पेशेवर नजर आ रहे हैं। ऐसे हमले आमतौर पर किसी बड़े समूह या संगठित अपराध नेटवर्क के द्वारा किए जाते हैं।
खान सर के साथ पहला हमला साल 2019 में हुआ था। उस समय क्रूड बम से कोचिंग सेंटर को नुकसान पहुंचाया गया था। सात साल में दूसरा बड़ा हमला यह संकेत देता है कि किसी न किसी को खान सर की उपस्थिति से परेशानी है। यह परेशानी सिर्फ व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि यह एक संगठित समस्या लगती है।
सस्ता मॉडल: माफिया की नजर में निशाना
खान सर का कोचिंग मॉडल इसलिए भी विशेष है क्योंकि उन्होंने सस्ती कोचिंग दी है। परंपरागत कोचिंगें जहां महीने में पांच से दस हजार रुपये लेती थीं, खान सर ने सौ से दो सौ रुपये महीने का मॉडल शुरू किया। इससे गरीब परिवारों के बच्चों को भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का मौका मिल गया। यह एक क्रांतिकारी कदम था।
हालांकि, इसी मॉडल ने दूसरी कोचिंगों को परेशान भी किया। जब बड़ी कोचिंगें अपने मुनाफे में गिरावट देखने लगीं, तब विभिन्न तरीके अपनाए जाने लगे। दुर्भाग्यवश, बिहार जैसे राज्यों में इस तरह की समस्याएं अपराध की दुनिया से भी जुड़ी हुई हैं। स्थानीय माफिया और अपराध संगठन इस तरह की रंजिशों का फायदा उठाते हैं।
पटना की पुलिस इस समय इन हमलों की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पहली बार में भी गिरफ्तारियां हुई थीं, लेकिन मुख्य षड्यंत्रकारी अभी तक नहीं पकड़े गए। यह बात भी संदेह पैदा करती है कि क्या यह एक बड़े समूह द्वारा संचालित अभियान है।
कानून और व्यवस्था के सवाल
इस घटना ने बिहार की कानून-व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े किए हैं। जब कोई सफल व्यक्तिगत उद्यम इतनी खुली धमकियों का शिकार हो सकता है, तो आम आदमी के लिए क्या बचा है? पुलिस को इस समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए और न केवल इस हमले के असली आरोपियों को पकड़ना चाहिए, बल्कि पूरे कोचिंग इंडस्ट्री में व्याप्त अपराध नेटवर्क को समझना चाहिए।
शिक्षा व्यवसाय को हिंसा से मुक्त रखना एक जिम्मेदारी है। खान सर जैसे उद्यमी जो गरीबों के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें सुरक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है। आशा है कि इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन कोचिंग इंडस्ट्री में चल रहे अपराधों पर कड़ी नजर रखेगा और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सार्थक कदम उठाएगा।
यह घटना सिर्फ खान सर के लिए नहीं, बल्कि पूरे बिहार की शिक्षा प्रणाली के लिए एक चेतावनी है। जहां हिंसा और अपराध शिक्षा को नियंत्रित करने लगे, वहां विकास असंभव है। इसलिए जरूरी है कि सभी पक्ष इस समस्या को राजनीतिक या व्यावसायिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि एक सामाजिक समस्या के रूप में देखें और इसका समाधान खोजें।




