🔴 ब्रेकिंग
DK शिवकुमार CM: IAS अधिकारियों की नई नियुक्ति|पर्स में ये 3 चीजें रखने से खाली होती है जेब|अनुष्का शर्मा होम्योपैथी सपोर्ट विवाद|ट्रंप और नेतन्याहू की तनाव भरी बातचीत का सच|सोने से पहले लगाएं लौंग की क्रीम, बुढ़ापा रहेगा दूर|पीली रोटी का चमत्कार, 43 दिन में बढ़ेगा धन|होटल कारोबारी हत्याकांड: मुख्य आरोपी मारा गया|ईरान युद्ध पर ट्रंप को झटका: संसद से सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव|मालवीय नगर अग्निकांड: क्या 1000 डिग्री तक पहुंचा था तापमान?|ईरान-अमेरिका समझौता: जंग टलेगी, खत्म नहीं होगी|DK शिवकुमार CM: IAS अधिकारियों की नई नियुक्ति|पर्स में ये 3 चीजें रखने से खाली होती है जेब|अनुष्का शर्मा होम्योपैथी सपोर्ट विवाद|ट्रंप और नेतन्याहू की तनाव भरी बातचीत का सच|सोने से पहले लगाएं लौंग की क्रीम, बुढ़ापा रहेगा दूर|पीली रोटी का चमत्कार, 43 दिन में बढ़ेगा धन|होटल कारोबारी हत्याकांड: मुख्य आरोपी मारा गया|ईरान युद्ध पर ट्रंप को झटका: संसद से सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव|मालवीय नगर अग्निकांड: क्या 1000 डिग्री तक पहुंचा था तापमान?|ईरान-अमेरिका समझौता: जंग टलेगी, खत्म नहीं होगी|
Thursday, 04 June 2026
विश्व

पश्चिम एशिया संकट: रूबियो की ईरान और हिजबुल्ला पर टिप्पणी

author
Komal
संवाददाता
📅 03 June 2026, 5:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 923 views
पश्चिम एशिया संकट: रूबियो की ईरान और हिजबुल्ला पर टिप्पणी
📷 aarpaarkhabar.com

पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक बार फिर विवादास्पद बयान दिया है। अमेरिकी सरकार की ओर से किए गए सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए रूबियो ने दावा किया है कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई ने ईरान की नौसेना को पूरी तरह से निष्क्रिय कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि हिजबुल्ला ही इस्राइल और लेबनान के बीच शांति समझौते में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।

रूबियो के अनुसार, अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप ने ईरान की सामरिक क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने यह दावा किया है कि ईरान के सुप्रीम लीडर भी घायल अवस्था में हैं और वर्तमान समय में पर्दे के पीछे से ही सरकार के कामकाज को संचालित कर रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री के इस बयान से पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति और भी गंभीर हो गई है।

सैन्य कार्रवाई का रूबियो द्वारा किया गया बचाव

मार्को रूबियो ने अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप को जायज ठहराते हुए कहा है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से वाजिब और आवश्यक थी। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना की कार्रवाई से ईरान की नौसेना की क्षमता को बहुत नुकसान पहुंचा है। रूबियो के अनुसार, इस सैन्य कार्रवाई के कारण ईरान अब अपने इलाके में सुरक्षा के लिहाज से कमजोर पड़ गया है।

रूबियो ने यह भी कहा कि यह सैन्य कार्रवाई ईरान के आक्रामक रवैये को नियंत्रित करने के लिए की गई थी। उन्होंने दावा किया है कि अमेरिका ने जो भी सैन्य कदम उठाए हैं, वे पूरी तरह से पारदर्शी और अंतर्राष्ट्रीय कानून के दायरे में हैं। विदेश मंत्री के इस बयान से यह साफ है कि अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई को पूरी तरह से न्यायसंगत मानता है।

हिजबुल्ला को शांति में बाधा बताया रूबियो ने

अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट कहा है कि हिजबुल्ला ही वह शक्ति है जो इस्राइल और लेबनान के बीच शांति समझौते में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। रूबियो के अनुसार, अगर हिजबुल्ला को नियंत्रित किया जा सके तो इस्राइल और लेबनान के बीच शांति स्थापित की जा सकती है।

रूबियो ने कहा कि हिजबुल्ला एक आतंकवादी संगठन है जो लेबनान के नागरिकों के जीवन में सिर्फ तबाही और बर्बादी लाता है। वह कहते हैं कि हिजबुल्ला ईरान का प्रॉक्सी है और यह पूरे क्षेत्र में अस्थिरता का कारण बनता है। अमेरिकी विदेश मंत्री के इस बयान से यह स्पष्ट है कि अमेरिका हिजबुल्ला को एक बड़ा खतरा मानता है।

हिजबुल्ला के बारे में रूबियो के विचार पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक परिस्थितियों को समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। हिजबुल्ला एक राजनीतिक और सैन्य संगठन है जो लेबनान में काफी प्रभावशाली है। रूबियो के अनुसार, इस संगठन को खत्म किए बिना इस क्षेत्र में दीर्घकालीन शांति संभव नहीं है।

ईरान की सैन्य क्षमता को क्षतिग्रस्त होने का दावा

रूबियो ने यह दावा किया है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से ईरान की नौसेना को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि ईरान अब पहले जितना शक्तिशाली नहीं रहा है। विदेश मंत्री के अनुसार, ईरान की सामरिक क्षमता में उल्लेखनीय गिरावट आई है।

रूबियो ने यह भी कहा है कि ईरान के सुप्रीम लीडर भी इस सैन्य कार्रवाई से गंभीर रूप से घायल हैं और वर्तमान समय में देश को संचालित करने में असमर्थ हैं। वह कहते हैं कि ईरान की सरकार अब पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गई है। इसका मतलब यह है कि ईरान अब अपने क्षेत्र के किसी भी मुद्दे को लेकर कोई मजबूत कदम नहीं उठा सकता।

रूबियो के इस बयान से पश्चिम एशिया में एक नई स्थिति बन गई है। यह माना जा रहा है कि अमेरिका ईरान को कमजोर करने के लिए सफल हो गया है। लेकिन इसके परिणामस्वरूप पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है।

पश्चिम एशिया की वर्तमान परिस्थिति काफी जटिल और संवेदनशील है। रूबियो के बयान से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने की योजना बना रहा है। लेबनान और इस्राइल के बीच शांति स्थापित करना एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें कई अंतरराष्ट्रीय शक्तियों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

अमेरिकी विदेश मंत्री के इस बयान के बाद ईरान ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। ईरान ने कहा है कि अमेरिका के ये दावे बिल्कुल गलत हैं। ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता को लेकर कोई संदेह नहीं जताया है। इसके अलावा, हिजबुल्ला ने भी रूबियो के बयान को खारिज कर दिया है। हिजबुल्ला ने कहा है कि वह पूरी तरह से सक्षम है और कभी भी अपने सिद्धांतों से पीछे नहीं हटेगा।

वास्तव में, पश्चिम एशिया की यह स्थिति काफी खतरनाक है। इस क्षेत्र में कई शक्तियां अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए काम कर रही हैं। अमेरिका, रूस, चीन और यूरोपीय यूनियन सभी अपनी अपनी रणनीति के तहत काम कर रहे हैं। इस स्थिति में सामान्य नागरिकों का ही सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है।