🔴 ब्रेकिंग
रांची छात्रों का हाई कोर्ट में विरोध, सीएम का पुतला फूंकेंगे|बक्करवाला एनकाउंटर: भाऊ गैंग के दो शूटर गिरफ्तार|आज की टॉप न्यूज: सीमा सुरक्षा और खाप समाचार|गोविंदा दूसरी शादी करने वाले थे: सुनीता आहूजा का खुलासा|पाकिस्तान से खतरा, चीन से असली टक्कर: नरवणे|यूपी शहीद परिवार छात्राओं को स्कूटी योजना|हरियाणा खाप लिव-इन रिलेशन के खिलाफ लव मैरिज समर्थक|ईरान पर अमेरिका के कड़े प्रतिबंध और चीन की भूमिका|प्याज का रस से बालों का झड़ना रोकें – जावेद हबीब का नुस्खा|UP में 9 IPS अफसरों का बड़ा तबादला, 7 जिलों के SP-SSP बदले|रांची छात्रों का हाई कोर्ट में विरोध, सीएम का पुतला फूंकेंगे|बक्करवाला एनकाउंटर: भाऊ गैंग के दो शूटर गिरफ्तार|आज की टॉप न्यूज: सीमा सुरक्षा और खाप समाचार|गोविंदा दूसरी शादी करने वाले थे: सुनीता आहूजा का खुलासा|पाकिस्तान से खतरा, चीन से असली टक्कर: नरवणे|यूपी शहीद परिवार छात्राओं को स्कूटी योजना|हरियाणा खाप लिव-इन रिलेशन के खिलाफ लव मैरिज समर्थक|ईरान पर अमेरिका के कड़े प्रतिबंध और चीन की भूमिका|प्याज का रस से बालों का झड़ना रोकें – जावेद हबीब का नुस्खा|UP में 9 IPS अफसरों का बड़ा तबादला, 7 जिलों के SP-SSP बदले|
Saturday, 03 October 2026
समाचार

तुलसीदास की जेल में लिखी हनुमान चालीसा की अनसुनी कहानी

author
Komal
संवाददाता
📅 02 April 2026, 10:08 AM ⏱ 1 मिनट 👁 891 views
तुलसीदास की जेल में लिखी हनुमान चालीसा की अनसुनी कहानी
📷 Aaj Tak

तुलसीदास की जेल में लिखी हनुमान चालीसा की अनसुनी कहानी

हनुमान जयंती के इस पावन अवसर पर जब लाखों भक्त हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, तो बहुत कम लोग जानते हैं कि इस अमर कृति का जन्म कैसी कठिन परिस्थितियों में हुआ था। महान संत कवि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा की कहानी सिर्फ धार्मिक श्रद्धा की नहीं, बल्कि अटूट विश्वास और धैर्य की भी है।

आज 2 अप्रैल को मनाई जा रही हनुमान जयंती पर आइए जानते हैं कि कैसे मुगल बादशाह अकबर की कैद में रहकर तुलसीदास ने इस अमर कृति की रचना की, जो आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में बसी है।

तुलसीदास की जेल में लिखी हनुमान चालीसा की अनसुनी कहानी

अकबर के दरबार में तुलसीदास

इतिहास की मानें तो 16वीं सदी में जब अकबर का शासन था, तब तुलसीदास अपनी विद्वत्ता और आध्यात्मिक शक्तियों के लिए प्रसिद्ध थे। रामचरितमानस की रचना के बाद उनकी ख्याति दूर-दूर तक फैल चुकी थी। अकबर, जो अपने दरबार में विभिन्न धर्मों के विद्वानों को आमंत्रित करता था, तुलसीदास के बारे में सुनकर उन्हें दरबार में बुलाना चाहता था।

किंवदंतियों के अनुसार, अकबर ने तुलसीदास से कुछ चमत्कार दिखाने की मांग की। जब तुलसीदास ने इनकार कर दिया और कहा कि वे कोई जादूगर नहीं हैं, तो अकबर को यह बात अच्छी नहीं लगी। परिणामस्वरूप, बादशाह ने उन्हें कारागार में डाल दिया।

40 दिनों की कैद और हनुमान चालीसा का जन्म

जेल में बंद तुलसीदास ने अपना समय भगवान हनुमान की आराधना में बिताया। कहा जाता है कि इन्हीं 40 दिनों की कैद के दौरान उन्होंने हनुमान चालीसा की रचना की। यह संख्या '40' कोई संयोग नहीं है - हनुमान चालीसा में कुल 40 दोहे हैं।

जेल की कठिन परिस्थितियों में भी तुलसीदास का मन हनुमान जी की भक्ति में लीन रहा। वे रोज एक दोहा लिखते और हनुमान जी से प्रार्थना करते। माना जाता है कि हर रात हनुमान जी उनके सपनों में आते और उन्हें अगला दोहा लिखने की प्रेरणा देते।

चमत्कार और रिहाई

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब तुलसीदास ने हनुमान चालीसा पूरी की, तो अकबर के दरबार और शहर में अजीबोगरीब घटनाएं होने लगीं। कहते हैं कि हनुमान जी की सेना के रूप में असंख्य बंदरों ने शहर पर कब्जा कर लिया। वे महल की दीवारों पर चढ़े, खजाने को बिखेरा और अफरा-तफरी मचाई।

जब अकबर को पता चला कि यह सब तुलसीदास की वजह से हो रहा है, तो उसने तुरंत उन्हें रिहा करने का आदेश दिया। तुलसीदास की रिहाई के साथ ही यह सारी अजीब घटनाएं रुक गईं।

हनुमान चालीसा का महत्व

| विशेषता | विवरण |

------------------
दोहों की संख्या40
रचनाकाल16वीं सदी
भाषाअवधी/हिंदी
रचना स्थलअकबर की जेल
रचना अवधि40 दिन

हनुमान चालीसा आज दुनियाभर में सबसे अधिक पढ़े जाने वाले धार्मिक ग्रंथों में से एक है। इसकी खूबी यह है कि यह सरल भाषा में लिखी गई है, जिसे आम आदमी भी आसानी से समझ सकता है। चालीसा के हर दोहे में हनुमान जी की शक्ति, भक्ति और राम प्रेम का अद्भुत वर्णन है।

आज भी जीवंत है तुलसीदास की विरासत

तुलसीदास की यह कृति सिखाती है कि कैसे कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी श्रद्धा और भक्ति का सहारा लेकर व्यक्ति महान कार्य कर सकता है। जेल की चारदीवारी के भीतर लिखी गई यह चालीसा आज लाखों लोगों के मन की जेल तोड़कर उन्हें मुक्ति का एहसास दिलाती है।

हनुमान जयंती के इस अवसर पर जब आप हनुमान चालीसा का पाठ करें, तो जरूर याद कीजिए कि यह अमर कृति कैसी कठिनाइयों में जन्मी थी। तुलसीदास का यह अनुभव हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति के आगे दुनिया की कोई भी ताकत टिक नहीं सकती।

आज के दिन जब आप बजरंगबली से प्रार्थना करें, तो यह भी मांगें कि तुलसीदास की तरह हमें भी जीवन की हर कठिनाई में धैर्य और विश्वास के साथ आगे बढ़ने की शक्ति मिले। हनुमान चालीसा सिर्फ 40 दोहे नहीं, बल्कि 40 दिनों की तपस्या और अटूट विश्वास का फल है।